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डेंगू ने ली तीन की जान
Barabanki
Updated Tue, 08 Oct 2013 05:38 AM IST
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सिद्धौर/देवां/त्रिवेदीगंज (बाराबंकी)। हिदायतों के बावजूद स्वास्थ्य विभाग ने डेंगू से निपटने के लिए गंभीरता नहीं दिखाई जिसकी वजह से चौबीस घंटे के भीतर एक महिला समेत तीन लोगों की डेंगू की चपेट में आकर मौत हो गई। अकेले देवां कस्बे में ही इस रोग से चार लोग पीड़ित हैं जिनका लखनऊ के निजी अस्पतालों में इलाज चल रहा है। इस संबंध में स्वास्थ्य विभाग को जानकारी ही नहीं है। आमजन की तो बात दूर, सीएचसी त्रिवेदीगंज के प्रभारी चिकित्साधिकारी भी डेंगू की चपेट में आ गए जिन्हें गोमतीनगर के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
सिद्धौर क्षेत्र के दरांवपुर निवासी ननकू रावत का 23 वर्षीय पुत्र लालजी पिछले कई दिनों से बुखार से पीड़ित था। ननकू ने बताया कि पहले निजी डॉक्टरों से इलाज कराया गया। हालत में सुधार नहीं होने पर लखनऊ ले जाकर एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया जहां डॉक्टरों ने डेंगू होने की बात कही थी। सोमवार की भोर उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई। इसी गांव के निवासी परशुराम की 40 वर्षीय पत्नी राजरानी बुखार से पीड़ित थी। परशुराम ने बताया कि करीब चार दिन पूर्व लखनऊ के बलरामपुर अस्पताल में भर्ती कराया गया था। हालत में सुधार नहीं होने पर डॉक्टरों ने जांच कराई तो डेंगू की पुष्टि हुई। इलाज के दौरान रविवार शाम करीब चार बजे उसकी मौत हो गई। त्रिवेदीगंज के बेलहरी निवासी राम इकबाल (42) की डेंगू से सोमवार को लखनऊ में उपचार के दौरान मौत हो गई। मृतक के भाई राजकुमार ने बताया कि दो दिन पूर्व बुखार आने पर सीएचसी त्रिवेदीगंज ले गया था जहां से लखनऊ रेफर कर दिया गया। लखनऊ ले जाकर एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया जहां जांच में डॉक्टरों ने डेंगू की पुष्टि करते हुए उपचार शुरू किया लेकिन सोमवार को दोपहर करीब एक बजे उसने दम तोड़ दिया।
आम आदमी की बात दूर त्रिवेदीगंज सीएचसी प्रभारी डॉ. आशुतोष श्रीवास्तव भी डेंगू की चपेट में आ गए हैं। सीएचसी पर तैनात कर्मचारियों ने बताया कि डॉक्टर साहब को कई दिनों से बुखार आ रहा था। उन्होंने गोमती नगर स्थित एक निजी अस्पताल में जांच कराई तो डेंगू की पुष्टि होने पर डॉक्टरों ने अस्पताल में भर्ती कर लिया है और वहीं इलाज किया जा रहा है।
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सिद्धौर क्षेत्र के दरांवपुर निवासी ननकू रावत का 23 वर्षीय पुत्र लालजी पिछले कई दिनों से बुखार से पीड़ित था। ननकू ने बताया कि पहले निजी डॉक्टरों से इलाज कराया गया। हालत में सुधार नहीं होने पर लखनऊ ले जाकर एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया जहां डॉक्टरों ने डेंगू होने की बात कही थी। सोमवार की भोर उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई। इसी गांव के निवासी परशुराम की 40 वर्षीय पत्नी राजरानी बुखार से पीड़ित थी। परशुराम ने बताया कि करीब चार दिन पूर्व लखनऊ के बलरामपुर अस्पताल में भर्ती कराया गया था। हालत में सुधार नहीं होने पर डॉक्टरों ने जांच कराई तो डेंगू की पुष्टि हुई। इलाज के दौरान रविवार शाम करीब चार बजे उसकी मौत हो गई। त्रिवेदीगंज के बेलहरी निवासी राम इकबाल (42) की डेंगू से सोमवार को लखनऊ में उपचार के दौरान मौत हो गई। मृतक के भाई राजकुमार ने बताया कि दो दिन पूर्व बुखार आने पर सीएचसी त्रिवेदीगंज ले गया था जहां से लखनऊ रेफर कर दिया गया। लखनऊ ले जाकर एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया जहां जांच में डॉक्टरों ने डेंगू की पुष्टि करते हुए उपचार शुरू किया लेकिन सोमवार को दोपहर करीब एक बजे उसने दम तोड़ दिया।
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आम आदमी की बात दूर त्रिवेदीगंज सीएचसी प्रभारी डॉ. आशुतोष श्रीवास्तव भी डेंगू की चपेट में आ गए हैं। सीएचसी पर तैनात कर्मचारियों ने बताया कि डॉक्टर साहब को कई दिनों से बुखार आ रहा था। उन्होंने गोमती नगर स्थित एक निजी अस्पताल में जांच कराई तो डेंगू की पुष्टि होने पर डॉक्टरों ने अस्पताल में भर्ती कर लिया है और वहीं इलाज किया जा रहा है।
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