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कैमरे में दो बार कैद हुई खूनी बाघ की तस्वीर
Updated Fri, 08 Sep 2017 11:43 PM IST
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कैमरे में दो बार कैद हुई खूनी बाघ की तस्वीर
- फोटो : लखीमपुर खीरी, अमर उजाला
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लखीमपुर खीरी।
मोहम्मदी रेंज के खूनी बाघ की लोकेशन वन विभाग ने ट्रेस कर ली है। बाघ कठिना नदी के किनारे जंगल और खेतों में ही चहलकदमी कर रहा है। बाघ की लोकेशन पता लगाने के लिए देवीपुर बीट में चार कैमरे लगाए गए हैं। इनमें से देवीपुर से सहजनिया के जंगल जाने के रास्ते में दक्षिण कठिना कंपार्टमेंट दो में लाल सिंह के झाले के निकट लगाए गए कैमरे में पांच घंटे के अंदर आते जाते दो बार बाघ की तस्वीर कैद हुई है।
मालूम हो कि दक्षिण खीरी वन प्रभाग के मोहम्मदी रेंज के अंतर्गत देवीपुर बीट में कठिना नदी के किनारे 27 अगस्त को एक बाघ ने घास काटने गए मैलानी थाना क्षेत्र के पसियापुर गांव निवासी नरायन को निवाला बनाया था। नरायन का शव दूसरे दिन एक गन्ने के खेत से बरामद हुआ था। घटना के बाद से ही वन विभाग बाघ की निगरानी में लगा था। बाघ के पदचिह्न घटना स्थल से दो तीन किलोमीटर के अंदर कई बार दिखाई दिए। अनुमान लगाया जा रहा है कि बाघ घटनास्थल के पास ही अपना ठिकाना बनाए हुए है।
शुक्रवार को इलाके में कांबिंग कर रही वन विभाग की टीम को जंगल के बाहरी हिस्से में न केवल पगमार्क दिखाई दिए, बल्कि घमहा पुल के पास बाघ भी चहलकदमी करता दिखाई दिया। वन विभाग की टीम में शामिल फारेस्ट गार्ड राम प्रताप ने बताया कि जिस जगह बाघ दिखाई दिया वह जगह नरायन का शव मिलने वाली जगह से महज दो किलोमीटर की दूरी पर है। जाहिर है कि बाघ घटनास्थल के आसपास मौजूद है।
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बाघ की लोकेशन तलाशने के लिए वन विभाग ने बाघ के संभावित ठिकानों पर चार कैमरे लगाए थे। इनमें से देवीपुर बीट के दक्षिण कठिना कंपार्टमेंट नंबर दो में लालसिंह के झाले के पास लगे कैमरे में बुधवार/ बृहस्पतिवार की रात पांच घंटे के अंदर एक ही बाघ की आते-जाते दो तस्वीरें कैद हुई हैं। इस कैमरे की दूरी भी घटनास्थल से मात्र दो किलोमीटर की दूरी पर है। इससे यह अनुमान लगाया जा रहा है कि बाघ जंगल से अधिक दूर नहीं है। जंगल के बाहर बाघ की चहलकदमी से क्षेत्र के ग्रामीणों में दहशत में है।
मालूम हो कि दो दिन पहले कठिना नदी के किनारे बांस के जंगल में 12 बंदर संदिग्ध हालात में मृत पाए गए थे। पोस्टमार्टम रिपोर्ट से यह साफ है कि बंदरों की मौत बाघ की दहाड़ से डरकर पेड़ से गिरकर हुई है। इनमें से अधिकांश का हार्ट फेल हुआ था, तो कुछ की अंदरूनी चोटों और कुछ की गर्दन टूटने के कारण दम घुटने से मौत हुई थी। बंदरों की मौत भी घटनास्थल के आसपास ही हुई थी, वहां बाघ के पगमार्क भी मिले थे।
रेंजर एसएन यादव का कहना है कि बाघ की लोकेशन ट्रेस कर ली गई है। कैमरे में बाघ की तस्वीरें ट्रैप हुई हैं। बाघ जंगल में ही है। वह बार-बार जंगल से सटे खेतों में आ जा रहा है। अभी ग्रामीणों को पूरी सतर्कता बरतने और अकेले खेतों में न जाने की सलाह दी गई है।
कैमरों में सेट नहीं है सही तारीख और समय
मोहम्मदी रेंज में बाघ की लोकेशन जानने को लगाए गए कैमरों में तारीख और समय अपडेट नहीं किया गया है। इसी के चलते एक तस्वीर में नौ मई 2017 की तारीख का समय 8.43 (पीएम) तो दूसरी तस्वीर में नौ जून 2017 की तारीख का समय 01.04 (एएम)आया है। जबकि यह कैमरे एक सप्ताह पहले ही मोहम्मदी रेंज में नए कार्ड के साथ लगाए गए हैं। रेंजर एसएन यादव ने भी इस बात की पुष्टि की है कि कैैमरे लगाने के पहले टाइम और डेट अपडेट नहीं किया था।
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मोहम्मदी रेंज के खूनी बाघ की लोकेशन वन विभाग ने ट्रेस कर ली है। बाघ कठिना नदी के किनारे जंगल और खेतों में ही चहलकदमी कर रहा है। बाघ की लोकेशन पता लगाने के लिए देवीपुर बीट में चार कैमरे लगाए गए हैं। इनमें से देवीपुर से सहजनिया के जंगल जाने के रास्ते में दक्षिण कठिना कंपार्टमेंट दो में लाल सिंह के झाले के निकट लगाए गए कैमरे में पांच घंटे के अंदर आते जाते दो बार बाघ की तस्वीर कैद हुई है।
मालूम हो कि दक्षिण खीरी वन प्रभाग के मोहम्मदी रेंज के अंतर्गत देवीपुर बीट में कठिना नदी के किनारे 27 अगस्त को एक बाघ ने घास काटने गए मैलानी थाना क्षेत्र के पसियापुर गांव निवासी नरायन को निवाला बनाया था। नरायन का शव दूसरे दिन एक गन्ने के खेत से बरामद हुआ था। घटना के बाद से ही वन विभाग बाघ की निगरानी में लगा था। बाघ के पदचिह्न घटना स्थल से दो तीन किलोमीटर के अंदर कई बार दिखाई दिए। अनुमान लगाया जा रहा है कि बाघ घटनास्थल के पास ही अपना ठिकाना बनाए हुए है।
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शुक्रवार को इलाके में कांबिंग कर रही वन विभाग की टीम को जंगल के बाहरी हिस्से में न केवल पगमार्क दिखाई दिए, बल्कि घमहा पुल के पास बाघ भी चहलकदमी करता दिखाई दिया। वन विभाग की टीम में शामिल फारेस्ट गार्ड राम प्रताप ने बताया कि जिस जगह बाघ दिखाई दिया वह जगह नरायन का शव मिलने वाली जगह से महज दो किलोमीटर की दूरी पर है। जाहिर है कि बाघ घटनास्थल के आसपास मौजूद है।
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बाघ की लोकेशन तलाशने के लिए वन विभाग ने बाघ के संभावित ठिकानों पर चार कैमरे लगाए थे। इनमें से देवीपुर बीट के दक्षिण कठिना कंपार्टमेंट नंबर दो में लालसिंह के झाले के पास लगे कैमरे में बुधवार/ बृहस्पतिवार की रात पांच घंटे के अंदर एक ही बाघ की आते-जाते दो तस्वीरें कैद हुई हैं। इस कैमरे की दूरी भी घटनास्थल से मात्र दो किलोमीटर की दूरी पर है। इससे यह अनुमान लगाया जा रहा है कि बाघ जंगल से अधिक दूर नहीं है। जंगल के बाहर बाघ की चहलकदमी से क्षेत्र के ग्रामीणों में दहशत में है।
मालूम हो कि दो दिन पहले कठिना नदी के किनारे बांस के जंगल में 12 बंदर संदिग्ध हालात में मृत पाए गए थे। पोस्टमार्टम रिपोर्ट से यह साफ है कि बंदरों की मौत बाघ की दहाड़ से डरकर पेड़ से गिरकर हुई है। इनमें से अधिकांश का हार्ट फेल हुआ था, तो कुछ की अंदरूनी चोटों और कुछ की गर्दन टूटने के कारण दम घुटने से मौत हुई थी। बंदरों की मौत भी घटनास्थल के आसपास ही हुई थी, वहां बाघ के पगमार्क भी मिले थे।
रेंजर एसएन यादव का कहना है कि बाघ की लोकेशन ट्रेस कर ली गई है। कैमरे में बाघ की तस्वीरें ट्रैप हुई हैं। बाघ जंगल में ही है। वह बार-बार जंगल से सटे खेतों में आ जा रहा है। अभी ग्रामीणों को पूरी सतर्कता बरतने और अकेले खेतों में न जाने की सलाह दी गई है।
कैमरों में सेट नहीं है सही तारीख और समय
मोहम्मदी रेंज में बाघ की लोकेशन जानने को लगाए गए कैमरों में तारीख और समय अपडेट नहीं किया गया है। इसी के चलते एक तस्वीर में नौ मई 2017 की तारीख का समय 8.43 (पीएम) तो दूसरी तस्वीर में नौ जून 2017 की तारीख का समय 01.04 (एएम)आया है। जबकि यह कैमरे एक सप्ताह पहले ही मोहम्मदी रेंज में नए कार्ड के साथ लगाए गए हैं। रेंजर एसएन यादव ने भी इस बात की पुष्टि की है कि कैैमरे लगाने के पहले टाइम और डेट अपडेट नहीं किया था।