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उड़ी हुई नींद और आंखों में छाये अंधेरे को समझना होगा
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बरेली। परीक्षाओं से पहले किसी स्कूल के 80 फीसदी छात्र अगर तनाव के शिकार मिलें तो अंदाजा लगाया जा सकता है कि अभिभावकों का उन पर कितना दबाव है और शिक्षकों ने उन्हें उस दबाव से उबारने के लिए कितना तैयार किया है। बृहस्पतिवार को कुर्मांचल नगर के अल्मा मातेर स्कूल में आयोजित एक वर्कशॉप में आए रुद्रपुर (उत्तराखंड) के चंदोला होम्योपैथिक मेडिकल कॉलेज के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. चक्षु मिश्रा ने इस दौरान हाईस्कूल और इंटरमीडिएट के डेढ़ सौ बच्चों का परीक्षण किया तो यह हैरतअंगेज तथ्य सामने आया। डॉ. चक्षु के मुताबिक बच्चों में तनाव का स्तर अलग-अलग जरूर है, लेकिन ज्यादा समय तक इसे नजरंदाज करने पर यही लक्षण साइको सोमेटिक सिंपटम डिसऑर्डर में तब्दील हो सकते हैं।
स्कूल में आयोजित जिस कार्यशाला में तनावग्रस्त बच्चों को चिह्नित किया गया, उनमें हाथों की कंपकपाहट, सिर और पीठ में दर्द, नींद का उड़ जाना, चक्कर आने के साथ आंखों के आगे अंधेरा छा जाने जैसे लक्षण पाए गए। डॉ. चक्षु मिश्रा ने बताया कि आमतौर पर लोग इन लक्षणों को शारीरिक कमजोरी से जोड़कर देखते हैं, लेकिन असल में ये तनाव की वजह से होते हैं। दरअसल स्कूल प्रबंधन ने परीक्षा से ऐन पहले कुछ छात्रों की मनोदशा में आए परिवर्तन को संज्ञान में लेकर मेडिकल कॉलेज के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. चक्षु से संपर्क किया था। डॉ. चक्षु की वर्कशॉप में नवीं से 12वीं तक के 150 छात्र-छात्राओं को शामिल किया। पॉवर प्वाइंट प्रेजेंटेशन के जरिये सवाल-जवाब कर उनकी मनोदशा को समझा गया और उनमें तनाव के लक्षणों को चिह्नित किया गया। कार्यशाला के बाद करीब 80 फीसदी छात्र-छात्राओं ने खुद माना कि जो लक्षण बताए गए हैं, वे कुछ दिनों से उनमें बढ़ गए हैं।
तनावमुक्त रहने के लिए सुनें संगीत, करें व्यायाम
डॉ. चक्षु ने छात्रों से संवाद करते हुए उन्हें तनाव मुक्त रहने के लिए कई टिप्स भी दिए। उन्हें बताया कि वे तनाव भगाने के लिए योग, व्यायाम और संगीत सुनने जैसे प्रयोगों का सहारा ले सकते हैं। इसके अलावा पूरी नींद लेने और मनपसंद खेल खेलने से भी तनाव दूर होता है।
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कई छात्र एंग्जाइटी के भी शिकार मिले
स्कूल ने शिक्षकों ने कुछ ऐसे छात्रों को भी मनोविश्लेषक के सामने पेश किया जिनमें उन्होंने खुद तनाव के लक्षण महसूस किए थे। इन छात्रों की उन्होंने अलग से काउंसलिंग पर जोर दिया। काउंसलिंग में ऐसे छात्र एंग्जाइटी के शिकार मिले। उनकी पहचान को गोपनीय रखते हुए उन्हें होम्योपैथिक दवाओं का परामर्श दिया गया। डॉक्टर ने बताया कि ऐसे बच्चों को पहचान करके सही समय पर काउंसलिंग नहीं होने से वे खुदकुशी जैसे कदम उठाने के बारे में तक सोचने लगते हैं।
ये हैं तनाव के शुरुआती लक्षण
हाथों की कंपकपाहट, सिर और पीठ में दर्द, नींद न आना, चक्कर आना, आंखों के आगे अंधेरा छा जाना
ऐसे बचें डिसआर्डर से
दिन में कम से कम 30 मिनट पसंदीदा गाने सुनें, रिलैक्स होने के लिए कुछ देर ध्यान मुद्रा में बैठें, 24 घंटे में किए अपनेे अच्छे कामों को याद करें, भविष्य के परिणामों के बारे में सोचकर तनाव लेने के बजाय वर्तमान में एकाग्र हों।
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स्कूल में आयोजित जिस कार्यशाला में तनावग्रस्त बच्चों को चिह्नित किया गया, उनमें हाथों की कंपकपाहट, सिर और पीठ में दर्द, नींद का उड़ जाना, चक्कर आने के साथ आंखों के आगे अंधेरा छा जाने जैसे लक्षण पाए गए। डॉ. चक्षु मिश्रा ने बताया कि आमतौर पर लोग इन लक्षणों को शारीरिक कमजोरी से जोड़कर देखते हैं, लेकिन असल में ये तनाव की वजह से होते हैं। दरअसल स्कूल प्रबंधन ने परीक्षा से ऐन पहले कुछ छात्रों की मनोदशा में आए परिवर्तन को संज्ञान में लेकर मेडिकल कॉलेज के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. चक्षु से संपर्क किया था। डॉ. चक्षु की वर्कशॉप में नवीं से 12वीं तक के 150 छात्र-छात्राओं को शामिल किया। पॉवर प्वाइंट प्रेजेंटेशन के जरिये सवाल-जवाब कर उनकी मनोदशा को समझा गया और उनमें तनाव के लक्षणों को चिह्नित किया गया। कार्यशाला के बाद करीब 80 फीसदी छात्र-छात्राओं ने खुद माना कि जो लक्षण बताए गए हैं, वे कुछ दिनों से उनमें बढ़ गए हैं।
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तनावमुक्त रहने के लिए सुनें संगीत, करें व्यायाम
डॉ. चक्षु ने छात्रों से संवाद करते हुए उन्हें तनाव मुक्त रहने के लिए कई टिप्स भी दिए। उन्हें बताया कि वे तनाव भगाने के लिए योग, व्यायाम और संगीत सुनने जैसे प्रयोगों का सहारा ले सकते हैं। इसके अलावा पूरी नींद लेने और मनपसंद खेल खेलने से भी तनाव दूर होता है।
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कई छात्र एंग्जाइटी के भी शिकार मिले
स्कूल ने शिक्षकों ने कुछ ऐसे छात्रों को भी मनोविश्लेषक के सामने पेश किया जिनमें उन्होंने खुद तनाव के लक्षण महसूस किए थे। इन छात्रों की उन्होंने अलग से काउंसलिंग पर जोर दिया। काउंसलिंग में ऐसे छात्र एंग्जाइटी के शिकार मिले। उनकी पहचान को गोपनीय रखते हुए उन्हें होम्योपैथिक दवाओं का परामर्श दिया गया। डॉक्टर ने बताया कि ऐसे बच्चों को पहचान करके सही समय पर काउंसलिंग नहीं होने से वे खुदकुशी जैसे कदम उठाने के बारे में तक सोचने लगते हैं।
ये हैं तनाव के शुरुआती लक्षण
हाथों की कंपकपाहट, सिर और पीठ में दर्द, नींद न आना, चक्कर आना, आंखों के आगे अंधेरा छा जाना
ऐसे बचें डिसआर्डर से
दिन में कम से कम 30 मिनट पसंदीदा गाने सुनें, रिलैक्स होने के लिए कुछ देर ध्यान मुद्रा में बैठें, 24 घंटे में किए अपनेे अच्छे कामों को याद करें, भविष्य के परिणामों के बारे में सोचकर तनाव लेने के बजाय वर्तमान में एकाग्र हों।