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दो लाख का विदेशी हथियार 15 लाख में बेचकर होती है मोटी कमाई
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बरेली। लाखों के मुनाफे के लिए शूटरों के लाइसेंस पर चढ़े विदेशी हथियारों की अवैध खरीद-फरोख्त पर प्रशासन अलर्ट हो गया है। दरअसल प्रशासन को काफी समय से सूचनाएं मिल रही हैं कि विदेशों से डेढ़-दो लाख रुपये में खरीदे गए शस्त्र सरकारी मशीनरी के लोगों की साठगांठ से 15 लाख तक में बेचकर मोटा मुनाफा कमाने का खेल चल रहा है। हालांकि इसके बावजूद अफसर इस मामले में जांच कराने की पहल करने को तैयार नहीं हैं।
नेशनल और इंटरनेशनल शूटिंग प्रतियोगिताओं में 15वीं रैंक तक हासिल करने वाले के निशानेबाजों को प्राथमिकता के आधार पर शस्त्र लाइसेंस जारी किए जाते हैं। ये शूटर इस लाइसेंस पर 22 और 32 बोर, ट्रैप गन समेत अपने पसंदीदा हथियार की विदेश से खरीद सकते हैं। कायदे के मुताबिक अगर कोई शूटर पांच साल के अंदर विदेश से खरीदे गए शस्त्र को बेचना चाहे तो उसे कई जटिल कानूनी औपचारिकता पूरी करने के साथ नेशनल राइफल एसोसिएशन ऑफ इंडिया से भी मंजूरी लेनी पड़ती है, लेकिन विदेशी हथियारों को मोटे मुनाफे के साथ बेचने के लिए इस प्रक्रिया को ताक पर रख दिया जाता है। तमाम शूटर अपने शस्त्र लाइसेंस में फर्जीवाड़ा कर विदेशों से खरीदी गई पिस्टल और राइफल को ऊंचे रेट पर बेच रहे हैं।
सूत्रों के मुताबिक शूटर अपने लाइसेंस पर विदेशी गन या पिस्टल डेढ़ से दो लाख रुपये तक में खरीदते हैं। इन्हें लाखों के मुनाफे के साथ अवैध रूप से बेचने के लिए वे अपने लाइसेंस को खो जाने या खराब हो जाने की दरख्वास्त देकर हजार रुपये की फीस देकर डुप्लीकेट लाइसेेंस जारी करा लेते हैं। डुप्लीकेट लाइसेंस इसलिए जारी कराया जाता है क्योंकि इस पर ओरिजनल लाइसेंस की तरह असलहों का पूरा रिकॉर्ड दर्ज नहीं होता। शस्त्र विभाग के कर्मचारियों की साठगांट से यह रिपोर्ट भी लगवा ली जाती है कि शस्त्र में खराबी आ गई, लिहाजा उन्हें नए हथियार खरीदने की जरूरत है। इसके बाद डुप्लीकेट लाइसेंस पर नया शस्त्र खरीद लिया जाता है और पुराने हथियार को लाखों के मुनाफे के साथ गुपचुप बेच दिया जाता है।
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शूटरों को मिलती है ड्यूटी फ्री शस्त्र खरीदने की सुविधा
एयरगन छोड़कर सभी इवेंट्स में लाइसेंस लेना जरूरी होता है। इसके लिए स्टेट एसोसिएशन लिखकर देती है जिसके बाद शूटर को लाइसेंस के लिए एप्लाई करना पड़ता है। लाइसेंस मिलने के बाद शूटर कहीं से भी ड्यूटी फ्री हथियार आयात कर सकते हैं। एक साल में 15000 तक गोलियां भी इंपोर्ट कर सकते हैं। लाइसेंस के नियम हाल में बदले हैं। खिलाड़ियों को मिलने वाली गोलियों की संख्या बढ़ी है।
गोलियों का इस्तेमाल कहां, कोई चेकिंग नहीं
सूत्रों का कहना है कि प्रशासनिक अधिकारी आमतौर पर इसकी क्रास चेकिंग नहीं कराते कि किस शूटर ने किस साल कितने कारतूस खरीदी हैं और उसमें भी उनसे निशानेबाजी के लिए कब और कहां पर उनका इस्तेमाल किया है। इसलिए इसमें भी गड़बड़ी होने की बात सामने आ रही है। इन कारतूसों के अपराधियों के पास भी पहुंचने की बात से भी इंकार नहीं किया जा सकता।
शूटरों के लाइसेंस में गड़बड़ी कर विदेशी हथियारों को अवैध रूप से बेचे जाने की जानकारी मिली है। हालांकि इस संबंध में अब तक कोई शिकायत नहीं हुई है। ऐसा कोई केस आता है तो जांच कर कार्रवाई की जाएगी। -अशोक कुमार शुक्ला, सिटी मजिस्ट्रेट
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नेशनल और इंटरनेशनल शूटिंग प्रतियोगिताओं में 15वीं रैंक तक हासिल करने वाले के निशानेबाजों को प्राथमिकता के आधार पर शस्त्र लाइसेंस जारी किए जाते हैं। ये शूटर इस लाइसेंस पर 22 और 32 बोर, ट्रैप गन समेत अपने पसंदीदा हथियार की विदेश से खरीद सकते हैं। कायदे के मुताबिक अगर कोई शूटर पांच साल के अंदर विदेश से खरीदे गए शस्त्र को बेचना चाहे तो उसे कई जटिल कानूनी औपचारिकता पूरी करने के साथ नेशनल राइफल एसोसिएशन ऑफ इंडिया से भी मंजूरी लेनी पड़ती है, लेकिन विदेशी हथियारों को मोटे मुनाफे के साथ बेचने के लिए इस प्रक्रिया को ताक पर रख दिया जाता है। तमाम शूटर अपने शस्त्र लाइसेंस में फर्जीवाड़ा कर विदेशों से खरीदी गई पिस्टल और राइफल को ऊंचे रेट पर बेच रहे हैं।
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सूत्रों के मुताबिक शूटर अपने लाइसेंस पर विदेशी गन या पिस्टल डेढ़ से दो लाख रुपये तक में खरीदते हैं। इन्हें लाखों के मुनाफे के साथ अवैध रूप से बेचने के लिए वे अपने लाइसेंस को खो जाने या खराब हो जाने की दरख्वास्त देकर हजार रुपये की फीस देकर डुप्लीकेट लाइसेेंस जारी करा लेते हैं। डुप्लीकेट लाइसेंस इसलिए जारी कराया जाता है क्योंकि इस पर ओरिजनल लाइसेंस की तरह असलहों का पूरा रिकॉर्ड दर्ज नहीं होता। शस्त्र विभाग के कर्मचारियों की साठगांट से यह रिपोर्ट भी लगवा ली जाती है कि शस्त्र में खराबी आ गई, लिहाजा उन्हें नए हथियार खरीदने की जरूरत है। इसके बाद डुप्लीकेट लाइसेंस पर नया शस्त्र खरीद लिया जाता है और पुराने हथियार को लाखों के मुनाफे के साथ गुपचुप बेच दिया जाता है।
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शूटरों को मिलती है ड्यूटी फ्री शस्त्र खरीदने की सुविधा
एयरगन छोड़कर सभी इवेंट्स में लाइसेंस लेना जरूरी होता है। इसके लिए स्टेट एसोसिएशन लिखकर देती है जिसके बाद शूटर को लाइसेंस के लिए एप्लाई करना पड़ता है। लाइसेंस मिलने के बाद शूटर कहीं से भी ड्यूटी फ्री हथियार आयात कर सकते हैं। एक साल में 15000 तक गोलियां भी इंपोर्ट कर सकते हैं। लाइसेंस के नियम हाल में बदले हैं। खिलाड़ियों को मिलने वाली गोलियों की संख्या बढ़ी है।
गोलियों का इस्तेमाल कहां, कोई चेकिंग नहीं
सूत्रों का कहना है कि प्रशासनिक अधिकारी आमतौर पर इसकी क्रास चेकिंग नहीं कराते कि किस शूटर ने किस साल कितने कारतूस खरीदी हैं और उसमें भी उनसे निशानेबाजी के लिए कब और कहां पर उनका इस्तेमाल किया है। इसलिए इसमें भी गड़बड़ी होने की बात सामने आ रही है। इन कारतूसों के अपराधियों के पास भी पहुंचने की बात से भी इंकार नहीं किया जा सकता।
शूटरों के लाइसेंस में गड़बड़ी कर विदेशी हथियारों को अवैध रूप से बेचे जाने की जानकारी मिली है। हालांकि इस संबंध में अब तक कोई शिकायत नहीं हुई है। ऐसा कोई केस आता है तो जांच कर कार्रवाई की जाएगी। -अशोक कुमार शुक्ला, सिटी मजिस्ट्रेट