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पहले मां-बाप को दौलत समझते थे, आज दौलत को मां-बाप समझते हैं
Updated Sat, 28 Oct 2017 11:42 PM IST
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इस्लामिया कालेज के मैदान में देर रात तक बही कविता और मुशायरे की बयार
नामचीन शायरों और कवियों ने पेश की रचनाएं
फोटो-55,56
बदायूं।
कोई फर्क नहीं पड़ता इस देश का राम है या रावण, देश की जनता तो बेचारी सीता है। हास्य व्यंग के प्रख्यात कवि सुरेंद्र शर्मा की इन पंक्तियों ने श्रोताओं को झकझोर दिया। शनिवार की रात इस्लामिया इंटर कालेज के मैदान कविता और शायरी बयार बही। सांस्कृतिक और साहित्यिक संस्था स्मृति वंदन की ओर से आयोजित कार्यक्रम का उद्घाटन सपा सांसद धर्मेंद्र यादव ने सरस्वती के चित्र के समक्ष दीप प्रज्ज्वलित कर किया।
प्रेम के बदले मीरा को जहर चुनना नहीं, बिना खता अहिल्या को कोई दिखा नहीं। इस तरह की रचनाओं से कवियत्री अनामिका अंबर के प्रेम और वियोग की रचना से माहौल में रस घोला। नामचीन शायर मंजर भोपाली की रचना ‘फिर से अपने भारत को गुलिस्तां बनाना है, फिर हमें अंधेरे में मसलें जलाना है, साथ-साथ जलना है, यह सबको बताना है’ को जमकर दाद मिली। डॉ. कीर्ति काले ने सुनाया- कभी आंखों ही आंखों में कहा सब मान लेता है, बिना बोले ही दिल की बात अक्सर जान लेता है। विष्णु सक्सेना की कविता, पहले मां-बाप को दौलत समझते थे हम, आज दौलत को मां-बाप समझ बैठे काफी सराही गई। संपत सरल ने जब कहा कि मोदी जी धुआंधार काम कर रहे हैं, यह बात अलग है कि काम में धार कम है और दुआ ज्यादा, तो दर्शकों ने जमकर ठहाके लगाए। कवि अजय अटल ने नयन में सागर है वरना अस्त्र नमकीन नहीं होते...सुनाया। देर रात तक शायरों और कवियों से एक से एक अशआर पेश किए।
कार्यक्रम में आयोजकों की ओर से कवियों को शाल उढ़ाकर प्रतीक चिन्ह भी भेंट किए गए। इस मौके पर जिला पंचायत अध्यक्ष मधु चंद्रा, पूर्व राज्यमंत्री विमलकृष्ण अग्रवाल, सपा जिलाध्यक्ष आशीष यादव, भानुप्रकाश, अरविंद धवल, सोमेंद्र यादव, आशुतोष मौर्या, अमित यादव, राजन मेंदीरत्ता, किशनचंद्र शर्मा, आबिद रजा, फात्मा रजा, विधायक ओमकार सिंह यादव, बृजेश यादव, डॉ. यासीन उस्मानी और बलवीर सिंह यादव आदि मौजूद थे।
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महिलाओं की सुरक्षा को समाज आगे आए
फोटो-51
मशहूर कवयित्री अनामिका अंबर शनिवार शाम को यहां पहुंचीं। उन्होंने काव्य को लेकर बदायूं के श्रोताओं की तारीफ की। बोलीं, बदायूं के श्रोताओं से उन्हें लगाव उसी दिन हो गया जब पहली बार पिछले साल स्मृति वंदन के कार्यक्रम में पहुंचीं थी। चूंकि उन्हें आज टीवी प्रोग्राम में भी हिस्सा लेना था लेकिन पिछले साल मिले अपार प्रेम ने उन्हें आने के लिए मजबूर कर दिया। अनामिका का यह भी कहना है कि महिलाओं की सुरक्षा के लिए समाज को आगे आना चाहिए।
सकारात्मक सोच वालों की हार नहीं होती
फोटो-52
हास्य के कवि अनिल चौबे ने श्रोताओं को गुदगुदाने के पीछे अपनी मंशा बताई कि वह लोगों को आनंदित रखना चाहते हैं। खासकर युवाओं को डिप्रेशन का शिकार नहीं होना चाहिए। सकारात्मक सोच के साथ आगे बढ़ने वाले की कभी हार नहीं होती। हालांकि कारोबार का जो दौर चल रहा है, उसमें दिक्कतें ज्यादा और सुकून कम है।
मंजर भोपाली बोले, देश सबसे ऊपर
फोटो-53
मंजर भोपाली बोले कि प्रेम के आगे सब कुछ फीका है। श्रोताओं को भी कवियों का हौसला बढ़ाने से पीछे नहीं रहना चाहिए। मंजर भोपाली की पहचान देशभक्ति के गीतों को लेकर भी है। उन्होंने कहा कि वहीं व्यक्ति देश के लिए कुछ कर सकता है जिसके अंदर राष्ट्र प्रेम का जज्बा हो।
शैक्षिक संस्थानों में भी बहे काव्य की बयार
फोटो-54
कासगंज से पहुंचे कवि अजय अटल ने कवियों को उम्मीद के अनुरूप बढ़ावा नहीं मिलने से आहत हैं। बोले कि शैक्षिक संस्थानों में अभी ऐसा माहौल नहीं बन पाया है जो नई पौध को पनपने का मौका दे। शैक्षिक संस्थानों में काव्य से जुड़े कार्यक्रम आयोजित होने चाहिए। इससे समाज को नई दिशा मिलेगी। युवाओं को भी आगे आना चाहिए। वह काव्य का महत्व समझेंगे तो नतीजा भी सकारात्मक सामने आएगा।
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नामचीन शायरों और कवियों ने पेश की रचनाएं
फोटो-55,56
बदायूं।
कोई फर्क नहीं पड़ता इस देश का राम है या रावण, देश की जनता तो बेचारी सीता है। हास्य व्यंग के प्रख्यात कवि सुरेंद्र शर्मा की इन पंक्तियों ने श्रोताओं को झकझोर दिया। शनिवार की रात इस्लामिया इंटर कालेज के मैदान कविता और शायरी बयार बही। सांस्कृतिक और साहित्यिक संस्था स्मृति वंदन की ओर से आयोजित कार्यक्रम का उद्घाटन सपा सांसद धर्मेंद्र यादव ने सरस्वती के चित्र के समक्ष दीप प्रज्ज्वलित कर किया।
प्रेम के बदले मीरा को जहर चुनना नहीं, बिना खता अहिल्या को कोई दिखा नहीं। इस तरह की रचनाओं से कवियत्री अनामिका अंबर के प्रेम और वियोग की रचना से माहौल में रस घोला। नामचीन शायर मंजर भोपाली की रचना ‘फिर से अपने भारत को गुलिस्तां बनाना है, फिर हमें अंधेरे में मसलें जलाना है, साथ-साथ जलना है, यह सबको बताना है’ को जमकर दाद मिली। डॉ. कीर्ति काले ने सुनाया- कभी आंखों ही आंखों में कहा सब मान लेता है, बिना बोले ही दिल की बात अक्सर जान लेता है। विष्णु सक्सेना की कविता, पहले मां-बाप को दौलत समझते थे हम, आज दौलत को मां-बाप समझ बैठे काफी सराही गई। संपत सरल ने जब कहा कि मोदी जी धुआंधार काम कर रहे हैं, यह बात अलग है कि काम में धार कम है और दुआ ज्यादा, तो दर्शकों ने जमकर ठहाके लगाए। कवि अजय अटल ने नयन में सागर है वरना अस्त्र नमकीन नहीं होते...सुनाया। देर रात तक शायरों और कवियों से एक से एक अशआर पेश किए।
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कार्यक्रम में आयोजकों की ओर से कवियों को शाल उढ़ाकर प्रतीक चिन्ह भी भेंट किए गए। इस मौके पर जिला पंचायत अध्यक्ष मधु चंद्रा, पूर्व राज्यमंत्री विमलकृष्ण अग्रवाल, सपा जिलाध्यक्ष आशीष यादव, भानुप्रकाश, अरविंद धवल, सोमेंद्र यादव, आशुतोष मौर्या, अमित यादव, राजन मेंदीरत्ता, किशनचंद्र शर्मा, आबिद रजा, फात्मा रजा, विधायक ओमकार सिंह यादव, बृजेश यादव, डॉ. यासीन उस्मानी और बलवीर सिंह यादव आदि मौजूद थे।
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महिलाओं की सुरक्षा को समाज आगे आए
फोटो-51
मशहूर कवयित्री अनामिका अंबर शनिवार शाम को यहां पहुंचीं। उन्होंने काव्य को लेकर बदायूं के श्रोताओं की तारीफ की। बोलीं, बदायूं के श्रोताओं से उन्हें लगाव उसी दिन हो गया जब पहली बार पिछले साल स्मृति वंदन के कार्यक्रम में पहुंचीं थी। चूंकि उन्हें आज टीवी प्रोग्राम में भी हिस्सा लेना था लेकिन पिछले साल मिले अपार प्रेम ने उन्हें आने के लिए मजबूर कर दिया। अनामिका का यह भी कहना है कि महिलाओं की सुरक्षा के लिए समाज को आगे आना चाहिए।
सकारात्मक सोच वालों की हार नहीं होती
फोटो-52
हास्य के कवि अनिल चौबे ने श्रोताओं को गुदगुदाने के पीछे अपनी मंशा बताई कि वह लोगों को आनंदित रखना चाहते हैं। खासकर युवाओं को डिप्रेशन का शिकार नहीं होना चाहिए। सकारात्मक सोच के साथ आगे बढ़ने वाले की कभी हार नहीं होती। हालांकि कारोबार का जो दौर चल रहा है, उसमें दिक्कतें ज्यादा और सुकून कम है।
मंजर भोपाली बोले, देश सबसे ऊपर
फोटो-53
मंजर भोपाली बोले कि प्रेम के आगे सब कुछ फीका है। श्रोताओं को भी कवियों का हौसला बढ़ाने से पीछे नहीं रहना चाहिए। मंजर भोपाली की पहचान देशभक्ति के गीतों को लेकर भी है। उन्होंने कहा कि वहीं व्यक्ति देश के लिए कुछ कर सकता है जिसके अंदर राष्ट्र प्रेम का जज्बा हो।
शैक्षिक संस्थानों में भी बहे काव्य की बयार
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कासगंज से पहुंचे कवि अजय अटल ने कवियों को उम्मीद के अनुरूप बढ़ावा नहीं मिलने से आहत हैं। बोले कि शैक्षिक संस्थानों में अभी ऐसा माहौल नहीं बन पाया है जो नई पौध को पनपने का मौका दे। शैक्षिक संस्थानों में काव्य से जुड़े कार्यक्रम आयोजित होने चाहिए। इससे समाज को नई दिशा मिलेगी। युवाओं को भी आगे आना चाहिए। वह काव्य का महत्व समझेंगे तो नतीजा भी सकारात्मक सामने आएगा।