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Barabanki News: महाशिवरात्रि पर खास संयोग, फलदायी होगी शिव आराधना
Sat, 22 Feb 2025 11:50 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बाराबंकी
संवाद न्यूज एजेंसी, बाराबंकी
Updated Sat, 22 Feb 2025 11:50 PM IST
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रामनगर (बाराबंकी)। 26 फरवरी को मनाई जाने वाली महाशिवरात्रि पर इस बार कई खास संयोग बन रहे हैं। श्रवण नक्षत्र और पांच योग में भगवान शिव की आराधना होगी। श्रद्धालु श्रवण नक्षत्र और पांच योग में भगवान शिव की आराधना करेंगे। जो विशेषतौर पर फलदायी रहेगा।
पं. वीरेंद्र शास्त्री और पं. चंद्र कुमार पाठक के अनुसार त्रयोदशी तिथि 25 फरवरी को सुबह 10:06 बजे से 26 फरवरी को सुबह 9:19 बजे तक रहेगी। मगर, उदया तिथि के मान्य होने से महाशिवरात्रि 26 को मनाई जाएगी। जबकि 26 को ही सुबह 9:20 बजे से चतुर्दशी तिथि लग जाएगी। इसी संधिकाल में बाबा भोलेनाथ और मां पार्वती का विवाह होगा। इस दिन श्रवण नक्षत्र के साथ ही परिघ, शुभ, शिव, छत्र और श्रीवत्स योग रहेगा। पं. वीरेंद्र शास्त्री ने बताया शिवरात्रि से बड़ा कोई परम तत्व नहीं है। शिव पुराण के अनुसार शिवरात्रि व्रत और शिव पूजन के प्रभाव से असंभव कार्य भी पूर्ण हो जाते हैं।
चार प्रहर में विशेष पूजा
महाशिवरात्रि पर निशिता काल पूजा का विशेष महत्व होता है। यह पूजा महाशिवरात्रि की रात में 12:27 बजे से रात 1:16 बजे तक विविध नैवेद्य के साथ होगी। जबकि चार पहर में प्रथम पहर शाम 6:43 बजे से रात 9:47 बजे तक दूध से अभिषेक होगा। द्वितीय पहर की पूजा रात 9:47 बजे से रात 12:51 बजे तक होगी।
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इसमें दही से शिव का अभिषेक होगा। तीसरे पहर की पूजा रात 12:51 बजे से भोर में 3:55 बजे तक होगी। अभिषेक के लिए शुद्ध देशी घी का इस्तेमाल होगा। चौथे पहर में भोर 3:55 से सुबह 6:59 बजे तक पूजा होगी और शहद से अभिषेक किया जाएगा। शिव स्तुति, शिव सहस्रनाम, शिव तांडव, शिव चालीसा, रुद्राष्टक, शिवपुराण आदि का पाठ होगा।
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पं. वीरेंद्र शास्त्री और पं. चंद्र कुमार पाठक के अनुसार त्रयोदशी तिथि 25 फरवरी को सुबह 10:06 बजे से 26 फरवरी को सुबह 9:19 बजे तक रहेगी। मगर, उदया तिथि के मान्य होने से महाशिवरात्रि 26 को मनाई जाएगी। जबकि 26 को ही सुबह 9:20 बजे से चतुर्दशी तिथि लग जाएगी। इसी संधिकाल में बाबा भोलेनाथ और मां पार्वती का विवाह होगा। इस दिन श्रवण नक्षत्र के साथ ही परिघ, शुभ, शिव, छत्र और श्रीवत्स योग रहेगा। पं. वीरेंद्र शास्त्री ने बताया शिवरात्रि से बड़ा कोई परम तत्व नहीं है। शिव पुराण के अनुसार शिवरात्रि व्रत और शिव पूजन के प्रभाव से असंभव कार्य भी पूर्ण हो जाते हैं।
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चार प्रहर में विशेष पूजा
महाशिवरात्रि पर निशिता काल पूजा का विशेष महत्व होता है। यह पूजा महाशिवरात्रि की रात में 12:27 बजे से रात 1:16 बजे तक विविध नैवेद्य के साथ होगी। जबकि चार पहर में प्रथम पहर शाम 6:43 बजे से रात 9:47 बजे तक दूध से अभिषेक होगा। द्वितीय पहर की पूजा रात 9:47 बजे से रात 12:51 बजे तक होगी।
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इसमें दही से शिव का अभिषेक होगा। तीसरे पहर की पूजा रात 12:51 बजे से भोर में 3:55 बजे तक होगी। अभिषेक के लिए शुद्ध देशी घी का इस्तेमाल होगा। चौथे पहर में भोर 3:55 से सुबह 6:59 बजे तक पूजा होगी और शहद से अभिषेक किया जाएगा। शिव स्तुति, शिव सहस्रनाम, शिव तांडव, शिव चालीसा, रुद्राष्टक, शिवपुराण आदि का पाठ होगा।