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‘शिक्षकों की संवाद और संवेदनहीनता से माध्यमिक शिक्षा का हो रहा पतन’
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बरेली। ‘माध्यमिक या परिषदीय विद्यालयों में 80 फीसदी आर्थिक कमजोर वर्ग के विद्यार्थी होते हैं। शिक्षक इसे जानकर अनजान बने हैं। वे कॉलेज पहुंचकर क्लास अटेंड तो कर रहे हैं लेकिन विद्यार्थियों से संवाद नहीं कर रहे। आपसी संवाद न होने से वे विद्यार्थी के सामाजिक स्तर से परिचित नहीं हो रहे जिससे शिक्षक संवेदनहीन हो रहे हैं। जिसकी वजह से माध्यमिक शिक्षा का स्तर तेजी से गिरा है।’ यह बात बुधवार को उत्तर प्रदेश प्रधानाचार्य संघ की ओर से आयोजित संगोष्ठी और सम्मान समारोह के दौरान संगठन के प्रदेश अध्यक्ष ब्रजेश शर्मा ने कही।
प्रदेश अध्यक्ष ने समय रहते परिषदीय और माध्यमिक विद्यालयों के शिक्षकों को अपनी कमियां सुधारने का सुझाव दिया। कहा कि पूर्व में शिक्षा व्यवस्था का निजीकरण का प्रयास किया जा चुका है अगर स्थिति और बदतर हुई तो जल्द ही शिक्षा व्यवस्था का निजीकरण हो जाएगा। जिसकी चपेट में प्रधानाचार्य और शिक्षक दोनों ही आएंगे और फिर कोई सुनवाई नहीं होगी। साथ ही, मुख्य अतिथि संयुक्त शिक्षा निदेशक प्रदीप कुमार ने स्कूलों के शिक्षकों और प्रधानाचार्यों के पहनावे पर तंज कसा। कहा, शिक्षक का पहनावा गरिमामयी होना चाहिए। साथ ही, उन्होंने माध्यमिक शिक्षा व्यवस्था सुधारने के लिए जल्द एक सॉफ्टवेयर बनाने की जानकारी दी। कहा, कमिश्नर रणवीर प्रसाद इनोवेटिव शिक्षा के तहत एक ऐसा सॉफ्टवेयर तैयार करा रहे हैं जो विद्यालयों की निगरानी करेेगा और मेधावियों का चयन भी इसी से होगा। जिसके बाद उन्हें आगे बढ़ाने का प्रयास किया जाएगा। कार्यक्रम के दौरान छह सेवानिवृत्त प्रधानाचार्यों को मुख्य अतिथि समेत संयुक्त रूप से संगठन ने सम्मानित किया।
‘सरकार और शिक्षकों की उदासीनता पड़ रही भारी’
संयोजक डॉ. सुरेश रस्तोगी ने कहा कि सूबे के प्रत्येक जिले में 4-5 माध्यमिक विद्यालय हैं जहां गुणवत्तापरक शिक्षा मिल रही है अन्य स्कूलों की हालत बेहद खराब है। उन्होंने सरकार और शिक्षकों को इसका जिम्मेदार बताया। वहीं, प्रधानाचार्य संघ के पुष्पदेव भारद्वाज ने कहा कि विद्यालयों में आधारभूत सुविधाओं का अभाव है। जिसमें फर्नीचर, पेयजल, बिजली आदि शामिल हैं। साथ ही, प्रिंसिपल के रिक्त पड़े पदों पर तदर्थ नियुक्तियां ही हो रही हैं। जिससे प्रिंसिपल भी अपने अधिकारों के प्रति उदासीन हैं। उन्होंने शासन, शिक्षकों, प्रिंसिपल को अपनी-अपनी जिम्मेदारियां बेहतर तरीके से निभाने के बाद माध्यमिक शिक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने की बात कही।
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प्रदेश अध्यक्ष ने समय रहते परिषदीय और माध्यमिक विद्यालयों के शिक्षकों को अपनी कमियां सुधारने का सुझाव दिया। कहा कि पूर्व में शिक्षा व्यवस्था का निजीकरण का प्रयास किया जा चुका है अगर स्थिति और बदतर हुई तो जल्द ही शिक्षा व्यवस्था का निजीकरण हो जाएगा। जिसकी चपेट में प्रधानाचार्य और शिक्षक दोनों ही आएंगे और फिर कोई सुनवाई नहीं होगी। साथ ही, मुख्य अतिथि संयुक्त शिक्षा निदेशक प्रदीप कुमार ने स्कूलों के शिक्षकों और प्रधानाचार्यों के पहनावे पर तंज कसा। कहा, शिक्षक का पहनावा गरिमामयी होना चाहिए। साथ ही, उन्होंने माध्यमिक शिक्षा व्यवस्था सुधारने के लिए जल्द एक सॉफ्टवेयर बनाने की जानकारी दी। कहा, कमिश्नर रणवीर प्रसाद इनोवेटिव शिक्षा के तहत एक ऐसा सॉफ्टवेयर तैयार करा रहे हैं जो विद्यालयों की निगरानी करेेगा और मेधावियों का चयन भी इसी से होगा। जिसके बाद उन्हें आगे बढ़ाने का प्रयास किया जाएगा। कार्यक्रम के दौरान छह सेवानिवृत्त प्रधानाचार्यों को मुख्य अतिथि समेत संयुक्त रूप से संगठन ने सम्मानित किया।
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‘सरकार और शिक्षकों की उदासीनता पड़ रही भारी’
संयोजक डॉ. सुरेश रस्तोगी ने कहा कि सूबे के प्रत्येक जिले में 4-5 माध्यमिक विद्यालय हैं जहां गुणवत्तापरक शिक्षा मिल रही है अन्य स्कूलों की हालत बेहद खराब है। उन्होंने सरकार और शिक्षकों को इसका जिम्मेदार बताया। वहीं, प्रधानाचार्य संघ के पुष्पदेव भारद्वाज ने कहा कि विद्यालयों में आधारभूत सुविधाओं का अभाव है। जिसमें फर्नीचर, पेयजल, बिजली आदि शामिल हैं। साथ ही, प्रिंसिपल के रिक्त पड़े पदों पर तदर्थ नियुक्तियां ही हो रही हैं। जिससे प्रिंसिपल भी अपने अधिकारों के प्रति उदासीन हैं। उन्होंने शासन, शिक्षकों, प्रिंसिपल को अपनी-अपनी जिम्मेदारियां बेहतर तरीके से निभाने के बाद माध्यमिक शिक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने की बात कही।
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