फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Barabanki News ›   ex minister's daughter in law defeated

पूर्व मंत्री के गढ़ में हारी उनकी बहू

Mon, 02 Nov 2015 12:08 AM IST
बाराबंकी/अमर उजाला ब्यूरो
बाराबंकी/अमर उजाला ब्यूरो Updated Mon, 02 Nov 2015 12:08 AM IST
विज्ञापन
पंचायत चुनाव-2016 में बीडीसी प्रत्याशियों के चुनाव परिणाम चौंकाने वाले रहे। परिणाम घोषित होने पर कई दिग्गजों को मुंह की खानी पड़ी। विकास खंड देवा की पंचायत कंजवारा में सत्ता दल के पूर्व राज्य मंत्री के गढ़ में उनकी बहू हारी तो त्रिवेदीगंज में पूर्व एमएलसी व पूर्व ब्लॉक प्रमुख अपनी ही इज्जत नहीं बचा सके। इनके बेटे अखैयापुर पंचायत से तो भतीजा बड़वल पंचायत से हार गए। बेटे व भतीजे को जिताने की कोशिश में जनसंपर्क के दौरान पूर्व एमएलसी की तबियत भी खराब हो गई थी।
विज्ञापन



विकास खंड देवा के जीजीआईसी में हुई बीडीसी पद की मतगणना के बाद ने सपा के गढ़ में ही उसका मिथक टूट गया। सपा सरकार के पूर्व राज्य मंत्री ग्राम गोपालपुर निवासी छोटेलाल यादव का गढ़ माने जाने वाले देवा क्षेत्र में ही इनकी बहू स्नेहलता यादव बीडीसी पद का चुनाव हार गई हैं। उन्हें इसरहना के अजीत प्रताप सिंह ने 270 वोटों के भारी अंतर से हराया। स्नेहलता यादव ग्राम पंचायत कंजवारा से प्रत्याशी थीं। लोगों को उम्मीद थी कि पूर्व मंत्री छोटेलाल यादव के गढ़ उनकी बहू को हराना नामुमकिन है लेकिन जब रविवार को मतगणना हुई तो परिणाम चौंकाने वाले रहे। कुछ ऐसे ही परिणाम त्रिवेदीगंज में देखने को मिले।
विज्ञापन



त्रिवेदीगंज के ग्राम मंगलपुर के पूर्व एमएलसी व पूर्व ब्लॉक प्रमुुख रामपाल वर्मा के बेटे राजेश वर्मा अखैयापुर पंचायत से बीडीसी का चुनाव लड़ रहे थे लेकिन वह दौड़ में रहे ही नहीं। चुनाव परिणाम में वह तीसरे स्थान पर रहे। राजेश वर्मा को कुल 229 वोट मिले। इन्हें मो. नईन ने हराया। नईम को 498 वोट मिले जबकि दूसरे स्थान पर मो. सगीर रहे।
विज्ञापन
विज्ञापन



सगीर को कुल 340 वोट मिले। पूर्व एमएलसी रामपाल वर्मा के भतीजे विजय वर्मा ग्राम पंचायत बड़वल से मैदान में थे। उन्हें कुल 352 वोट मिले। सैय्यद शेखावत ने उन्हें 23 मतों के अंतर से हराया। सैय्यद शेखावत  को 375 वोट मिले। रामपाल वर्मा सपा से पूर्व एमएलसी रहे और दो बार लगातार त्रिवेदीगंज के ब्लॉक प्रमुख  भी रहे।



वह अपने पुत्र को भी ब्लॉक प्रमुख बनाना चाहते थे। इसके लिए उन्होंने दिन रात चुुनाव प्रचार में मेहनत की। जिसके चलते उनकी तबियत भी  खराब हो गई थी। उनका लखनऊ  के सिविल अस्पताल में उपचार कराया गया था लेकिन उनकी मेहनत अपने ही क्षेत्र में बेटे व भतीजे को हार से नहीं बचा सकी।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed