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बारिश से धान की 50 तो दलहनी फसलों का 80 फीसदी तक नुकसान
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बाराबंकी। तीन दिनों तक हुई लगातार बारिश किसानों की मेहनत व लागत से खेेतों में लहलहा रही फसलों के लिए आफत बन गई। इस महंगाई में फसलों के नुकसान से किसानों को लागत निकालना भी आसान नहीं है। क्योंकि जमीनी हकीकत व किसानों की माने तो धान की जहां 50 तो दलहनी उरद व अरहर की 80 फीसदी फसल पूरी तरह से बर्बाद हो गई है।
तेज हवा के साथ हुई बारिश से केला, पपीता, स्ट्रावेरी समेत सब्जी की फसलें काफी प्रभावित हुई हैं। वहीं वैज्ञानिकों का तर्क है कि बारिश के बाद बची हुई फसलों में रोग व कीट लगने की संभावनाएं बढ़ गई है। हालांकि प्रशासन अभी तक फसलों को हुए नुकसान का ब्यौरा नहीं जुटा सका है।
बाराबंकी जिला धान उत्पादन में प्रदेश में अग्रणी है। करीब दो लाख हेक्टेयर क्षेत्रफल में धान की फसल रोपी जाती है। इसके अलावा दलहन-तिलहन, फल व सब्जियों की खेती भी बड़े पैमाने पर की जाती है। मगर, मौसम की मार से किसान काफी परेशान है। गत वर्ष बारिश व ओलावृष्टि से बर्बाद किसानों को इस बार फसल अच्छी होने से नुकसान की भरपाई होने की उम्मीद दिख रही थी।
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इसको लेकर किसान काफी खुश थे। मगर, सितंबर में ही मूसलाधार बारिश से जहां 20 फीसदी धान की फसलों को नुकसान पहुंचाया तो अक्टूबर में तीन दिनों की घनघोर बारिश से धान की 40 से 50 फीसदी फसलों को नुकसान हुआ। क्योंकि धान की कटाई का काम भी शुरू होने से खेत-खलिहान में लगी फसल में पानी भरने से सब बर्बाद हो गया। वहीं तैयार खड़ी फसलें भी खेतों में गिर गईं हैं।
इतना ही नहीं खरीफ में बोई गई उरद व अरहर की फसलों में पानी भरने से करीब 80 फीसदी तक दलहनी फसलों को नुकसान होना बताया जा रहा है। इसके साथ ही तेज हवा के बीच हुई बारिश से गिरी केले व पपीते की फसल भी प्रभावित हुई। खेतों में पानी भरने से लौकी, तरोई व गोभी की पौधे भी बर्बाद हो गए है।
असमय बारिश से आलू, सरसों व गेहूं की बुआई पर भी प्रभाव पड़ेगा। जिन्होंने बुआई कर दी थी उनकी फसल तो बर्बाद हो गई। वहीं जो किसी कारण से नहीं कर सके थे उनकी बुआई अब विलंब से ही हो सकेगी। हालांकि किसान बची हुई फसलों को समेटने में जुटे हैं।
कृषि वैज्ञानिक बोले, बारिश से सभी फसलों को नुकसान
कृषि विज्ञान केंद्र हैदरगढ़ के अध्यक्ष व वरिष्ठ कृषि वैज्ञानिक डॉ. एसके सिंह का कहना है कि असमय बारिश से खेत में खड़ी सभी फसलों को नुकसान हुआ है। धान बाली की अवस्था में था। ऐसे में बारिश से फसल गिर गई है। खेत में अधिक समय तक नमी रहने से उसमें जमाव होने लगा है। जिससे किसानों को काफी नुकसान हैं।
वहीं धान में रोग लगने की संभावना बढ़ी है। अरहर की फसल के गिरने से उपज कम होगी। अरहर की पत्ती लपेटक कीट लगने से फसल को नुकसान होगा। धान देर से कटने पर गेहूं, सरसों व आलू की बुआई में विलंब होगा। उरद व मूंग की फसल भी बारिश से खराब हो रही है।
वहीं सब्जी वैज्ञानिक डॉ. अश्वनी सिंह का कहना है कि गोभी, स्ट्रावेरी की जिन फसलों में पहले सिंचाई की गई थी उसमें नमी बढ़ने से पौधा सूखने के साथ खराब हो रहा है। नर्सरी की पौधों में अर्ध गलन रोग लगने लगा है।
बारिश से फसलों को हुए नुकसान का सर्वे कराया जा रहा है। जिसकी रिपोर्ट तहसील से मिलने के बाद किसानों को हुए नुकसान का मुआवजा दिलाया जाएगा। वहीं रिपोर्ट मिलने में नुकसान के प्रतिशत के बारे में पता चल सकेगा।
-संजीव कुमार उप कृषि निदेशक
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तेज हवा के साथ हुई बारिश से केला, पपीता, स्ट्रावेरी समेत सब्जी की फसलें काफी प्रभावित हुई हैं। वहीं वैज्ञानिकों का तर्क है कि बारिश के बाद बची हुई फसलों में रोग व कीट लगने की संभावनाएं बढ़ गई है। हालांकि प्रशासन अभी तक फसलों को हुए नुकसान का ब्यौरा नहीं जुटा सका है।
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बाराबंकी जिला धान उत्पादन में प्रदेश में अग्रणी है। करीब दो लाख हेक्टेयर क्षेत्रफल में धान की फसल रोपी जाती है। इसके अलावा दलहन-तिलहन, फल व सब्जियों की खेती भी बड़े पैमाने पर की जाती है। मगर, मौसम की मार से किसान काफी परेशान है। गत वर्ष बारिश व ओलावृष्टि से बर्बाद किसानों को इस बार फसल अच्छी होने से नुकसान की भरपाई होने की उम्मीद दिख रही थी।
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इसको लेकर किसान काफी खुश थे। मगर, सितंबर में ही मूसलाधार बारिश से जहां 20 फीसदी धान की फसलों को नुकसान पहुंचाया तो अक्टूबर में तीन दिनों की घनघोर बारिश से धान की 40 से 50 फीसदी फसलों को नुकसान हुआ। क्योंकि धान की कटाई का काम भी शुरू होने से खेत-खलिहान में लगी फसल में पानी भरने से सब बर्बाद हो गया। वहीं तैयार खड़ी फसलें भी खेतों में गिर गईं हैं।
इतना ही नहीं खरीफ में बोई गई उरद व अरहर की फसलों में पानी भरने से करीब 80 फीसदी तक दलहनी फसलों को नुकसान होना बताया जा रहा है। इसके साथ ही तेज हवा के बीच हुई बारिश से गिरी केले व पपीते की फसल भी प्रभावित हुई। खेतों में पानी भरने से लौकी, तरोई व गोभी की पौधे भी बर्बाद हो गए है।
असमय बारिश से आलू, सरसों व गेहूं की बुआई पर भी प्रभाव पड़ेगा। जिन्होंने बुआई कर दी थी उनकी फसल तो बर्बाद हो गई। वहीं जो किसी कारण से नहीं कर सके थे उनकी बुआई अब विलंब से ही हो सकेगी। हालांकि किसान बची हुई फसलों को समेटने में जुटे हैं।
कृषि वैज्ञानिक बोले, बारिश से सभी फसलों को नुकसान
कृषि विज्ञान केंद्र हैदरगढ़ के अध्यक्ष व वरिष्ठ कृषि वैज्ञानिक डॉ. एसके सिंह का कहना है कि असमय बारिश से खेत में खड़ी सभी फसलों को नुकसान हुआ है। धान बाली की अवस्था में था। ऐसे में बारिश से फसल गिर गई है। खेत में अधिक समय तक नमी रहने से उसमें जमाव होने लगा है। जिससे किसानों को काफी नुकसान हैं।
वहीं धान में रोग लगने की संभावना बढ़ी है। अरहर की फसल के गिरने से उपज कम होगी। अरहर की पत्ती लपेटक कीट लगने से फसल को नुकसान होगा। धान देर से कटने पर गेहूं, सरसों व आलू की बुआई में विलंब होगा। उरद व मूंग की फसल भी बारिश से खराब हो रही है।
वहीं सब्जी वैज्ञानिक डॉ. अश्वनी सिंह का कहना है कि गोभी, स्ट्रावेरी की जिन फसलों में पहले सिंचाई की गई थी उसमें नमी बढ़ने से पौधा सूखने के साथ खराब हो रहा है। नर्सरी की पौधों में अर्ध गलन रोग लगने लगा है।
बारिश से फसलों को हुए नुकसान का सर्वे कराया जा रहा है। जिसकी रिपोर्ट तहसील से मिलने के बाद किसानों को हुए नुकसान का मुआवजा दिलाया जाएगा। वहीं रिपोर्ट मिलने में नुकसान के प्रतिशत के बारे में पता चल सकेगा।
-संजीव कुमार उप कृषि निदेशक