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कम नहीं हो रहीं किसानों की दिक् कत
Updated Sat, 14 Apr 2018 10:03 AM IST
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टुल्ला- ऋण मोचन योजना
छह हजार ऑफ लाइन शिकायतें डंप
हेडिंग- ऑनलाइन शिकायत करना न आए तो कर्जमाफी भूल जाएं
सबहेड- सो रहा कृषि विभाग, सुनवाई को मात्र दो दिन
अमर उजाला ब्यूरो
बरेली। कर्ज माफी के लिए शासन से बढ़ी 15 अप्रैल की अवधि भी खत्म होने को है। इसके बावजूद कृषि विभाग के दफ्तर में करीब छह हजार ऑफ लाइन शिकायतें पेंडिंग हैं। विभागीय अफसर केवल ऑनलाइन शिकायतों की ही जांच करा रहे हैं। लिखित प्रार्थना पत्रों की जांच न होने से एक बार फिर कई हजार किसानों की ऋण माफी पर संकट बना हुआ है। अंतिम तिथि नजदीक आने से लोन माफ कराने को काश्तकारों की दौड़ एक बार फिर बढ़ गई है।
कृषि विभाग की हीलाहवाली से हजारों किसानों की कर्ज माफी नहीं हो सकी थी। पात्र होने के बावजूद ऋण माफी न मिलने का दावा करने वाले करीब 15 हजार किसानों ने विभाग के पोर्टल पर ऑनलाइन शिकायतें की थीं। इसके अलावा करीब छह हजार मैनुअल शिकायतें भी विभाग के पास आई थीं। कृषि विभाग इन मामलों की जांच ही नहीं करा सकी। इससे इन किसानों को ऋण भी माफ नहीं हो सका। इन किसानों को दोबारा मौका देते हुए इस योजना की अंतिम तिथि 15 अप्रैल कर दी थी। डेट बढ़ जाने के बावजूद कृषि विभाग के अफसरों ने ऑफ लाइन शिकायतों की जांच ही नहीं कराई है। इससे करीब छह हजार लिखित अप्लीकेशन विभागीय दफ्तर में डंप पड़ी है। विभागीय अफसरों का कहना है कि शासन के आदेश थे कि सभी किसान ऑनलाइन ही शिकायत करें। उन्हीं की जांच संभव है। जबकि कृषि विभाग के कार्यालय में करीब छह हजार लिखित शिकायतों की जांच अब तक नहीं हो सकी है। जबकि इस शिकायतों की सुनवाई के लिए अब केवल दो दिन ही बाकी रहे हैं। जिला कृषि अधिकारी आरटी यादव का कहना है कि कोशिश की जा रही है कि ज्यादा से ज्यादा मामलों की जांच कर उनका निस्तारण हो सके।
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छह हजार ऑफ लाइन शिकायतें डंप
हेडिंग- ऑनलाइन शिकायत करना न आए तो कर्जमाफी भूल जाएं
सबहेड- सो रहा कृषि विभाग, सुनवाई को मात्र दो दिन
अमर उजाला ब्यूरो
बरेली। कर्ज माफी के लिए शासन से बढ़ी 15 अप्रैल की अवधि भी खत्म होने को है। इसके बावजूद कृषि विभाग के दफ्तर में करीब छह हजार ऑफ लाइन शिकायतें पेंडिंग हैं। विभागीय अफसर केवल ऑनलाइन शिकायतों की ही जांच करा रहे हैं। लिखित प्रार्थना पत्रों की जांच न होने से एक बार फिर कई हजार किसानों की ऋण माफी पर संकट बना हुआ है। अंतिम तिथि नजदीक आने से लोन माफ कराने को काश्तकारों की दौड़ एक बार फिर बढ़ गई है।
कृषि विभाग की हीलाहवाली से हजारों किसानों की कर्ज माफी नहीं हो सकी थी। पात्र होने के बावजूद ऋण माफी न मिलने का दावा करने वाले करीब 15 हजार किसानों ने विभाग के पोर्टल पर ऑनलाइन शिकायतें की थीं। इसके अलावा करीब छह हजार मैनुअल शिकायतें भी विभाग के पास आई थीं। कृषि विभाग इन मामलों की जांच ही नहीं करा सकी। इससे इन किसानों को ऋण भी माफ नहीं हो सका। इन किसानों को दोबारा मौका देते हुए इस योजना की अंतिम तिथि 15 अप्रैल कर दी थी। डेट बढ़ जाने के बावजूद कृषि विभाग के अफसरों ने ऑफ लाइन शिकायतों की जांच ही नहीं कराई है। इससे करीब छह हजार लिखित अप्लीकेशन विभागीय दफ्तर में डंप पड़ी है। विभागीय अफसरों का कहना है कि शासन के आदेश थे कि सभी किसान ऑनलाइन ही शिकायत करें। उन्हीं की जांच संभव है। जबकि कृषि विभाग के कार्यालय में करीब छह हजार लिखित शिकायतों की जांच अब तक नहीं हो सकी है। जबकि इस शिकायतों की सुनवाई के लिए अब केवल दो दिन ही बाकी रहे हैं। जिला कृषि अधिकारी आरटी यादव का कहना है कि कोशिश की जा रही है कि ज्यादा से ज्यादा मामलों की जांच कर उनका निस्तारण हो सके।
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