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सीतापुर फोरलेन बनाने में एनएचएआई ने खड़े किए हाथ
Updated Sun, 11 Nov 2018 02:05 AM IST
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बरेली। दुर्दशाग्रस्त बरेली-सीतापुर फोरलेन को उसकी हालत पर छोड़ दिया गया है। एनएचएआई के अफसरों ने आधे-अधूरे इस हाईवे का निर्माण पूरा कराने के अब प्रयास करने भी बंद कर दिए हैं। ऐसे में हाईवे पर कई जगह गड्ढों और अधूरे फ्लाईओवर की वजह से हादसों का खतरा बना हुआ है। फ्लाईओवर न बनने से जाम की दिक्कत से भी लोगों को छुटकारा नहीं मिल पा रहा है। एनएचएआई को इस प्रोजेक्ट को पूरा करने के लिए 1000 करोड़ से ज्यादा के काम कराने हैं।
बरेली से सीतापुर के बीच हाईवे के चौड़ीकरण और कई जगहों फ्लाईओवर बनाने का कांट्रेक्ट पहले इरा इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनी को दिया गया था। कंपनी ने इस प्रोजेक्ट के लिए 1800 करोड़ का बैंकों से कर्ज ले लिया लेकिन प्रोजेक्ट को सालभर पहले आधा-अधूरा छोड़कर भाग गई। इसके बाद करीब पांच माह पहले कंपनी को टर्मिनेट करने के बाद से ही एनएचएआई के अफसर इस हाईवे के अधूरे काम का ठेका देने की कोशिश कर रहे हैं। इसके लिए कई बार राजमार्ग प्राधिकरण के लखनऊ और दिल्ली मुख्यालयों पर मीटिंग भी हुई। एनएचएआई के अधिकारियों ने काफी कोशिश की कि अधूरे काम का कांट्रेक्ट उन बैंकर्स को दे दिया जाए, जिन्होंने प्रोजेक्ट के लिए मोटी रकम दी है। बाद में टोल टैक्स के जरिये वे रकम की वसूली कर लें। इसके बावजूद इस पर कोई सहमति नहीं बन सकी है। अधूरे हाईवे पर करीब एक हजार करोड़ के काम होने हैं। काम न हो पाने से फरीदपुर, फतेहगंज पूर्वी, कटरा सहित कई जगहों पर हाईवे और फ्लाईओवर के काम होने बाकी हैं। बारिश के दौरान कई जगहों पर हाईवे क्षतिग्रस्त भी हो चुका है।
अभी इस हाईवे के निर्माण के लिए कांट्रेक्ट नहीं दिया जा सका है। प्रोजेक्ट को लेकर जो स्थिति पहले थी, वही अब है। हाईवे कैसे बनकर तैयार होगा, फिलहाल इस पर अभी कुछ नहीं कहा जा सकता। - चंदन वत्स, क्षेत्रीय अधिकारी, एनएचएआई
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बरेली से सीतापुर के बीच हाईवे के चौड़ीकरण और कई जगहों फ्लाईओवर बनाने का कांट्रेक्ट पहले इरा इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनी को दिया गया था। कंपनी ने इस प्रोजेक्ट के लिए 1800 करोड़ का बैंकों से कर्ज ले लिया लेकिन प्रोजेक्ट को सालभर पहले आधा-अधूरा छोड़कर भाग गई। इसके बाद करीब पांच माह पहले कंपनी को टर्मिनेट करने के बाद से ही एनएचएआई के अफसर इस हाईवे के अधूरे काम का ठेका देने की कोशिश कर रहे हैं। इसके लिए कई बार राजमार्ग प्राधिकरण के लखनऊ और दिल्ली मुख्यालयों पर मीटिंग भी हुई। एनएचएआई के अधिकारियों ने काफी कोशिश की कि अधूरे काम का कांट्रेक्ट उन बैंकर्स को दे दिया जाए, जिन्होंने प्रोजेक्ट के लिए मोटी रकम दी है। बाद में टोल टैक्स के जरिये वे रकम की वसूली कर लें। इसके बावजूद इस पर कोई सहमति नहीं बन सकी है। अधूरे हाईवे पर करीब एक हजार करोड़ के काम होने हैं। काम न हो पाने से फरीदपुर, फतेहगंज पूर्वी, कटरा सहित कई जगहों पर हाईवे और फ्लाईओवर के काम होने बाकी हैं। बारिश के दौरान कई जगहों पर हाईवे क्षतिग्रस्त भी हो चुका है।
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अभी इस हाईवे के निर्माण के लिए कांट्रेक्ट नहीं दिया जा सका है। प्रोजेक्ट को लेकर जो स्थिति पहले थी, वही अब है। हाईवे कैसे बनकर तैयार होगा, फिलहाल इस पर अभी कुछ नहीं कहा जा सकता। - चंदन वत्स, क्षेत्रीय अधिकारी, एनएचएआई
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