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खतरे का निशान पार कर तबाही मचाने लगी घाघरा
Updated Sun, 09 Jul 2017 12:19 AM IST
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बाराबंकी। तेजी से बढ़ रही घाघरा का पानी शनिवार की दोपहर दो बजे खतरे के निशान को पार कर गांवों में तबाही माचने लगा है। तराई में बसे आधा दर्जन गांवों में पानी भर गया। तो करीब एक दर्जन गांव पानी से घिरे हुए हैं। ग्रामीणों का पलायन तेजी से जारी है। लेकिन आवागमन के रास्ते में भी पानी भर जाने से उनका गांव से निकलना मुश्किल हो गया है। बचाव व राहत कार्य में लगे अफसर शुक्रवार को मंत्री दौरे के समय तो मुस्तैद दिखाई दिए लेकिन मंत्री का काफिला बाढ़ प्रभावित क्षेत्र से निकला तो अफसर भी एक-एक कर खिसक लिए।
घाघरा का जलस्तर खतरे के लाल निशान 106.076 से बढ़कर 106.86 पर पहुंच गया है। नदी का पानी एक सेंटीमीटर प्रतिघंटे की रफ्तार से बढ़ रहा है। ऐसे में घाघरा का फैलाव देख कर तराई के वासी सहमे हुए हैं। बाढ़ की तबाही से जूझ रहे तराई के लोगों की खोज-खबर लेने वाला कोई नहीं है। बचाव व राहत कार्य के नाम पर जिला प्रशासन के दावे भी हवा में है। बाढ़ चौकी व बाढ़ राहत केंद्र तथा नावें सिर्फ कागजों तक सीमित हैं। वास्तविक धरातल पर कोई तैयारी नहीं दिख रही है। रामनगर तहसील क्षेत्र के घाघरा के पार बसे जमका, परशुरामपुर, पूरनपुर, फाजिलपुर, रैकोलवा, खुज्जी, अशरफपुर, बिझौली, नरौली आदि गांव बाढ़ से घिर गए हैं। जमका के ग्राम प्रधान राम अवध की मानें तो ग्रामीणों को गांव से निकाल कर सुरक्षित स्थान पर पहुंचाने के कोई इंतजाम नहीं हैं। गांव में दो छोटी नावें हैं। जो ग्रामीणों के हाट-बाजार पहुंचकर साग-सब्जी व दवा आदि लाने के काम आ रही हैं। राहत कार्य के लिए उन्होंने डीएम तक लिखित पत्र देकर नाव की मांग की। मगर, अभी तक कोई मौके तक नही पहुंचा। एसडीएम रामनगर लव कुमार गुरुवार को खुज्जी तक गए जमका जाने वाले रास्ते में पानी भरे होने के कारण वहीं से वापस लौट गए। घाघरा के उस पार बसे रामसनेहीघाट व सिरौलीगौसपुर तहसील के रायपुर मांझा, परसावल, नैपुरा, कमियार गांव पानी में डूबे हैं। ग्रामीण कृष्ण गोपाल व दृगपाल ने बताया कि शुक्रवार को कुछ लोग बाढ़ चौकी पर आए थे। मगर देख कर चले गए। बाढ़ में नल डूब जाने से पीने के पानी तक का कोई इंतजाम नहीं है।
बाढ़ प्रभावित क्षेत्र वाले एसडीएम को आवश्यक निर्देश जारी किए गए हैं। घाघरा नदी के जलस्तर पर बराबर नजर रखी जा रही है। बाढ़ चौकियों पर तैनात कर्मचारियों को आदेशित किया गया है कि जो गांव नदी की चपेट में आ रहे हैं वहां के पीड़ितों की हर संभव मदद की जाए। इसमें किसी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं होगी। -अनिल कुमार सिंह, अपर जिलाधिकारी
घाघरा का जलस्तर खतरे के लाल निशान 106.076 से बढ़कर 106.86 पर पहुंच गया है। नदी का पानी एक सेंटीमीटर प्रतिघंटे की रफ्तार से बढ़ रहा है। ऐसे में घाघरा का फैलाव देख कर तराई के वासी सहमे हुए हैं। बाढ़ की तबाही से जूझ रहे तराई के लोगों की खोज-खबर लेने वाला कोई नहीं है। बचाव व राहत कार्य के नाम पर जिला प्रशासन के दावे भी हवा में है। बाढ़ चौकी व बाढ़ राहत केंद्र तथा नावें सिर्फ कागजों तक सीमित हैं। वास्तविक धरातल पर कोई तैयारी नहीं दिख रही है। रामनगर तहसील क्षेत्र के घाघरा के पार बसे जमका, परशुरामपुर, पूरनपुर, फाजिलपुर, रैकोलवा, खुज्जी, अशरफपुर, बिझौली, नरौली आदि गांव बाढ़ से घिर गए हैं। जमका के ग्राम प्रधान राम अवध की मानें तो ग्रामीणों को गांव से निकाल कर सुरक्षित स्थान पर पहुंचाने के कोई इंतजाम नहीं हैं। गांव में दो छोटी नावें हैं। जो ग्रामीणों के हाट-बाजार पहुंचकर साग-सब्जी व दवा आदि लाने के काम आ रही हैं। राहत कार्य के लिए उन्होंने डीएम तक लिखित पत्र देकर नाव की मांग की। मगर, अभी तक कोई मौके तक नही पहुंचा। एसडीएम रामनगर लव कुमार गुरुवार को खुज्जी तक गए जमका जाने वाले रास्ते में पानी भरे होने के कारण वहीं से वापस लौट गए। घाघरा के उस पार बसे रामसनेहीघाट व सिरौलीगौसपुर तहसील के रायपुर मांझा, परसावल, नैपुरा, कमियार गांव पानी में डूबे हैं। ग्रामीण कृष्ण गोपाल व दृगपाल ने बताया कि शुक्रवार को कुछ लोग बाढ़ चौकी पर आए थे। मगर देख कर चले गए। बाढ़ में नल डूब जाने से पीने के पानी तक का कोई इंतजाम नहीं है।
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बाढ़ प्रभावित क्षेत्र वाले एसडीएम को आवश्यक निर्देश जारी किए गए हैं। घाघरा नदी के जलस्तर पर बराबर नजर रखी जा रही है। बाढ़ चौकियों पर तैनात कर्मचारियों को आदेशित किया गया है कि जो गांव नदी की चपेट में आ रहे हैं वहां के पीड़ितों की हर संभव मदद की जाए। इसमें किसी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं होगी। -अनिल कुमार सिंह, अपर जिलाधिकारी
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