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घाघरा ने तेज की कटान, पानी में बह गये पांच मकान
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बाराबंकी। घाघरा नदी में पानी बढ़ने के साथ तराई क्षेत्र में कटान शुरू हो गई। टेपरा गांव के पांच मकान नदी की धारा में समा चुके हैं। एक दर्जन मकान कटान के मुहाने पर आ गए हैं। हालात को देखते नदी के किनारे आबाद लोग चिंतित हैं। उन्होंने सुरक्षित स्थानों की ओर पलायन शुरू कर दिया है। उधर कटान को रोकने के लिए आबादी के पास नदी में ईंटों से भरी बोरियां लगाई जा रही हैं। नदी में उफान को देखते हुए प्रशासन के यह प्रयास नाकाफी साबित हो रहे हैं।
सिरौलीगौसपुर तहसील क्षेत्र की तलहटी में आबाद टेपरा गांव घाघरा नदी की चपेट में आ गया है। गांव के गुरु प्रसाद, सोहनलाल, रामबख्श, जगदीश और लाल बहादुर के मकान नदी के पानी में समा चुके हैं। इन परिवारों के लोग सुरक्षित स्थानों की तलाश में पलायन करने को मजबूर हो गए हैं। इसके अलावा गांव के राकेश कुमार, कलावती, सोहन, गोकरन, रामसुरेश, राजिंदर, पुत्तीलाल, रामभजन, संदीप, अमरेश आदि के एक दर्जन मकान नदी के निशाने पर हैं। यह मकानों के किसी भी समय नदी की धारा में समाने का खतरा बना है। इस डर से लोग सुरक्षित स्थानों की तलाश में लग गए हैं। इसके अलावा एक दर्जन लोगों की खेत भी नदी की धारा में बह चुके हैं। खेतों में खड़ी फसल भी तबाह हो गई। इससे कई परिवारों के सामने दो वक्त की रोटी का संकट खड़ा हो गया है।
उधर जिला प्रशासन नदी में कटान रोकने के दावे कर रहा है। कटान को रोकने केे लिए ईंटों से भरी बोरियां लगाई जा रही हैं लेकिन पानी के उफान को देखते हुए यह प्रयास नाकाफी साबित हो रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि मकान के साथ गृहस्थी का सारा सामान भी नदी की धारा में समा गया है। अब उनके सामने सुरक्षित स्थानों पर जाने के अलावा कोई रास्ता नहीं बचा है। नदी में पानी बढ़ने के साथ पूरे गांव के लोग डरे हैं।
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कटान रोकने के हो रहे इंतजाम
घाघरा नदी का पानी टेपरा गांव के पास तेजी से कटान कर रहा है। कटान को रोकने के लिए बाढ़ खंड के अधिकारियों को निर्देश भी दिए गए हैं। कर्मचारी मौके पर मुस्तैद हैं। कटान को रोकने के लिए ईंटों से भरी बोरियां लगाई गई हैं।
-अशोक कुमार, एसडीएम
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सिरौलीगौसपुर तहसील क्षेत्र की तलहटी में आबाद टेपरा गांव घाघरा नदी की चपेट में आ गया है। गांव के गुरु प्रसाद, सोहनलाल, रामबख्श, जगदीश और लाल बहादुर के मकान नदी के पानी में समा चुके हैं। इन परिवारों के लोग सुरक्षित स्थानों की तलाश में पलायन करने को मजबूर हो गए हैं। इसके अलावा गांव के राकेश कुमार, कलावती, सोहन, गोकरन, रामसुरेश, राजिंदर, पुत्तीलाल, रामभजन, संदीप, अमरेश आदि के एक दर्जन मकान नदी के निशाने पर हैं। यह मकानों के किसी भी समय नदी की धारा में समाने का खतरा बना है। इस डर से लोग सुरक्षित स्थानों की तलाश में लग गए हैं। इसके अलावा एक दर्जन लोगों की खेत भी नदी की धारा में बह चुके हैं। खेतों में खड़ी फसल भी तबाह हो गई। इससे कई परिवारों के सामने दो वक्त की रोटी का संकट खड़ा हो गया है।
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उधर जिला प्रशासन नदी में कटान रोकने के दावे कर रहा है। कटान को रोकने केे लिए ईंटों से भरी बोरियां लगाई जा रही हैं लेकिन पानी के उफान को देखते हुए यह प्रयास नाकाफी साबित हो रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि मकान के साथ गृहस्थी का सारा सामान भी नदी की धारा में समा गया है। अब उनके सामने सुरक्षित स्थानों पर जाने के अलावा कोई रास्ता नहीं बचा है। नदी में पानी बढ़ने के साथ पूरे गांव के लोग डरे हैं।
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कटान रोकने के हो रहे इंतजाम
घाघरा नदी का पानी टेपरा गांव के पास तेजी से कटान कर रहा है। कटान को रोकने के लिए बाढ़ खंड के अधिकारियों को निर्देश भी दिए गए हैं। कर्मचारी मौके पर मुस्तैद हैं। कटान को रोकने के लिए ईंटों से भरी बोरियां लगाई गई हैं।
-अशोक कुमार, एसडीएम