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पहले ही दिन अनट्रेंड ड्राइवरों को पकड़ा दी डेमू, ढाई घंटा रुकी
Updated Tue, 02 Oct 2018 11:29 PM IST
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बरेली सिटी से पीलीभीत जाने वाली डेमू पहले ही दिन दगा दे गई। इंजन खराब होने से ट्रेन ढाई घंटा पीलीभीत स्टेशन पर खड़ी रही। काफी कोशिशों के बाद ट्रेन नहीं चली तो ड्राइवर ने डेमू शेड में इंजीनियर से संपर्क किया, इसके बाद इंजन का फाल्ट दूर हो सका। पहले दिन पीलीभीत स्टेशन से बरेली आने के लिए शौक में बैठे यात्री भी आधी रात के बाद बरेली पहुंच सके। सूत्रों का कहना है कि शेड में स्टार्ट करने वाली मोटर खराब लगा दी गई है। फिलहाल डीआरएम ने जांच के आदेश दिए हैं।
एक अक्टूबर को बरेली सिटी से पीलीभीत के लिए डेमू शाम 6.05 बजे रवाना हुई। पीलीभीत स्टेशन पर ट्रेन 7.53 पहुंच गई। वहां से 9.35 बजे चली तो ड्राइवर से गलत बटन दब गया। इसके बाद ड्राइवर ने ट्रेन चलाई तो वह टस से मस नहीं हुई। यह देखकर ड्राइवर के हाथ पांव फूल गए। इससे पहले मंडलीय अधिकारियों तक बात पहुंचे खुद ही खामी दूर करने में जुट गए। हालांकि उन्होंने स्टेशन मास्टर को सूचना दे दी। काफी देर तक जूझने के बाद इंजन ठीक नहीं हुआ तो उन्होंने सीबीगंज डेमू शेड में इंजीनियर से संपर्क किया। इसके बाद ड्राइवर ने इंजन को रि-स्टार्ट किया। रात 12 बजे ट्रेन चल सकी। सूत्रों का कहना है कि डेमू का इंजन कंप्यूराइज्ड है, जिसको लोको पायलट समझ नहीं पाए। डेमू पहली बार पीलीभीत पहुंची थी। ट्रेन में ज्यादातर यात्री ऐसे थे जो शौकिया तौर से डेमू में बैठे थे।
लोको पायलट पूरी तरह से ट्रेंड हैं। नई टेक्नाजॉजी समझने में कुछ समय लग सकता है। हालांकि अभी डेमू के इंजीनियर शेड में रुके हुए हैं। -डीके सिंह, डीआरएम इज्जतनगर मंडल
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एक अक्टूबर को बरेली सिटी से पीलीभीत के लिए डेमू शाम 6.05 बजे रवाना हुई। पीलीभीत स्टेशन पर ट्रेन 7.53 पहुंच गई। वहां से 9.35 बजे चली तो ड्राइवर से गलत बटन दब गया। इसके बाद ड्राइवर ने ट्रेन चलाई तो वह टस से मस नहीं हुई। यह देखकर ड्राइवर के हाथ पांव फूल गए। इससे पहले मंडलीय अधिकारियों तक बात पहुंचे खुद ही खामी दूर करने में जुट गए। हालांकि उन्होंने स्टेशन मास्टर को सूचना दे दी। काफी देर तक जूझने के बाद इंजन ठीक नहीं हुआ तो उन्होंने सीबीगंज डेमू शेड में इंजीनियर से संपर्क किया। इसके बाद ड्राइवर ने इंजन को रि-स्टार्ट किया। रात 12 बजे ट्रेन चल सकी। सूत्रों का कहना है कि डेमू का इंजन कंप्यूराइज्ड है, जिसको लोको पायलट समझ नहीं पाए। डेमू पहली बार पीलीभीत पहुंची थी। ट्रेन में ज्यादातर यात्री ऐसे थे जो शौकिया तौर से डेमू में बैठे थे।
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लोको पायलट पूरी तरह से ट्रेंड हैं। नई टेक्नाजॉजी समझने में कुछ समय लग सकता है। हालांकि अभी डेमू के इंजीनियर शेड में रुके हुए हैं। -डीके सिंह, डीआरएम इज्जतनगर मंडल
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