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Barabanki News: सात साल पुराने हत्या के मामले में चाचा-भतीजे दोषमुक्त
Mon, 19 Oct 2026 11:42 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बाराबंकी
संवाद न्यूज एजेंसी, बाराबंकी
Updated Mon, 19 Oct 2026 11:42 PM IST
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बाराबंकी। महिला की हत्या के सात साल पुराने मामले में अदालत ने विवेचना और पोस्टमार्टम की प्रक्रिया में खामियां मिलने पर आरोपी चाचा-भतीजे को संदेह का लाभ देते हुए दोषमुक्त कर दिया। अदालत ने तत्कालीन चिकित्सक और तीन पुलिस अधिकारियों की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए उनके खिलाफ जांच की संस्तुति की।
देवा कोतवाली क्षेत्र के मंडौरा गांव निवासी बिटाना देवी ने तीन फरवरी 2019 को बेटी नीतू की हत्या की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। आरोप था कि दो फरवरी की रात दांतखंड मजरे कासिमगंज निवासी पप्पू उर्फ राम अनुज और उसका भाई मंजीत नीतू को घर से बुलाकर ले गए थे। अगले दिन उसका शव गांव के बाहर आम के पेड़ से लटका मिला। आरोप था कि पत्नी और तीन बच्चे होने के बावजूद पप्पू ने जमीन के लालच में नीतू से कोर्ट मैरिज की थी।
पुलिस ने मंजीत और पप्पू के पुत्र मनीष कुमार के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किया। सुनवाई के दौरान बिटाना देवी ने कहा कि नीतू रात में घर से चली गई थी और सुबह उसका शव पेड़ से लटका मिला। उन्हें तहरीर पढ़कर भी नहीं सुनाई गई थी। परिजनों के बयानों में विरोधाभास भी मिले।
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अदालत ने पोस्टमार्टम में यकृत, गुर्दे और बड़ी आंत में मिले पदार्थों को जांच के लिए प्रयोगशाला न भेजने तथा परिजनों को गवाह न बनाने पर सवाल उठाए। तत्कालीन चिकित्सक डॉ. उमेश चंद्र, तत्कालीन थाना प्रभारी विवेक कुमार सिंह, विवेचक धनेश कुमार सिंह और अंतिम विवेचक प्रमोद कुमार सिंह की कार्यशैली की निंदा करते हुए जांच के आदेश दिए। मंजीत और मनीष को दोषमुक्त कर दिया गया।
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देवा कोतवाली क्षेत्र के मंडौरा गांव निवासी बिटाना देवी ने तीन फरवरी 2019 को बेटी नीतू की हत्या की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। आरोप था कि दो फरवरी की रात दांतखंड मजरे कासिमगंज निवासी पप्पू उर्फ राम अनुज और उसका भाई मंजीत नीतू को घर से बुलाकर ले गए थे। अगले दिन उसका शव गांव के बाहर आम के पेड़ से लटका मिला। आरोप था कि पत्नी और तीन बच्चे होने के बावजूद पप्पू ने जमीन के लालच में नीतू से कोर्ट मैरिज की थी।
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पुलिस ने मंजीत और पप्पू के पुत्र मनीष कुमार के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किया। सुनवाई के दौरान बिटाना देवी ने कहा कि नीतू रात में घर से चली गई थी और सुबह उसका शव पेड़ से लटका मिला। उन्हें तहरीर पढ़कर भी नहीं सुनाई गई थी। परिजनों के बयानों में विरोधाभास भी मिले।
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अदालत ने पोस्टमार्टम में यकृत, गुर्दे और बड़ी आंत में मिले पदार्थों को जांच के लिए प्रयोगशाला न भेजने तथा परिजनों को गवाह न बनाने पर सवाल उठाए। तत्कालीन चिकित्सक डॉ. उमेश चंद्र, तत्कालीन थाना प्रभारी विवेक कुमार सिंह, विवेचक धनेश कुमार सिंह और अंतिम विवेचक प्रमोद कुमार सिंह की कार्यशैली की निंदा करते हुए जांच के आदेश दिए। मंजीत और मनीष को दोषमुक्त कर दिया गया।