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दहाल हुई स्वास्थ्य सेवाएं, स्ट्रेचर पर हो रहा इलाज, बुखार से युवक की मौत

Lucknow Bureau Updated Sun, 11 Nov 2018 12:19 AM IST
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अव्यवस्था : जिला अस्पताल में स्ट्रेचर मिला न बेड
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बाराबंकी। तीन दिन से अवकाश के चलते शनिवार को जिला अस्पताल में मरीजों की भीड़ उमड़ पड़ी। स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाली के चलते किसी को बेड तो किसी को स्ट्रेचर तक नहीं मिला। कई मरीजों का तो स्ट्रेचर पर लिटाकर ही इलाज किया जा रहा है। डेंगू व टाइफाइड की जांच किट नहीं होने से भी मरीजों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।


वहीं, मोहम्मदपुर खाला थाना क्षेत्र के भटुवामऊ गांव के एक युवक की बुखार से मौत हो गई। ट्रॉमा सेंटर लखनऊ में उसका इलाज चल रहा था। इसके अलावा जिले भर में सैकड़ों लोग बुखार से पीड़ित हैं जो जिला अस्पताल, सीएचसी व निजी अस्पतालों में इलाज करा रहे हैं।


जिला अस्पताल में शनिवार को करीब 2300 मरीज पहुंचे। ओपीडी से लेकर ट्रॉमा सेंटर तक मरीज खचाखच भरे रहे। पर्चा बनवाने से लेकर दवा लेने के लिए मरीजों को जद्दोजहद करनी पड़ी। सबसे ज्यादा भीड़ फिजीशियन कक्ष, चर्मरोग और नाक कान गला कक्ष के बाहर दिखाई दी।


मरीज राजेश कुमार, शिवा, दीपक ने बताया कि तीन दिन अस्पताल बंद होने के कारण आज दवा लेने पहुंचे थे। यहां आने पर पता चला कि अस्पताल आधे दिन ही खुलेगा। मरीजों को डॉक्टर को दिखाने से लेकर जांच तक के लिए मशक्कत करनी पड़ी।


एक्स-रे, अल्ट्रासाउंड और ब्लड जांच के लिए भी लंबी लाइन लगी रही। जिला अस्पताल की पैथोलॉजी में भी आम दिनों की अपेक्षा करीब दोगुनी भीड़ रही। 12 बजे अस्पताल बंद होने से सैकड़ों मरीजों को बिना इलाज ही लौटना पड़ा।


वहीं मोहम्मदपुर खाला थाना क्षेत्र के भटुवामऊ प्राथमिक विद्यालय में रसोइया पद पर तैनात रामटहल कश्यप (45) कई दिन से तेज बुखार से पीड़ित था। तीन दिन पूर्व उसे ट्रॉमा सेंटर लखनऊ में भर्ती कराया गया था। जहां इलाज के दौरान शनिवार को उसकी मौत हो गई।


जिला अस्पताल की पैथोलॉजी में करीब 15 दिन से किट नहीं होने से डेंगू और टाईफाइड की जांच नहीं हो पा रही है। ऐसे में अस्पताल में निशुल्क होने वाली जांच अब लोगों को निजी पौथोलॉजी पर आठ सौ रुपये देकर करानी पड़ रही है।


कई दिन से बुखार से पीड़ित गुुुरुप्रसाद, नैतिक, राहुल व दीपिका को शनिवार को शनिवार को जिला अस्पताल में डेंगू व टाइफाइड की जांच लिखी गई। अस्पताल में जांच किट नहीं होने के चलते इन सभी को निजी पैथोलॉजी से जांच करानी पड़ी।


रामनगर कस्बा निवासी अर्जुन (14) का पैर टूट गया था। शनिवार को परिवारीजन उसे लेकर टेंपो से जिला अस्पताल पहुंचे थे। गेट पर टेंपो से उतरने के बाद तीमारदार स्ट्रेचर लेने गया तो कर्मचारियों ने नहीं दिया। इस पर तीमारदार ने रिक्शा करके अर्जुन को ओपीडी तक पहुंचाया।


जिला अस्पताल में सबसे ज्यादा अव्यवस्था ट्रॉमा सेंटर में है। मरीजों की संख्या बढ़ने से बेड तक मुहैया नहीं हो पाते हैं। हाईटेंशन लाइन की चपेट में आकर गंभीर रूप से झुलसे अटौटा गांव निवासी लखन को स्ट्रेचर पर ही भर्ती कर इलाज किया गया। तीमारदारों ने बेड दिलाने की मांग की तो उसे ट्रॉमा सेंटर लखनऊ रेफर कर दिया गया।


बंकी के उत्तर टोला निवासी मोहनी (16) शनिवार को सुबह से स्ट्रेचर पर पड़ी रही। न बेड मिला और न ही इलाज। दहशराबाग निवासी आयशा को कर्मचारियों ने बेड पर भर्ती कर ग्लूकोज की बोतल खिड़की से लटकी दी। अस्पताल में ये अव्यवस्था देख कई मरीज निजी अस्पताल चले गए।


जिला अस्पताल के सीएमएस डॉ. एसके सिंह का कहना है कि जिला अस्पताल में शनिवार को मरीजों की भीड़ अधिक रही मगर सभी का बेहतर ढंग से इलाज करने का प्रयास किया गया।


सीएचसी पर बिना इलाज किए मरीजों को जिला अस्पताल रेफर कर देने से व्यवस्था बिगड़ रही है। जो जांच नहीं हो पा रही हैं उन्हें शीघ्र शुरू कराने के प्रयास किए जा रहे हैं।

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