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सब्जी की सहफसली खेती से कई गुना बढ़ गई आय

Sun, 20 Jan 2019 01:54 AM IST
pawan chandra पवन चंद्रा
Updated Sun, 20 Jan 2019 01:54 AM IST
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सब्जी की सहफसली खेती से कई गुना बढ़ गई आय
बरेली। पहले यहां के किसान परंपरागत धान, गेहूं और गन्ने की खेती करते थे। साल भर में परिवार का खर्च बमुश्किल चल पाता था। जब परिवार के सदस्यों की संख्या बढ़ी तो बहुत से किसान परिवार गांव छोड़ दिल्ली पंजाब मजदूरी करने चले गए। मगर, कुछ किसानों ने परंपरागत धान, गेहूं गन्ने की खेती छोड़ सब्जी की सहफसली खेती शुरू की तो इनकी आमदनी कई गुना बढ़ गई। अब अधिकांश परिवारों के पक्के मकान हैं। गांव के स्कूल का भी कायाकल्प हो चुका है। किसान अपने गांव की सब्जी आसपास ही नहीं, बल्कि बरेली से बाहर की मंडियों में भेजने लगे हैं।
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डबटा श्यामगंज गांव की आबादी 3500 के आसपास है। गांव के अधिकांश परिवार अब साल भर सब्जी की सहफसली खेती करते हैं। यहां के किसान अपने एक ही खेत में सीजन के हिसाब से पत्ता गोभी, फूल गोभी, भिंडी, तोरई, टमाटर, खीरा, मिर्च, मटर, अरबी, सौंफ, लौकी आदि की खेती करते हैं। प्रत्येक किसान परिवार पांच से 10 या 20 बीघा खेत में हर एक तिमाई में दो या तीन सब्जी की फसल लेकर बल्लिया, देवचरा और बरेली के अलावा बाहर की मंडियों में बिक्री करते हैं। इतना नहीं खेती के साथ वह पशुपालन भी करते हैं। अपनी गाय-भैंसों का दूध शहर में सप्लाई करते हैं। इससे डबटा ही नहीं, बल्कि आसपास के बल्लिया, सिरसा, हररामपुर, मिलक, तखतपुर चंपतपुर, देवचरा समेत डेढ़ दर्जन गांवों के किसान परंपरागत खेती छोड़ सब्जी की खेती पांच-छह साल से कर रहे हैं। इनके इस कदम से गांव की तस्वीर बदलने लगी है। डबटा के प्रधान सुशील दीक्षित बताते हैं कि पहले गन्ना या धान गेहूं ही पैदा करते थे। कहीं गन्ने से लदी ट्रैक्टर ट्राली लेकर लाइन में खड़े होना पड़ता था। धान का पेमेंट समय पर नहीं मिलता था। सब्जी तुरंत मंडी ले गए और नगद पैसे जेब में रखकर घर आ गए। गांव का प्रत्येक परिवार बिना किसी सरकारी मदद के अपने खेत में साल भर सब्जी की खेती करके चार से छह फसलें पैदा करके मंडी में बेचता है। किसी को भी सरकारी अनुदान नहीं मिला है।
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