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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Barabanki News ›   form where criminals found factory made cartidges

अपराधियों के पास कहां से मिल रहे फैक्ट्री मेड कारतूस

Sun, 21 Jun 2015 11:15 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो/बाराबंकी
अमर उजाला ब्यूरो/बाराबंकी Updated Sun, 21 Jun 2015 11:15 PM IST
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बाराबंकी। हथियारों से लैस बदमाश आए दिन कोई न कोई वारदात करते हैं। पुलिस इन्हें पकड़ती है। चोरी, लूट, डकैती के माल के साथ बरामद होते हैं अवैध असलहे और कारतूस। बरामद माल के बारे में पड़ताल कर चार्जशीट दाखिल कर दी जाती है, लेकिन असलहे और कारतूस के माध्यम की कोई तफ्तीश नहीं होती। अपराधियों के पास असलहे-कारतूस कहां से आते हैं? कौन करता है इनकी सप्लाई? आमतौर पर तफ्तीश में इसका जिक्र तक नहीं होता। राजधानी में शस्त्र अधिनियम के तहत हर साल करीब दो से तीन सौ मुकदमे दर्ज होते हैं। इन मुकदमों में अवैध बंदूक, रायफल या तमंचे की बरामदगी के होते हैं और ठीक दो गुने कारतूस बरामद किए जाते हैं। हत्या, लूट, डकैती, चोरी या अन्य किसी वारदात में पकड़े जाने वाले अपराधी पर संबंधित घटना के मुकदमे के साथ शस्त्र अधिनियम का भी मुकदमा कायम होता है। खास बात ये है कि पुलिस की तफ्तीश में बरामद माल व अन्य घटनाओं का तो खुलासा होता है। लेकिन असलहों और कारतूसों को पुलिस गंभीरता से नहीं लेती। इस बात की पड़ताल नहीं की जाती कि असलहे और कारतूस अपराधियों को कहां से मिलते हैं। असलहे कौन इनके पास पहुंचा रहा है।

शस्त्र लाइसेंस धारक बेचते हैं कारतूस

एसपी बताते हैं कि आमतौर पर अपराधियों के पास से .12 बोर या .315 बोर के कारतूस बरामद होते हैं। ये गैर प्रतिबंधित बोर हैं। जिले में करीब 43 हजार शस्त्र लाइसेंस धारक और हथियारों की 89 दुकानें हैं। दुकानदार हथियार या कारतूस की बिक्री की रोज रिपोर्ट देते हैं। फैक्ट्री से निकले हथियार और कारतूसों के लाइसेंस धारक तक पहुंचने की पुलिस को पूरी खबर रहती है। गड़बड़ी लाइसेंस धारक के हाथ में पहुंचने के बाद होती है।

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कारतूसों के बड़े ग्राहकों पर नजर

अपराधियों के पास से कारतूसों की बरामदगी को अब गंभीर मानते ह

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