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भरतनाट्यम के आध्यात्म पक्ष से जीने की कला सीख रहीं महिलाएं

Mon, 31 Jul 2017 12:10 PM IST
Updated Mon, 31 Jul 2017 12:10 PM IST
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भरतनाट्यम के आध्यात्म पक्ष से जीने की कला सीख रहीं महिलाएं
भरतनाट्यम के आध्यात्म पक्ष से जीने की कला सीख रहीं महिलाएं - फोटो : बरेली, अमर उजाला
बरेली।
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भारतीय क्लासिकल डांस किसी भी व्यक्ति को ध्यान में ले जाने का सबसे आसान तरीका है, यह ठीक वैसे ही है जैसे शरीर की शुद्धि के लिए नहाना आवश्यक होता है, वैसे ही मन की नकारात्मकता को खत्म करने के लिए ध्यान जरूरी होता है। श्री श्री रविशंकर के असीम ज्ञान से उत्पन्न सुदर्शन क्रिया का यह प्रयोग वास्तव में कोई डांस क्लास न होकर पूर्णत: मेडिटेशन कोर्स है, जिसे विज्ञान और आध्यात्मिकता दोनों को एक सूत्र में पिरोकर बनाया गया है। यह कहना है भरतनाट्यम विशेषज्ञ और श्री श्री रविशंकर की शिष्या मेघना सुनिल का। मेघना इन दिनों बरेली में श्री श्री नाट्य का प्रशिक्षण देने आई हुई हैं। पांच दिनी यह प्रशिक्षण कार्यक्रम गंगाचरण अस्पताल के चंद्रकांता ऑटोरियम में एक अगस्त तक चलेगा। कार्यक्रम में 71 प्रतिभागी हिस्सा ले रहे हैं। कोर्स के जरिए भरतनाट्यम के कला पक्ष के साथ आध्यात्मिक पक्ष से भी लोगों का परिचय कराया जा रहा है।
मेघना सुनिल ने बताया कि आर्ट ऑफ लिविंग के संस्थापक श्री श्री रवि शंकर ने श्री श्री नाट्य कोर्स को डिजायन किया है। मेघना कहती हैं कि युवाओं को आध्यात्म की ओर ले जाना आज समाज की आवश्यकता है। युवा लॉजिक में विश्वास रखता है। भरतनाट्यम की कलाएं विज्ञान से जुड़ी हैं, जिसे ध्यान से जोड़कर युवाओं को साथ लाया जा रहा है। उन्होंने बताया कि भारतीय क्लासिक डांस की कई मुद्राएं योगाभ्यास की मुद्राओं से मिलती हैं। आध्यात्मिक दृष्टि से देखें तो पंच तत्व से बने हमारे शरीर में पांचों उंगलियां भी पांच तत्वों का प्रतिनिधित्व करती हैं। उन्होंने कहा कि बड़े-बड़े रॉक स्टार, अभिनेता भी पहले क्लासिकल डांस ही सीखते हैं।
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आध्यात्म को लेकर चलोगे तो देश एक जुट होगा
छोटी सी उम्र में ही भरतनाट्यम का प्रशिक्षण लेने वाली मेघना टीसीएस में कंसल्टेंट इंजीनियर हैं। कहती हैं कि आध्यात्म हमारे जीवन को नजरिया देता है। आज समाज में धर्म को लेकर जिस भी तरह के झगड़े हो रहे हैं उसकी बड़ी वजह यह है कि लोगों ने धर्म को सर्वोपरि मान लिया है, जिसमें आध्यात्म पीछे छूट गया है, जबकि किसी भी धर्म को मानते हुए हमें आध्यात्म को प्राथमिकता देनी चाहिए।
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कोर्स में भाग लेने आईं कश्वी जैदी कहती हैं कि आध्यात्म हमें भारतीयता से जोड़ता है। उन्होंने बताया कि इस कोर्स के जरिए वह आध्यात्म को समझ रहीं हैं। आर्ट ऑफ लिविंग की जोनल कोआर्डिनेटर नीता मूना ने बताया कि इस नृत्य कोर्स से प्रभावित होकर एक प्रतिभागी ने अपनी बेटी को भरतनाट्यम की क्लास ज्वाइन करा दी।

अक्तूबर में आएंगे श्री श्री रविशंकर
बरेली। आध्यात्मिक गुरु श्री श्री रविशंकर अक्तूबर में बरेली आकर नगरवासियों को सुदर्शन क्रियाओं के संबंध में जानकारी देंगे। यह जानकारी नीता मूना ने दी।
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