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Barabanki News: लू के थपेड़ों से बाजारों में सन्नाटा, स्कूली बच्चों की बढ़ी मुश्किलें
Tue, 19 May 2026 01:55 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बाराबंकी
संवाद न्यूज एजेंसी, बाराबंकी
Updated Tue, 19 May 2026 01:55 AM IST
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बाराबंकी। भीषण गर्मी और उमस ने जनजीवन को पूरी तरह अस्त-व्यस्त कर दिया है। मौसम विभाग के अनुसार, जिले का अधिकतम तापमान 42.3 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 29.2 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया है। मौसम वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि आने वाले दिनों में तापमान में और बढ़ोतरी होने की संभावना है।
लगातार बढ़ती तपिश के कारण दोपहर के समय सड़कों और बाजारों में सन्नाटा पसर जाता है। गर्म हवा के थपेड़ों और लू के कारण लोग घरों से बाहर निकलने से बच रहे हैं। इस गर्मी का सबसे बड़ा असर स्वास्थ्य व्यवस्था पर पड़ा है। जिला अस्पताल और निजी क्लीनिकों में उल्टी, दस्त, तेज बुखार और डिहाइड्रेशन (पानी की कमी) के मरीजों की भीड़ लगातार बढ़ रही है।
इस मौसम का सबसे गंभीर प्रभाव स्कूली बच्चों पर पड़ रहा है। बड़ेल चौराहा के पास एक निजी स्कूल के बाहर बच्चे का इंतजार कर रही अभिभावक सीमा और पायनियर चौराहे पर खड़े महेश ने बताया कि पिछले एक सप्ताह से धूप इतनी तेज है कि बच्चों को संभालना मुश्किल हो गया है। बच्चों को इस मौसम में लू लगने का सबसे ज्यादा खतरा रहता है।
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हालांकि, शासन के निर्देशानुसार स्कूलों के समय में पहले ही बदलाव कर सुबह की पाली (7:30 से 12:30 बजे) कर दी गई है और भीषण गर्मी को देखते हुए 20 मई से ग्रीष्मकालीन अवकाश भी शुरू होने जा रहे हैं।
स्वास्थ्य विभाग द्वारा जारी बचाव के मुख्य उपाय
प्यास न भी लगे, तब भी थोड़े-थोड़े अंतराल पर पानी, ओआरएस घोल, नींबू पानी, छाछ या लस्सी पीते रहें ताकि शरीर में इलेक्ट्रोलाइट्स की कमी न हो। दोपहर 12 बजे से शाम 4 बजे के बीच बहुत जरूरी काम होने पर ही घर से बाहर निकलें। बाहर निकलते समय हल्के रंग के ढीले और सूती कपड़े पहनें।
सिर को हमेशा टोपी, छाते या गीले सूती कपड़े से ढककर रखें। तरबूज, खरबूजा, खीरा और ककड़ी जैसे पानी से भरपूर मौसमी फलों का सेवन करें। बासी भोजन और अधिक प्रोटीन वाले हैवी फूड से परहेज करें। बच्चों या पालतू जानवरों को धूप में खड़ी बंद गाड़ियों में अकेला बिल्कुल न छोड़ें।
यदि किसी को चक्कर आए, तेज सिरदर्द हो या बेहोशी महसूस हो, तो उसे तुरंत छायादार व ठंडी जगह पर ले जाएं, बदन को गीले कपड़े से पोंछें और बिना देर किए नजदीकी अस्पताल ले जाएं।
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लगातार बढ़ती तपिश के कारण दोपहर के समय सड़कों और बाजारों में सन्नाटा पसर जाता है। गर्म हवा के थपेड़ों और लू के कारण लोग घरों से बाहर निकलने से बच रहे हैं। इस गर्मी का सबसे बड़ा असर स्वास्थ्य व्यवस्था पर पड़ा है। जिला अस्पताल और निजी क्लीनिकों में उल्टी, दस्त, तेज बुखार और डिहाइड्रेशन (पानी की कमी) के मरीजों की भीड़ लगातार बढ़ रही है।
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इस मौसम का सबसे गंभीर प्रभाव स्कूली बच्चों पर पड़ रहा है। बड़ेल चौराहा के पास एक निजी स्कूल के बाहर बच्चे का इंतजार कर रही अभिभावक सीमा और पायनियर चौराहे पर खड़े महेश ने बताया कि पिछले एक सप्ताह से धूप इतनी तेज है कि बच्चों को संभालना मुश्किल हो गया है। बच्चों को इस मौसम में लू लगने का सबसे ज्यादा खतरा रहता है।
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हालांकि, शासन के निर्देशानुसार स्कूलों के समय में पहले ही बदलाव कर सुबह की पाली (7:30 से 12:30 बजे) कर दी गई है और भीषण गर्मी को देखते हुए 20 मई से ग्रीष्मकालीन अवकाश भी शुरू होने जा रहे हैं।
स्वास्थ्य विभाग द्वारा जारी बचाव के मुख्य उपाय
प्यास न भी लगे, तब भी थोड़े-थोड़े अंतराल पर पानी, ओआरएस घोल, नींबू पानी, छाछ या लस्सी पीते रहें ताकि शरीर में इलेक्ट्रोलाइट्स की कमी न हो। दोपहर 12 बजे से शाम 4 बजे के बीच बहुत जरूरी काम होने पर ही घर से बाहर निकलें। बाहर निकलते समय हल्के रंग के ढीले और सूती कपड़े पहनें।
सिर को हमेशा टोपी, छाते या गीले सूती कपड़े से ढककर रखें। तरबूज, खरबूजा, खीरा और ककड़ी जैसे पानी से भरपूर मौसमी फलों का सेवन करें। बासी भोजन और अधिक प्रोटीन वाले हैवी फूड से परहेज करें। बच्चों या पालतू जानवरों को धूप में खड़ी बंद गाड़ियों में अकेला बिल्कुल न छोड़ें।
यदि किसी को चक्कर आए, तेज सिरदर्द हो या बेहोशी महसूस हो, तो उसे तुरंत छायादार व ठंडी जगह पर ले जाएं, बदन को गीले कपड़े से पोंछें और बिना देर किए नजदीकी अस्पताल ले जाएं।