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घाघरा फिर उफनाई, सहमा तराई
Amarujala
Updated Sun, 12 Aug 2018 10:24 PM IST
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लोगों को परेशानी
- फोटो : Amarujala
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नेपाल द्वारा घाघरा में पौने दो लाख क्यूसेक पानी छोड़ जाने के बाद तराई के हालात फिर से बिगड़ जाएंगे इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता है। जानकारी के बाद प्रशासनिक अमला सतर्क हो गया है और बाढ़ चौकियों पर तैनात राजस्व कर्मियों को मुस्तैद रहने के आदेश दिए गए हैं। नदी का पानी अभी भी खतरे के निशान से ऊपर बह रहा है। वहीं तराईवासी भी किसी भी स्थिति से निपटने को तैयार हैं लेकिन रुक-रुककर हो रही बारिश बंधे पर बसे लोगों के किए मुसीबत बनती जा रही है।
एल्गिन चरसड़ी, अलीमऊ रानीमऊ और हेतमापुर तटबंधों पर बसे बाढ़ पीड़ितों के लिए रुक-रुककर हो रही बारिश मुसीबत बनती जा रही है। बाढ़ पीड़ितों के सामने दो वक्त की रोटी और मवेशियों के लिए चारा जुटा पाना खासा मुश्किल हो रहा है। तटबंध पर रहने वाले रामप्रसाद, गयादीन, महेश आदि बताते हैं कि गांवों से नदी का पानी कम हो गया था और हम लोग वापसी की तैयारी में लगे थे कि नेपाल द्वारा बार-बार पानी छोड़ देने से हालात बिगड़ जाते हैं और गांवों को वापसी नहीं हो पाती है।
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सिरौलीगौसपुर। नदी का जलस्तर धीरे धीरे घट रहा है लेकिन संक्रामक रोग पांव पसारने लगे हैं। जानकारी पर बाढ़ पीड़ित क्षेत्रों में पहुंचकर डॉक्टरों की टीम ने बाढ़ पीड़ितों में संक्रामक बीमारियों की दवाओं का वितरण किया। उप जिलाधिकारी अजय कुमार द्विवेदी ने बताया कि नदी का जलस्तर खतरे के निशान से मात्र 7 सेंमी ऊपर है। नदी का पानी कम होने पर संक्रामक बीमारियों के फैलने की संभावना पैदा हो जाती है इसी को ध्यान में रखते हुए सनावा, कोठरी गौरिया, परसावल में मेडिकल कैंप लगाकर दवाओं का वितरण कराया जा रहा है। सीएचसी टिकैतनगर, सिरौलीगौसपुर एवं रामनगर के डॉक्टर बराबर बाढ़ पीड़ितों में दवाओं के वितरण में लगे हुए हैं।
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