फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Barabanki News ›   First there was shortage of beds, now the hospital is empty

पहले बेड का अकाल, अब खाली हो रहे अस्पताल

Thu, 22 Oct 2020 12:21 AM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Thu, 22 Oct 2020 12:21 AM IST
विज्ञापन
First there was shortage of beds, now the hospital is empty
बाराबंकी। कोरोना को लेकर जिले के लोगों के लिए एक राहत भरी खबर है। अगस्त से लेकर सितंबर तक जिस तेजी से मरीज मिल रहे थे, उससे लोगों में दहशत का माहौल था। अस्पतालों में बेड का संकट खड़ा होने लगा था लेकिन रिकवरी दर 92 प्रतिशत के आसपास पहुंच जाने से कोविड अस्पताल अब खाली होने लगे हैं। इनमें गिनती के ही कोरोना पॉजिटिव मरीज बचे हैं। इससे ज्यादातर अस्पतालों ने अब ओपीडी के मरीजों को भर्ती कराना शुुरू कर दिया है।
विज्ञापन

जिले में कोरोना का पहला मरीज 4 अप्रैल को सिरौलीगौसपुर के मेलारायगंज में मिला था। इसके बाद दूसरा मरीज 2 मई को सिद्धौर कस्बे में मिला था। फिर तो कोरोना मरीजों के मिलने का जो सिलसिला शुरू हुआ वह अभी थमा तो नहीं लेकिन बहुत कम हो गया है। पहले औसतन सौ से डेढ़ सौ मरीज रोज मिल रहे थे।
विज्ञापन

मरीजों की बढ़ती संख्या को देखते हुए प्रशासन द्वारा जिले के एल-1 सिरौलीगौसपुर और चंद्रा हास्पिटल, एल-2 हिंद अस्पताल और एल-3 मेयो अस्पताल को कोरोना मरीजों के लिए अधिग्रहीत किया गया था लेकिन 17 सितंबर से मरीजों की तादाद में भारी गिरावट आई। जो अब 10 से 25 मरीज प्रतिदिन के आसपास रह गई है और रिकवरी दर 92 के आसपास पहुंच गई है।
विज्ञापन
विज्ञापन

ऐसी दशा में ये अस्पताल अब पूरी तरह से खाली हो गए हैं। इनमें जहां सौ से सवा सौ मरीज प्रतिदिन रहते थे, वहीं अब नाममात्र के महज 13 मरीज ही भर्ती हैं। मरीजों की संख्या न के बराबर पहुंच जाने की वजह से ज्यादातर अस्पताल अब ओपीडी मरीजों को भर्ती करने लगे हैं। कोरोना मरीजों की संख्या में आई गिरावट जिले के लोगों के लिए बड़ी राहत भरी खबर है।
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार 15 जुलाई के बाद से कोरोना मरीजों की संख्या बढ़ने के बाद से कोविड अस्पतालों में भी मरीजों की संख्या बढ़ने लगी। एल-1 अस्पतालों में जहां 75 से 80 मरीज प्रतिदिन हो जाते थे वहीं एल-2 में 50 से 60 और एल-3 में आठ से दस मरीज प्रतिदिन भर्ती रहते थे लेकिन 17 सितंबर के बाद से जहां मरीजों के मिलने की संख्या में कमी आई है, वहीं अस्पतालों में मरीज घटने लगे हैं। मौजूदा समय में इन अस्पतालों में जहां 13 मरीज भर्ती हैं, वहीं 155 मरीज अभी भी होम आइसोलेशन में हैं।
कोरोना जांच टीम के नोडल अधिकारी डॉ. राजीव सिंह ने बताया कि कोरोना जांच टीम के नोडल अधिकारी डॉ. राजीव सिंह के अनुसार पहले हम चार से पांच सौ जांचें प्रतिदिन करते थे तब मरीजों की संख्या 40 से 50 के आसपास थी। फिर यह दायरा सात-आठ सौ तक पहुंच गया तब कोरोना के 70 से 80 मरीज मिल रहे थे। आज जब हम 21 सौ जांचें प्रतिदिन कर रहें है तो प्रतिदिन दस, 15 और 25 मरीज मिल रहे हैं। जांचों में तेजी आने के साथ ही कोरोना मरीजों की संख्या में तेजी से गिरावट आई है जो जिले के लोगों के लिए किसी राहत से कम नहीं है।
कोविड-19 के नोडल अधिकारी डॉ. केएनएम त्रिपाठी बताते हैं कि संक्रमितों की संख्या में आई गिरावट का मतलब ये नहीं है कि हमें कोरोना के प्रति लापरवाह हो जाना है बल्कि ऐसा सोचना भी पूरी तरह से गलत होगा क्योंकि जरा सी लापरवाही हम सभी पर भारी पड़ सकती है। इसलिए अभी हमें कोरोना को लेकर पूरी तरह से गंभीर रहना है और मास्क पहनने के साथ ही सोशल डिस्टेंसिंग का हरहाल में पालन करना होगा।

सीएमओ डॉ. बीकेएस चौहान ने बताया कि कोरोना मरीजों की बढ़ती संख्या को देखते हुए हमने ज्यादा से ज्यादा जांचें करानी शुरू कर दीं जिसका नतीजा आज सामने है। जहां पहले सौ से डेढ़ सौ मरीज मिल रहे थे, वहीं यह संख्या अब घटकर अब 10 से 25 मरीज प्रतिदिन के आसपास पहुंच गई है। फिर भी हमें किसी प्रकार की लापरवाही न बरतते हुए प्रोटोकॉल का पूरी तरह से पालन करना है।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed