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डॉक्टरों की कमी से जूझ रहे अस्पताल
अमर उजाला ब्यूरो/बाराबंकी
Updated Sat, 14 May 2016 11:37 PM IST
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जिले में डॉक्टरों की कमी से मरीजों को इसका लाभ नहीं मिल पा रहा है। जिसकी वजह है कि एक तो चिकित्सक तैनाती स्थल पर नहीं रुकते और जो रुकते भी वह मरीजों को देखते नहीं। जिससे जिला अस्पताल पर इसका दबाव पड़ता है। लेकिन चिकित्सक सुधरने का नाम नहीं ले रहे हैं। यदि किसी चिकित्सक के खिलाफ कार्रवाई होती है तो संघ के पदाधिकारी इसका विरोध करते हुए दबाव बनाने लगते हैं।
जिले में 17 सामुदायिक और 5 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र हैं। इन पर 214 चिकित्सकों के सापेक्ष 197 चिकित्सकों की तैनाती है। मरीज अक्सर आरोप लगाते हैं कि एक तो चिकित्सक तैनाती स्थल पर रुकते नहीं हैं और जो रहते हैं वह मरीजों को देखते नहीं बल्कि रेफर कर देते हैं। जिससे जिला अस्पताल पर दबाव बढ़ता जा रहा है।
इसके अलावा इन अस्पतालों में ज्यादातर मरीजों का इलाज वार्ड ब्वॉय या फिर फार्मासिस्ट ही करते हैं। यदि ऐसे डॉक्टरों के खिलाफ स्वास्थ्य विभाग कार्रवाई करता है तो संघ के पदाधिकारी कार्रवाई न करने का विरोध करते हुए दबाव बनाने लगते हैं। जिले में डॉक्टरों की कमी के चलते मरीजों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
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वहीं डॉक्टरों के रात्रि निवास न करने पर मरीजों को काफी दिक्कतें होती हैं। कई अस्पतालों में फार्मासिस्ट ही मरीजों को देखते हैं। जिससे कई बार अनहोनी हो जाती है। विभागीय अफसरों की उदासीनता से जिले के लोगों में काफी आक्रोश व्याप्त है।
जिले में 17 सामुदायिक और 5 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र हैं। इन पर 214 चिकित्सकों की तैनाती होनी चाहिए लेकिन 197 चिकित्सकों की तैनाती इन अस्पतालों में हैं। अस्पतालों में पर्याप्त संसाधन हैं इसके बाद भी यदि चिकित्सक मरीजों को सुविधा नहीं दे रहे हैं तो गलत है इसकी जांच कराई जाएगी।
- डॉ. सतीश चन्द्रा, प्रभारी सीएमओ
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जिले में 17 सामुदायिक और 5 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र हैं। इन पर 214 चिकित्सकों के सापेक्ष 197 चिकित्सकों की तैनाती है। मरीज अक्सर आरोप लगाते हैं कि एक तो चिकित्सक तैनाती स्थल पर रुकते नहीं हैं और जो रहते हैं वह मरीजों को देखते नहीं बल्कि रेफर कर देते हैं। जिससे जिला अस्पताल पर दबाव बढ़ता जा रहा है।
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इसके अलावा इन अस्पतालों में ज्यादातर मरीजों का इलाज वार्ड ब्वॉय या फिर फार्मासिस्ट ही करते हैं। यदि ऐसे डॉक्टरों के खिलाफ स्वास्थ्य विभाग कार्रवाई करता है तो संघ के पदाधिकारी कार्रवाई न करने का विरोध करते हुए दबाव बनाने लगते हैं। जिले में डॉक्टरों की कमी के चलते मरीजों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
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वहीं डॉक्टरों के रात्रि निवास न करने पर मरीजों को काफी दिक्कतें होती हैं। कई अस्पतालों में फार्मासिस्ट ही मरीजों को देखते हैं। जिससे कई बार अनहोनी हो जाती है। विभागीय अफसरों की उदासीनता से जिले के लोगों में काफी आक्रोश व्याप्त है।
जिले में 17 सामुदायिक और 5 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र हैं। इन पर 214 चिकित्सकों की तैनाती होनी चाहिए लेकिन 197 चिकित्सकों की तैनाती इन अस्पतालों में हैं। अस्पतालों में पर्याप्त संसाधन हैं इसके बाद भी यदि चिकित्सक मरीजों को सुविधा नहीं दे रहे हैं तो गलत है इसकी जांच कराई जाएगी।
- डॉ. सतीश चन्द्रा, प्रभारी सीएमओ