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‘जासु नाम सुमिरत एक बारा, उतरहिं नर भवसिंधु अपारा’
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बरेली। श्री रामलीला सभा की ओर से चल रहे श्री रामलीला मंचन के नौवें दिन निषाद गंगाघाट का जुलूस निकला। जुलूस में शामिल स्वरूपों का अध्यक्ष अतुल कपूर और महामंत्री राधाकृष्ण शर्मा ने पूजन कर जुलूस रवाना किया। जुलूस नृसिंह मंदिर से शुरू होकर मलूकपुर चौराहा, आला हजरत, सौदागरान, सीताराम कूंचा, बड़ा बाजार और साहूकारा फाटक होते हुए कौशल किशोर के निवास स्थान पर पहुंचा। यहां श्रीराम और केवट संवाद की लीला का मंचन हुआ।
कलाकारों ने दर्शाया कि सुमंत को अयोध्या वापस करने के बाद प्रभु श्रीराम निषाद से मिलते हुए गंगाघाट पहुंचे। केवट से नाव मांगी तो उन्होंने मना कर दिया। शर्त रखी कि जब तक श्रीराम के पांव नहीं पखार लेते तब तक नाव से गंगा पार नहीं कराएंगे। प्रभु श्रीराम ने पांव पखारने की वजह पूछी तो केवट के तर्क सुन श्रीसीताराम और लक्ष्मणजी मुस्कुराने लगे। इस तरह केवट ने अपने प्रभु के पांव पखारे और गंगा पार कराई। इसके बाद जुलूस ने बजरिया संदल खां, बड़ा बाजार और गढैया होते हुए नृसिंह मंदिर पहुंचकर विश्राम लिया। जुलूस का जगह-जगह पुष्पवर्षा कर स्वागत किया गया।
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कलाकारों ने दर्शाया कि सुमंत को अयोध्या वापस करने के बाद प्रभु श्रीराम निषाद से मिलते हुए गंगाघाट पहुंचे। केवट से नाव मांगी तो उन्होंने मना कर दिया। शर्त रखी कि जब तक श्रीराम के पांव नहीं पखार लेते तब तक नाव से गंगा पार नहीं कराएंगे। प्रभु श्रीराम ने पांव पखारने की वजह पूछी तो केवट के तर्क सुन श्रीसीताराम और लक्ष्मणजी मुस्कुराने लगे। इस तरह केवट ने अपने प्रभु के पांव पखारे और गंगा पार कराई। इसके बाद जुलूस ने बजरिया संदल खां, बड़ा बाजार और गढैया होते हुए नृसिंह मंदिर पहुंचकर विश्राम लिया। जुलूस का जगह-जगह पुष्पवर्षा कर स्वागत किया गया।
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