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Barabanki News: सरयू में समाए दूरभाष केंद्र आैर मंदिर, गांव बना टापू
Wed, 09 Sep 2026 01:36 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बाराबंकी
संवाद न्यूज एजेंसी, बाराबंकी
Updated Wed, 09 Sep 2026 01:36 AM IST
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सूरतगंज। बीते चार दिन से लगातार बढ़ रहा सरयू नदी का जलस्तर खतरे के लाल निशान से 50 सेमी ऊपर पहुंच गया है। इसके चलते रामनगर इलाके के हेतमापुर गांव में सोमवार रात दूरभाष केंद्र के भवन, मंदिर और चार मकान बाढ़ के पानी में समा गए।
इसके साथ ही बाबा नारायण दास का ऐतिहासिक समाधि स्थल भी अब नदी की चपेट में आ गया है। हेमतापुर गांव में कटान के डर से ग्रामीण रातभर जागकर अपना मकान तोड़कर ईंटें व गृहस्थी का सामान सुरक्षित स्थान पर ले जाने की कवायद में जुटे रहे।
नदी का जलस्तर खतरे के निशान से 50 सेमी ऊपर पहुंंचने के बाद बाढ़ का पानी पूरे इलाके में फैल गया है। रविवार रात हेमतापुर गांव के पास नदी ने धारा ही बदल ली। नदी के गांव के समीप आने के साथ ही कटान भी तेज हुआ है। कटान रोकने के लिए बाढ़ खंड द्वारा किया जा रहा हर प्रयास फेल होता नजर आ रहा है। हेतमापुर में जिस जगह कल तक घर थे, वहां अब सरयू की धार गरज रही है। नदी लगातार जमीन काटते हुए बाबा नारायण दास के ऐतिहासिक समाधि स्थल और मंदिर की ओर बढ़ रही है। करीब नौ परिवार खतरा भांपकर अपने पक्के मकान खुद तोड़ रहे हैं। मंगलवार को गांव में हर तरफ टूटते मकानों की आवाज, सिर पर गृहस्थी का सामान और आंखों में बेबसी नजर आई। ग्रामीणों ने तटबंध को ही अपना नया ठिकाना बना लिया है।
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इसके साथ ही बाबा नारायण दास का ऐतिहासिक समाधि स्थल भी अब नदी की चपेट में आ गया है। हेमतापुर गांव में कटान के डर से ग्रामीण रातभर जागकर अपना मकान तोड़कर ईंटें व गृहस्थी का सामान सुरक्षित स्थान पर ले जाने की कवायद में जुटे रहे।
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नदी का जलस्तर खतरे के निशान से 50 सेमी ऊपर पहुंंचने के बाद बाढ़ का पानी पूरे इलाके में फैल गया है। रविवार रात हेमतापुर गांव के पास नदी ने धारा ही बदल ली। नदी के गांव के समीप आने के साथ ही कटान भी तेज हुआ है। कटान रोकने के लिए बाढ़ खंड द्वारा किया जा रहा हर प्रयास फेल होता नजर आ रहा है। हेतमापुर में जिस जगह कल तक घर थे, वहां अब सरयू की धार गरज रही है। नदी लगातार जमीन काटते हुए बाबा नारायण दास के ऐतिहासिक समाधि स्थल और मंदिर की ओर बढ़ रही है। करीब नौ परिवार खतरा भांपकर अपने पक्के मकान खुद तोड़ रहे हैं। मंगलवार को गांव में हर तरफ टूटते मकानों की आवाज, सिर पर गृहस्थी का सामान और आंखों में बेबसी नजर आई। ग्रामीणों ने तटबंध को ही अपना नया ठिकाना बना लिया है।
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