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Barabanki News: खेती से बदली किस्मत, कायम की स्वावलंबन की मिसाल
Sat, 22 Aug 2026 11:20 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बाराबंकी
संवाद न्यूज एजेंसी, बाराबंकी
Updated Sat, 22 Aug 2026 11:20 PM IST
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हरख। घर से बाहर निकलकर जब कोई महिला अपने सपनों को जमीन पर उतारती है तो पूरी व्यवस्था बदल जाती है। हरख ब्लॉक की सरोज कुमारी ने इसी सोच के साथ अपनी जिंदगी का नया अध्याय शुरू किया। उन्होंने साबित कर दिया कि सही दिशा और दृढ़ इच्छाशक्ति हो तो साधारण सी शुरुआत भी बड़े बदलाव का जरिया बन सकती है। प्रगतिशील खेती के साथ सफल उद्यमी महिला बन सरोज ने स्वावलंबन की अनूठी मिसाल कायम की है।
मानपुर गांव की रहने वाली सरोज बीए स्नातक हैं। उनका जीवन पहले आम ग्रामीण महिलाओं जैसा ही सीमित था। पति राकेश कुमार डीजे बजाकर किसी तरह परिवार का गुजारा कर रहे थे। पांच साल पहले सरोज ने रोशनी स्वयं सहायता समूह से जुड़ने का फैसला किया। लगन और नेतृत्व क्षमता के बल पर वह जल्द ही समूह की अध्यक्ष बन गईं। इसके बाद उन्होंने समूह के माध्यम से मिली वित्तीय सहायता, बैंकिंग और स्वरोजगार के तरीकों को खेती में लागू किया।
उन्होंने पारंपरिक फसलों से इतर खीरा और खरबूजे की व्यावसायिक खेती शुरू की। आज वह इन फसलों से सालाना लगभग 50 हजार रुपये की सीधी बचत कर रही हैं, जिससे वह पति के कंधे से कंधा मिलाकर परिवार का आर्थिक बोझ बांट रही हैं। सरोज अब केवल खुद तक सीमित नहीं हैं। वह समूह की बैठकों में महिलाओं को बचत और स्वरोजगार के गुर सिखाती हैं। उनका मानना है कि महिलाओं के पास हुनर की कमी नहीं है। बस उन्हें सही मार्गदर्शन और आत्मविश्वास की जरूरत है। (संवाद)
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मानपुर गांव की रहने वाली सरोज बीए स्नातक हैं। उनका जीवन पहले आम ग्रामीण महिलाओं जैसा ही सीमित था। पति राकेश कुमार डीजे बजाकर किसी तरह परिवार का गुजारा कर रहे थे। पांच साल पहले सरोज ने रोशनी स्वयं सहायता समूह से जुड़ने का फैसला किया। लगन और नेतृत्व क्षमता के बल पर वह जल्द ही समूह की अध्यक्ष बन गईं। इसके बाद उन्होंने समूह के माध्यम से मिली वित्तीय सहायता, बैंकिंग और स्वरोजगार के तरीकों को खेती में लागू किया।
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उन्होंने पारंपरिक फसलों से इतर खीरा और खरबूजे की व्यावसायिक खेती शुरू की। आज वह इन फसलों से सालाना लगभग 50 हजार रुपये की सीधी बचत कर रही हैं, जिससे वह पति के कंधे से कंधा मिलाकर परिवार का आर्थिक बोझ बांट रही हैं। सरोज अब केवल खुद तक सीमित नहीं हैं। वह समूह की बैठकों में महिलाओं को बचत और स्वरोजगार के गुर सिखाती हैं। उनका मानना है कि महिलाओं के पास हुनर की कमी नहीं है। बस उन्हें सही मार्गदर्शन और आत्मविश्वास की जरूरत है। (संवाद)
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