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पहले बेड का अकाल, अब खाली हो रहे अस्पताल
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बाराबंकी। कोरोना को लेकर जिले के लोगों के लिए एक राहत भरी खबर है। अगस्त से लेकर सितंबर तक जिस तेजी से मरीज मिल रहे थे, उससे लोगों में दहशत का माहौल था। अस्पतालों में बेड का संकट खड़ा होने लगा था लेकिन रिकवरी दर 92 प्रतिशत के आसपास पहुंच जाने से कोविड अस्पताल अब खाली होने लगे हैं। इनमें गिनती के ही कोरोना पॉजिटिव मरीज बचे हैं। इससे ज्यादातर अस्पतालों ने अब ओपीडी के मरीजों को भर्ती कराना शुुरू कर दिया है।
जिले में कोरोना का पहला मरीज 4 अप्रैल को सिरौलीगौसपुर के मेलारायगंज में मिला था। इसके बाद दूसरा मरीज 2 मई को सिद्धौर कस्बे में मिला था। फिर तो कोरोना मरीजों के मिलने का जो सिलसिला शुरू हुआ वह अभी थमा तो नहीं लेकिन बहुत कम हो गया है। पहले औसतन सौ से डेढ़ सौ मरीज रोज मिल रहे थे।
मरीजों की बढ़ती संख्या को देखते हुए प्रशासन द्वारा जिले के एल-1 सिरौलीगौसपुर और चंद्रा हास्पिटल, एल-2 हिंद अस्पताल और एल-3 मेयो अस्पताल को कोरोना मरीजों के लिए अधिग्रहीत किया गया था लेकिन 17 सितंबर से मरीजों की तादाद में भारी गिरावट आई। जो अब 10 से 25 मरीज प्रतिदिन के आसपास रह गई है और रिकवरी दर 92 के आसपास पहुंच गई है।
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ऐसी दशा में ये अस्पताल अब पूरी तरह से खाली हो गए हैं। इनमें जहां सौ से सवा सौ मरीज प्रतिदिन रहते थे, वहीं अब नाममात्र के महज 13 मरीज ही भर्ती हैं। मरीजों की संख्या न के बराबर पहुंच जाने की वजह से ज्यादातर अस्पताल अब ओपीडी मरीजों को भर्ती करने लगे हैं। कोरोना मरीजों की संख्या में आई गिरावट जिले के लोगों के लिए बड़ी राहत भरी खबर है।
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार 15 जुलाई के बाद से कोरोना मरीजों की संख्या बढ़ने के बाद से कोविड अस्पतालों में भी मरीजों की संख्या बढ़ने लगी। एल-1 अस्पतालों में जहां 75 से 80 मरीज प्रतिदिन हो जाते थे वहीं एल-2 में 50 से 60 और एल-3 में आठ से दस मरीज प्रतिदिन भर्ती रहते थे लेकिन 17 सितंबर के बाद से जहां मरीजों के मिलने की संख्या में कमी आई है, वहीं अस्पतालों में मरीज घटने लगे हैं। मौजूदा समय में इन अस्पतालों में जहां 13 मरीज भर्ती हैं, वहीं 155 मरीज अभी भी होम आइसोलेशन में हैं।
कोरोना जांच टीम के नोडल अधिकारी डॉ. राजीव सिंह ने बताया कि कोरोना जांच टीम के नोडल अधिकारी डॉ. राजीव सिंह के अनुसार पहले हम चार से पांच सौ जांचें प्रतिदिन करते थे तब मरीजों की संख्या 40 से 50 के आसपास थी। फिर यह दायरा सात-आठ सौ तक पहुंच गया तब कोरोना के 70 से 80 मरीज मिल रहे थे। आज जब हम 21 सौ जांचें प्रतिदिन कर रहें है तो प्रतिदिन दस, 15 और 25 मरीज मिल रहे हैं। जांचों में तेजी आने के साथ ही कोरोना मरीजों की संख्या में तेजी से गिरावट आई है जो जिले के लोगों के लिए किसी राहत से कम नहीं है।
कोविड-19 के नोडल अधिकारी डॉ. केएनएम त्रिपाठी बताते हैं कि संक्रमितों की संख्या में आई गिरावट का मतलब ये नहीं है कि हमें कोरोना के प्रति लापरवाह हो जाना है बल्कि ऐसा सोचना भी पूरी तरह से गलत होगा क्योंकि जरा सी लापरवाही हम सभी पर भारी पड़ सकती है। इसलिए अभी हमें कोरोना को लेकर पूरी तरह से गंभीर रहना है और मास्क पहनने के साथ ही सोशल डिस्टेंसिंग का हरहाल में पालन करना होगा।
सीएमओ डॉ. बीकेएस चौहान ने बताया कि कोरोना मरीजों की बढ़ती संख्या को देखते हुए हमने ज्यादा से ज्यादा जांचें करानी शुरू कर दीं जिसका नतीजा आज सामने है। जहां पहले सौ से डेढ़ सौ मरीज मिल रहे थे, वहीं यह संख्या अब घटकर अब 10 से 25 मरीज प्रतिदिन के आसपास पहुंच गई है। फिर भी हमें किसी प्रकार की लापरवाही न बरतते हुए प्रोटोकॉल का पूरी तरह से पालन करना है।
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जिले में कोरोना का पहला मरीज 4 अप्रैल को सिरौलीगौसपुर के मेलारायगंज में मिला था। इसके बाद दूसरा मरीज 2 मई को सिद्धौर कस्बे में मिला था। फिर तो कोरोना मरीजों के मिलने का जो सिलसिला शुरू हुआ वह अभी थमा तो नहीं लेकिन बहुत कम हो गया है। पहले औसतन सौ से डेढ़ सौ मरीज रोज मिल रहे थे।
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मरीजों की बढ़ती संख्या को देखते हुए प्रशासन द्वारा जिले के एल-1 सिरौलीगौसपुर और चंद्रा हास्पिटल, एल-2 हिंद अस्पताल और एल-3 मेयो अस्पताल को कोरोना मरीजों के लिए अधिग्रहीत किया गया था लेकिन 17 सितंबर से मरीजों की तादाद में भारी गिरावट आई। जो अब 10 से 25 मरीज प्रतिदिन के आसपास रह गई है और रिकवरी दर 92 के आसपास पहुंच गई है।
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ऐसी दशा में ये अस्पताल अब पूरी तरह से खाली हो गए हैं। इनमें जहां सौ से सवा सौ मरीज प्रतिदिन रहते थे, वहीं अब नाममात्र के महज 13 मरीज ही भर्ती हैं। मरीजों की संख्या न के बराबर पहुंच जाने की वजह से ज्यादातर अस्पताल अब ओपीडी मरीजों को भर्ती करने लगे हैं। कोरोना मरीजों की संख्या में आई गिरावट जिले के लोगों के लिए बड़ी राहत भरी खबर है।
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार 15 जुलाई के बाद से कोरोना मरीजों की संख्या बढ़ने के बाद से कोविड अस्पतालों में भी मरीजों की संख्या बढ़ने लगी। एल-1 अस्पतालों में जहां 75 से 80 मरीज प्रतिदिन हो जाते थे वहीं एल-2 में 50 से 60 और एल-3 में आठ से दस मरीज प्रतिदिन भर्ती रहते थे लेकिन 17 सितंबर के बाद से जहां मरीजों के मिलने की संख्या में कमी आई है, वहीं अस्पतालों में मरीज घटने लगे हैं। मौजूदा समय में इन अस्पतालों में जहां 13 मरीज भर्ती हैं, वहीं 155 मरीज अभी भी होम आइसोलेशन में हैं।
कोरोना जांच टीम के नोडल अधिकारी डॉ. राजीव सिंह ने बताया कि कोरोना जांच टीम के नोडल अधिकारी डॉ. राजीव सिंह के अनुसार पहले हम चार से पांच सौ जांचें प्रतिदिन करते थे तब मरीजों की संख्या 40 से 50 के आसपास थी। फिर यह दायरा सात-आठ सौ तक पहुंच गया तब कोरोना के 70 से 80 मरीज मिल रहे थे। आज जब हम 21 सौ जांचें प्रतिदिन कर रहें है तो प्रतिदिन दस, 15 और 25 मरीज मिल रहे हैं। जांचों में तेजी आने के साथ ही कोरोना मरीजों की संख्या में तेजी से गिरावट आई है जो जिले के लोगों के लिए किसी राहत से कम नहीं है।
कोविड-19 के नोडल अधिकारी डॉ. केएनएम त्रिपाठी बताते हैं कि संक्रमितों की संख्या में आई गिरावट का मतलब ये नहीं है कि हमें कोरोना के प्रति लापरवाह हो जाना है बल्कि ऐसा सोचना भी पूरी तरह से गलत होगा क्योंकि जरा सी लापरवाही हम सभी पर भारी पड़ सकती है। इसलिए अभी हमें कोरोना को लेकर पूरी तरह से गंभीर रहना है और मास्क पहनने के साथ ही सोशल डिस्टेंसिंग का हरहाल में पालन करना होगा।
सीएमओ डॉ. बीकेएस चौहान ने बताया कि कोरोना मरीजों की बढ़ती संख्या को देखते हुए हमने ज्यादा से ज्यादा जांचें करानी शुरू कर दीं जिसका नतीजा आज सामने है। जहां पहले सौ से डेढ़ सौ मरीज मिल रहे थे, वहीं यह संख्या अब घटकर अब 10 से 25 मरीज प्रतिदिन के आसपास पहुंच गई है। फिर भी हमें किसी प्रकार की लापरवाही न बरतते हुए प्रोटोकॉल का पूरी तरह से पालन करना है।