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कटान में बह गए कंचनापुर गांव के चार मकान  

Mon, 27 Aug 2018 10:46 PM IST
Amarujala
Amarujala Updated Mon, 27 Aug 2018 10:46 PM IST
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Four houses drowned in flood
लोगों को परेशानी - फोटो : Amarujala

एक माह से घाघरा का जलस्तर खतरे के निशान से ऊपर है। 24 घंटे के भीतर 5 लाख 86 हजार क्यूसेक पानी नेपाल से छोड़े जाने के बाद घाघरा अब तक सबसे अधिक खतरे के निशान से 85 सेेमी ऊपर बह रही है। इसका असर जिले की तीन विधानसभा क्षेत्र के दर्जनों गांवों की करीब एक लाख की आबादी बेघर हो गई है। हालात दिनों दिन बिगड़ते जा रहे हैं। प्रशासन का दावा और सहायता ऊंट के मुंह का जीरा साबित हो रही है।

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एक माह में कहीं एक बार तो कहीं दो बार ही राहत सामग्री तो दी गई है। तराई में लगातार हो रही बारिश से तटबंध पर पन्नी के भीतर या घरों की छतों पर जीवन यापन करने वाले बाढ़ पीड़ितों को एक जून की रोटी भी ठीक से नसीब नहीं है। वहीं सूरतगंज क्षेत्र के कंचनापुर गांव के निकट नदी तेजी से कटान कर रही है जिसमें चार बाढ़ पीड़ितों के मकान नदी में बह गए।
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जिले की रामनगर, सिरौलीगौसपुर और रामसनेहीघाट तहसील के छोटे-बड़े करीब 75 गांवों की एक लाख से अधिक आबादी पिछले  27 जुलाई से बाढ़ की चपेट में है।

नेपाल से पानी छोड़े जाने पर भले ही घाघरा का जलस्तर घट बढ़ रहा हो किंतु एक माह से घाघरा का जलस्तर खतरे के निशान से नीचे नहीं आया। इसी गंभीरता को लेते हुए मुख्यमंत्री भी हवाई सर्वे और बाढ़ पीड़ितों को राहत सामग्री देने आ चुके हैं। डीएम से लेकर सभी तहसीलों के एसडीएम अपने मातहतों के साथ बाढ़ चौकियों का जायजा लेते हैं। दो प्लाटून फ्लड की पीएसी नावों और मोटरबोट से बाढ़ पीड़ितों को बाहर निकालने व रेसक्यू के लिए लगी हुई हैं।
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पिछले 24 घंटे के भीतर बैराज से छोड़े गए नेपाल के पानी से तराई के हालात अब बेकाबू हो गए हैं। पहली बार खतरे के निशान से 85 सेमी ऊपर जलस्तर पहुंच गया है। इस सीजन का अब तक का सबसे ज्यादा बताया जा रहा है। प्रशासन भी एलर्ट घोषित कर दिया क्योंकि छोड़े गए पानी का असर अभी और हालात बिगाड़ेगा। वहीं कंचनापुर गांव के पास नदी का पानी तेजी से कटान करा रही है। इसमें गांव के मो.फारूख,  मो.कलाम, मो.रफीक, मो.जुबेर के आशियाने नदी की कटान में समा गए हैं।            

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