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पश्चिमी विक्षोभ का मैदानी इलाकों में असरः दिन में धूप तो शाम को सर्दी की पहली बारिश

Tue, 22 Jan 2019 12:52 AM IST
pawan chandra पवन चंद्रा
Updated Tue, 22 Jan 2019 12:52 AM IST
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पश्चिमी विक्षोभ का मैदानी इलाकों में असरः दिन में धूप तो शाम को सर्दी की पहली बारिश
बरेली। भूमध्य सागर से उठे पश्चिमी विक्षोभ का मैदानी इलाकों में सोमवार दोपहर बाद असर शुरू हो गया। सोमवार को धूप तो निकली लेकिन उसमें तेजी नहीं थी। शाम को पूरब उत्तर दिशा से तेज हवा चलने के बाद बरेली समेत आस-पास इलाकों में हल्की और मध्यम बारिश हुई। 10 मिलीमीटर से अधिक बारिश का अनुमान लगाया जा रहा है। मंगलवार को भी सूर्यदेव बादलों की ओट में रहेंगे। पूरे दिन कहीं बूंदाबांदी या मध्यम बारिश का अनुमान है।
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जम्मू कश्मीर के रास्ते भारत में प्रवेश करते ही पश्चिमी विक्षोभ के असर से हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में बर्फबारी शुरू हो गई। पहाड़ पर कहीं-कहीं बारिश भी हो रही है। मैदानी इलाके भी इसके असर से अछूते नहीं रहे। बरेली और आस-पास इलाकों में तेज हवा के साथ हल्की मध्यम बारिश हो रही है। सोमवार को अधिकतम तापमान 24.1 डिग्री सेल्सियस रहा, जो सामान्य से चार डिग्री सेल्सियस अधिक था। न्यूनतम तापमान भी 10.8 डिग्री सेल्सियस रिकार्ड किया गया, जो सामान्य से तीन डिग्री अधिक था। दिन में ठंड का असर कम रहा, लेकिन शाम होते ही तेज हवा चलने लगीं। फिर शाम से शुरू हुई बूंदाबांदी रात तक जारी रही। मौसम वैज्ञानिक डा. एचएस कुशवाहा ने बताया कि दो दिन कहीं हल्की तो कहीं भारी बारिश की संभावना है। उत्तर पूरब हवाएं चलने से ठिठुरन बढ़ेगी। अब 26 जनवरी तक मौसम में उतार-चढ़ाव बना रहेगा। सूर्य के दर्शन न के बराबर होंगे। बारिश के बाद हवा में नमी की मात्रा बढ़ने से कोहरे का प्रकोप बढ़ेगा।
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किसानों के लिए वरदान बनी बारिश
रबी फसलों के सर्दी की पहली हल्की मध्यम बारिश वरदान बनकर आयी है। 10 से 15 मिलीमीटर की बारिश गेहूं, चना, मटर, सरसों, मसूर आदि फसलों के लिए किसी अमृत से कम नहीं है। जिला कृषि अधिकारी धीरेंद्र सिंह चौधरी ने बताया कि गेहूं को इस समय प्राकृतिक सिंचाई की बहुत ज्यादा जरूरत थी, जो बारिश के रूप में मिल चुकी है। किसानों की लागत कम होगी। गेहूं में इस समय कल्ले फूट रहे हैं। आसमान से पानी की बूंद पड़ते ही उसमें वह अंदर तक जाएगी तो बाली मजबूत होगी। गेहूं की उपज बढ़ेगी। सब्जियों के लिए भी बारिश काफी फायदेमंद हैं, लेकिन किसान खेत में पानी न भरने दें। अधिक पानी भरने पर उसे खेत से निकालने का इंतजाम कर दें।
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