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विश्वविद्यालय में अब नहीं होंगे छात्रसंघ चुनाव
न्यूज डेस्क,अमर उजाला,बरेली
Updated Fri, 14 Sep 2018 12:23 AM IST
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एमजेपी रुहेलखंड विश्वविद्यालय में छात्रसंघ चुनाव की तैयारी कर रहे छात्र नेताओं को तगड़ा झटका लगा है। विश्वविद्यालय में इस बार भी चुनाव नहीं होंगे। गुरुवार को हुई डीएसडब्ल्यू बोर्ड की बैठक में लिंगदोह समिति की सिफारिशों का हवाला देते हुए चुनाव न कराने का फैसला किया गया। हालांकि इस बाबत शासन को भेजी गई चिट्ठी के जवाब का विश्वविद्यालय को अब भी इंतजार है।
पिछले दिनों छात्र नेताओं ने विश्वविद्यालय में छात्रसंघ चुनाव की मांग को लेकर काफी हंगामा किया था। इसके बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने चुनाव पर शासन की मंशा जानने के लिए पत्र भेज दिया। इसका जवाब अब तक नहीं आया है। पिछले दिनों गोरखपुर विश्वविद्यालय में चुनाव प्रक्रिया शुरू हुई तो यहां फिर चुनाव की मांग जोर पकड़ने लगी। चुनाव के मुद्दे पर मंथन के लिए प्रोफेसर एके जेटली ने गुरुवार को डीएसडब्ल्यू बोर्ड की बैठक बुलाई। इसमें चुनाव न कराने का फैसला किया गया। बोर्ड का कहना है कि लिंगदोह समिति की सिफारिश के अनुसार सत्र शुरू होने के 56 दिन के भीतर चुनाव हो जाने चाहिए। ये समय सीमा 10 सितंबर को पूरी हो गई है। लिहाजा अब नियमानुसार चुनाव नहीं कराए जा सकते। डीएसडब्ल्यू प्रोफेसर एके जेटली ने बताया कि छात्रसंघ चुनाव को लेकर बैठक बुलाई गई थी। इसमें सभी पहलुओं पर विचार किया गया। 56 दिन पूरे हो गए हैं। लिंगदोह समिति की सिफारिशों के मुताबिक अब चुनाव नहीं कराए जा सकते।
छह साल से नहीं हुए हैं चुनाव
विश्वविद्यालय में छह साल से चुनाव नहीं हुए हैं। यहां अंतिम बार 2012 में चुनाव हुए थे, इसके बाद से चुनाव नहीं कराए गए हैं। यही हाल बरेली कॉलेज का है। बरेली कॉलेज में 2013 के बाद से चुनाव नहीं कराए गए हैं।
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छात्रों को ट्रेन के किराए में मिलेगी छूट
विश्वविद्यालय के छात्रों के लिए अब ट्रेन के किराए में भी छूट मिल सकेगी। काफी समय से चल रही इस मांग को पूरा करने के लिए डीएसडब्ल्यू ने इस बाबत डीआरएम को पत्र भेजा था। रेलवे टिकट, जिसमें आरक्षण भी शामिल है, पर छात्रों को 50 फीसदी तक छूट मिल सकेगी। प्रोफेसर जेटली ने बताया कि डीआरएम को पत्र और डिजिटल सिग्नेचर भेजे हैं। प्रक्रिया पूरी होने के बाद छात्रों को रेल किराये में राहत मिलने लगेगी।
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पिछले दिनों छात्र नेताओं ने विश्वविद्यालय में छात्रसंघ चुनाव की मांग को लेकर काफी हंगामा किया था। इसके बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने चुनाव पर शासन की मंशा जानने के लिए पत्र भेज दिया। इसका जवाब अब तक नहीं आया है। पिछले दिनों गोरखपुर विश्वविद्यालय में चुनाव प्रक्रिया शुरू हुई तो यहां फिर चुनाव की मांग जोर पकड़ने लगी। चुनाव के मुद्दे पर मंथन के लिए प्रोफेसर एके जेटली ने गुरुवार को डीएसडब्ल्यू बोर्ड की बैठक बुलाई। इसमें चुनाव न कराने का फैसला किया गया। बोर्ड का कहना है कि लिंगदोह समिति की सिफारिश के अनुसार सत्र शुरू होने के 56 दिन के भीतर चुनाव हो जाने चाहिए। ये समय सीमा 10 सितंबर को पूरी हो गई है। लिहाजा अब नियमानुसार चुनाव नहीं कराए जा सकते। डीएसडब्ल्यू प्रोफेसर एके जेटली ने बताया कि छात्रसंघ चुनाव को लेकर बैठक बुलाई गई थी। इसमें सभी पहलुओं पर विचार किया गया। 56 दिन पूरे हो गए हैं। लिंगदोह समिति की सिफारिशों के मुताबिक अब चुनाव नहीं कराए जा सकते।
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छह साल से नहीं हुए हैं चुनाव
विश्वविद्यालय में छह साल से चुनाव नहीं हुए हैं। यहां अंतिम बार 2012 में चुनाव हुए थे, इसके बाद से चुनाव नहीं कराए गए हैं। यही हाल बरेली कॉलेज का है। बरेली कॉलेज में 2013 के बाद से चुनाव नहीं कराए गए हैं।
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छात्रों को ट्रेन के किराए में मिलेगी छूट
विश्वविद्यालय के छात्रों के लिए अब ट्रेन के किराए में भी छूट मिल सकेगी। काफी समय से चल रही इस मांग को पूरा करने के लिए डीएसडब्ल्यू ने इस बाबत डीआरएम को पत्र भेजा था। रेलवे टिकट, जिसमें आरक्षण भी शामिल है, पर छात्रों को 50 फीसदी तक छूट मिल सकेगी। प्रोफेसर जेटली ने बताया कि डीआरएम को पत्र और डिजिटल सिग्नेचर भेजे हैं। प्रक्रिया पूरी होने के बाद छात्रों को रेल किराये में राहत मिलने लगेगी।