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Barabanki News: नर्स ने झूठा शपथ पत्र देकर सिपाही पति से मांगा गुजारा भत्ता, चलेगा मुकदमा
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बाराबंकी। लखनऊ के डॉ. राम मनोहर लोहिया अस्पताल में ड्यूटी के दौरान एक नर्स से सिपाही की मुलाकात हुई। दोनों में प्रेम हो गया और परिजनों ने बिना दान-दहेज के धूमधाम से दोनों का विवाह कर दिया। सिपाही लखनऊ के कैंट थाना क्षेत्र निवासी है और नर्स बाराबंकी के जैदपुर थाना क्षेत्र की रहने वाली है। विवाह के बाद सिपाही पति ने नर्स पत्नी को आवागमन के लिए स्कूटी खरीद कर दी, लेकिन जब अनबन हुई तो नर्स ने दहेज में कार की मांग पूरी न होने पर उसे प्रताड़ित किए जाने का आरोप लगाकर पुलिस से शिकायत कर दी। इसके बाद मायके में रहने लगी और 30 हजार रुपये प्रतिमाह गुजारा भत्ते की मांग करते हुए 17 जून 2022 को फैमिली कोर्ट में वाद दायर कर दिया। प्रार्थना पत्र में स्वयं को ऐसा कोई काम न जानने वाली महिला बताया, जिससे वह अपना भरण-पोषण कर सकती हो, लेकिन जब सिपाही पति फैमिली कोर्ट के अपर प्रधान न्यायाधीश द्वितीय कृष्ण कुमार के समक्ष पेश हुआ तो सारी हकीकत सामने आ गई।
सिपाही पति ने मौखिक व लिखित दोनों तरह से कोर्ट को बताया कि उनका विवाह छह दिसंबर 2020 को हुआ था। लेनदेन की कोई बात नहीं हुई। बाहर के दो लोग विवाह में मध्यस्थ थे। विवाह के बाद स्कूटी भी खरीद कर दी, लेकिन पत्नी स्वतंत्र विचारों की होने के कारण सास व ससुर आदि परिजनों का भी सम्मान नहीं करती थी। बिना बताए देर तक बाहर रहती, जब कोई जल्दी लौटने को कहता और देर से आने का कारण पूछता तो उसका अपमान करती। 29 दिसंबर 2021 को अपने भाई के साथ मायके में रहने चली गई। सिपाही ने सारे साक्ष्य भी दिखाए। तब महिला ने कबूल किया कि वह डॉ. राम मनोहर लोहिया अस्पताल से पहले सफेदाबाद के एक निजी मेडिकल कॉलेज में भी नर्स थी। उसने जेएनएम का कोर्स भी किया है। दोनों पक्षों के गवाहों और वादी के बयानों से दहेज उत्पीड़न जैसी कोई बात सामने नहीं आई। नर्स होने की बात कोर्ट में छिपाना भारी पड़ गया। कोर्ट ने गुजारे का वाद खारिज करते हुए वादी नर्स के विरुद्ध 383 बीएनएस के तहत कोर्ट पर प्रकीर्णवाद दायर करने का आदेश दिया। मामले में सुनवाई की अगली तिथि 28 जुलाई को होगी। (संवाद)
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सिपाही पति ने मौखिक व लिखित दोनों तरह से कोर्ट को बताया कि उनका विवाह छह दिसंबर 2020 को हुआ था। लेनदेन की कोई बात नहीं हुई। बाहर के दो लोग विवाह में मध्यस्थ थे। विवाह के बाद स्कूटी भी खरीद कर दी, लेकिन पत्नी स्वतंत्र विचारों की होने के कारण सास व ससुर आदि परिजनों का भी सम्मान नहीं करती थी। बिना बताए देर तक बाहर रहती, जब कोई जल्दी लौटने को कहता और देर से आने का कारण पूछता तो उसका अपमान करती। 29 दिसंबर 2021 को अपने भाई के साथ मायके में रहने चली गई। सिपाही ने सारे साक्ष्य भी दिखाए। तब महिला ने कबूल किया कि वह डॉ. राम मनोहर लोहिया अस्पताल से पहले सफेदाबाद के एक निजी मेडिकल कॉलेज में भी नर्स थी। उसने जेएनएम का कोर्स भी किया है। दोनों पक्षों के गवाहों और वादी के बयानों से दहेज उत्पीड़न जैसी कोई बात सामने नहीं आई। नर्स होने की बात कोर्ट में छिपाना भारी पड़ गया। कोर्ट ने गुजारे का वाद खारिज करते हुए वादी नर्स के विरुद्ध 383 बीएनएस के तहत कोर्ट पर प्रकीर्णवाद दायर करने का आदेश दिया। मामले में सुनवाई की अगली तिथि 28 जुलाई को होगी। (संवाद)
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