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Barabanki News: सरयू में समाई मस्जिद और 15 घर, बाबा नारायण धाम भी कटने लगा
Mon, 28 Sep 2026 02:43 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बाराबंकी
संवाद न्यूज एजेंसी, बाराबंकी
Updated Mon, 28 Sep 2026 02:43 AM IST
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बाबा नारायण दास के धाम को कटान से बचाने की पूरा दिन चली कवायद। संवाद
बाराबंकी/सूरतगंज। एक सप्ताह तक शांत रहने के बाद सरयू नदी फिर उफना गई। रामनगर के हेतमापुर में रविवार को 150 साल पुरानी उधिया मस्जिद व 14 मकान नदी में समा गए। करीब 1100 साल पुराने बाबा नारायण दास धाम का भवन भी नदी में कटने लगा है। धाम को बचाने के लिए एडीएम, एसडीएम और बाढ़ खंड के अधिकारी मौके पर पहुंचे, लेकिन तेज बहाव के कारण कटान रोकना मुश्किल बना रहा। रामनगर का सुंदरनगर पानी से घिर गया है।
नदी के दूसरे छोर पर बसे पूरनपुर गांव में दहशत है। यहां छह आशियाने पहले ही बह चुके हैं। ऐसे में रामनगर, सिरौलीगौसपुर व रामसनेहीघाट तहसील क्षेत्र केे करीब 50 गांवों में बाढ़ का खतरा फिर मंडरा गया है। प्रशासन ने अलर्ट जारी करते हुए कंट्रोल रूम से लेकर नदी किनारे गांवों की निगरानी तेज कर दी है।
हेमतापुर के ग्रामीण राजाराम ने बताया कि करीब एक महीने से सरयू कटान कर रही है। करीब 18 दिन पहले नदी करीब 30 घर, दूरसंचार केंद्र और एक मंदिर को बहा ले गई थी। एक सप्ताह में जलस्तर घटने और कटान धीमी होने से ग्रामीणों ने राहत की सांस ली थी।
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20 सितंबर के बाद जलस्तर खतरे के निशान से करीब 98 सेमी नीचे तक पहुंच गया था, लेकिन शनिवार से नदी ने फिर रुख बदल दिया। रविवार को हेतमापुर में राजाराम, श्रीराम, शोभाराम चौहान, मुस्ताक, विनोद, मैकू, संतोष, उत्तम, शिवनरायण, जगदीश, इब्र्राहिम, अमीन, बड़कऊ, महेेंद्र, शोभाराम वर्मा, अहमद अली सहित 14 मकान नदी की चपेट में आ गए।
कुछ मकान नदी में समा गए तो कुछ कटे किनारे पर लटक गए हैं। कई परिवार मकानों की ईंटें निकालकर सुरक्षित स्थान पर पहुंचाने में जुटे रहे। कटान से पशु चिकित्सालय भी सुरक्षित नहीं रहा। उसकी बाउंड्रीवाल नदी में बह चुकी है और भवन भी कटान के मुहाने पर पहुंच गया है।
एडीएम निरंकार सिंह, बाढ़ खंड के अधिकारी शशिकांत सिंह और एसडीएम रामनगर आकांक्षा गुप्ता समेत अधिकारी रविवार को मौके पर पहुंचे। एडीएम ने बताया कि प्रशासनिक टीम मौके पर है। बाबा नारायण दास धाम को बचाने के प्रयास किए जा रहे हैं।
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नदी के दूसरे छोर पर बसे पूरनपुर गांव में दहशत है। यहां छह आशियाने पहले ही बह चुके हैं। ऐसे में रामनगर, सिरौलीगौसपुर व रामसनेहीघाट तहसील क्षेत्र केे करीब 50 गांवों में बाढ़ का खतरा फिर मंडरा गया है। प्रशासन ने अलर्ट जारी करते हुए कंट्रोल रूम से लेकर नदी किनारे गांवों की निगरानी तेज कर दी है।
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हेमतापुर के ग्रामीण राजाराम ने बताया कि करीब एक महीने से सरयू कटान कर रही है। करीब 18 दिन पहले नदी करीब 30 घर, दूरसंचार केंद्र और एक मंदिर को बहा ले गई थी। एक सप्ताह में जलस्तर घटने और कटान धीमी होने से ग्रामीणों ने राहत की सांस ली थी।
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20 सितंबर के बाद जलस्तर खतरे के निशान से करीब 98 सेमी नीचे तक पहुंच गया था, लेकिन शनिवार से नदी ने फिर रुख बदल दिया। रविवार को हेतमापुर में राजाराम, श्रीराम, शोभाराम चौहान, मुस्ताक, विनोद, मैकू, संतोष, उत्तम, शिवनरायण, जगदीश, इब्र्राहिम, अमीन, बड़कऊ, महेेंद्र, शोभाराम वर्मा, अहमद अली सहित 14 मकान नदी की चपेट में आ गए।
कुछ मकान नदी में समा गए तो कुछ कटे किनारे पर लटक गए हैं। कई परिवार मकानों की ईंटें निकालकर सुरक्षित स्थान पर पहुंचाने में जुटे रहे। कटान से पशु चिकित्सालय भी सुरक्षित नहीं रहा। उसकी बाउंड्रीवाल नदी में बह चुकी है और भवन भी कटान के मुहाने पर पहुंच गया है।
एडीएम निरंकार सिंह, बाढ़ खंड के अधिकारी शशिकांत सिंह और एसडीएम रामनगर आकांक्षा गुप्ता समेत अधिकारी रविवार को मौके पर पहुंचे। एडीएम ने बताया कि प्रशासनिक टीम मौके पर है। बाबा नारायण दास धाम को बचाने के प्रयास किए जा रहे हैं।