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बरसात से फसलों को फायदा, ठंड बढ़ी, जलभराव से जूझे लोग
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बाराबंकी। बारिश के कारण जहां फसलों को फायदा पहुंचा हैं वहीं पारा कई डिग्री नीचे गिर गया। बुधवार को जिले में कहीं-कहीं ही बस कुछ ही देर तक धूप के दर्शन हुए। शहर से लेकर गांव तक सड़कों पर जलभराव की समस्या पैदा हो गई वहीं शहर के स्टेडियम में भी पानी भरने से खेल गतिविधियां प्रभावित रहीं।
इस दौरान केंद्रों के बाहर लगा धान भीगने से बचाने की कसरत होती रही। शहर के गन्ना दफ्तर परिसर में धान के साथ धरना दे रहे किसानों को भी परेशानी झेलनी पड़ी। आधा दर्जन से अधिक ट्रॉलियों में लदा धान भीग गया। जिले में कहीं कम तो कहीं ज्यादा बरसात हुई। बुधवार को जिले में 24 घंटे में 14.8 मिलीमीटर बारिश रिकॉर्ड की गई।
मंगलवार को ही मौसम ने करवट ले ली थी। रात में जिले के निन्दूरा, फतेहपुर, कुर्सी आदि क्षेत्रों में बारिश शुरू हो गई थी। इस बीच लोग घरों में थे इसलिए बरसात से ज्यादा कोई परेशानी नहीं हुई। लेकिन बुधवार सुबह भी पूरे जिले में बूंदाबांदी व बरसात का क्रम जारी रहा।
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बरसात होने से शहर में गन्ना दफ्तर परिसर में धान की ट्रॉलियों के साथ धरना दे रहे किसानों में खलबली मच गई। हालांकि किसानों को बरसात की आशंका पहले ही थी। इसलिए सभी ट्रॉलियों को तिरपाल डालकर धान को भीगने से बचाया गया। जबकि सरकारी क्रय केंद्रों पर बाहर लगे धान को भी बचाने के लिए मशक्कत हुई। जो धान जमीन पर लगा था उस खेप की निचली बोरियां भीग गईं।
इस समय खेतों में गेहूं, सरसों, आलू व सब्जियों की फसल लगी है। बहुत ज्यादा बरसात न होने से इन फसलों को भी नुकसान नहीं हुआ है। क्योंकि खेतों में पानी नहीं भरा। फसलों को भी जितनी नमी की जरूरत थी मिल गई। गेहूं की फसल की पहली सिंचाई का वक्त भी चल रहा है।
उप कृषि निदेशक एके सागर ने बताया कि इतनी बरसात से फसलों को फायदा ही पहुंचा है। उन्होंने कहा कि इसका असर उत्पादन पर पड़ेगा। लेकिन बरसात ज्यादा होती तो पानी भरने के कारण फसलों को नुकसान हो सकता था। उप कृषि निदेशक रिसर्च वीरेंद्र वर्मा ने बताया कि फसलों की पत्तियों पर पाले से पड़ने वाला असर भी नहीं होगा।
इतनी सी बरसात में भीषण जलभराव, व्यवस्था दिखी फेल
दिसंबर के आखिरी सप्ताह में हुई इस बरसात से शहर व ग्रामीण इलाकों में जलनिकासी की व्यवस्था की पोल खुल गई। लखपेड़ाबाग, लक्ष्मणपुरी कॉलोनी, डिवाइन ग्रीन सिटी व दशहराबाग खलरिया में कई रास्तों व सड़कों पर पानी भरने से आवागमन प्रभावित रहा। सिद्धौर इलाके में सेमरांवा जाने वाली सड़क पर पानी भर गया। शहर में तमाम स्थानों पर नालियां पूरी तरह से चोक मिली।
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इस दौरान केंद्रों के बाहर लगा धान भीगने से बचाने की कसरत होती रही। शहर के गन्ना दफ्तर परिसर में धान के साथ धरना दे रहे किसानों को भी परेशानी झेलनी पड़ी। आधा दर्जन से अधिक ट्रॉलियों में लदा धान भीग गया। जिले में कहीं कम तो कहीं ज्यादा बरसात हुई। बुधवार को जिले में 24 घंटे में 14.8 मिलीमीटर बारिश रिकॉर्ड की गई।
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मंगलवार को ही मौसम ने करवट ले ली थी। रात में जिले के निन्दूरा, फतेहपुर, कुर्सी आदि क्षेत्रों में बारिश शुरू हो गई थी। इस बीच लोग घरों में थे इसलिए बरसात से ज्यादा कोई परेशानी नहीं हुई। लेकिन बुधवार सुबह भी पूरे जिले में बूंदाबांदी व बरसात का क्रम जारी रहा।
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बरसात होने से शहर में गन्ना दफ्तर परिसर में धान की ट्रॉलियों के साथ धरना दे रहे किसानों में खलबली मच गई। हालांकि किसानों को बरसात की आशंका पहले ही थी। इसलिए सभी ट्रॉलियों को तिरपाल डालकर धान को भीगने से बचाया गया। जबकि सरकारी क्रय केंद्रों पर बाहर लगे धान को भी बचाने के लिए मशक्कत हुई। जो धान जमीन पर लगा था उस खेप की निचली बोरियां भीग गईं।
इस समय खेतों में गेहूं, सरसों, आलू व सब्जियों की फसल लगी है। बहुत ज्यादा बरसात न होने से इन फसलों को भी नुकसान नहीं हुआ है। क्योंकि खेतों में पानी नहीं भरा। फसलों को भी जितनी नमी की जरूरत थी मिल गई। गेहूं की फसल की पहली सिंचाई का वक्त भी चल रहा है।
उप कृषि निदेशक एके सागर ने बताया कि इतनी बरसात से फसलों को फायदा ही पहुंचा है। उन्होंने कहा कि इसका असर उत्पादन पर पड़ेगा। लेकिन बरसात ज्यादा होती तो पानी भरने के कारण फसलों को नुकसान हो सकता था। उप कृषि निदेशक रिसर्च वीरेंद्र वर्मा ने बताया कि फसलों की पत्तियों पर पाले से पड़ने वाला असर भी नहीं होगा।
इतनी सी बरसात में भीषण जलभराव, व्यवस्था दिखी फेल
दिसंबर के आखिरी सप्ताह में हुई इस बरसात से शहर व ग्रामीण इलाकों में जलनिकासी की व्यवस्था की पोल खुल गई। लखपेड़ाबाग, लक्ष्मणपुरी कॉलोनी, डिवाइन ग्रीन सिटी व दशहराबाग खलरिया में कई रास्तों व सड़कों पर पानी भरने से आवागमन प्रभावित रहा। सिद्धौर इलाके में सेमरांवा जाने वाली सड़क पर पानी भर गया। शहर में तमाम स्थानों पर नालियां पूरी तरह से चोक मिली।