{"_id":"5b673fee4f1c1b9c3e8b53c3","slug":"101533493230-barabanki-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"प्रस्ताव पर मुहर लगी तो दूर होगा 12 गांवों का संकट","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
प्रस्ताव पर मुहर लगी तो दूर होगा 12 गांवों का संकट
Updated Sun, 05 Aug 2018 11:50 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
प्रस्ताव पर मुहर लगी तो दूर होगा 12 गांवों का संकट
बाराबंकी। घाघरा नदी के उस पार और गोंडा जिले की सीमा से सटे 12 गांवों की 25 हजार आबादी को खासी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। काफी लंबा चक्कर काटने के बाद यहां के पीड़ित न्याय पाने के लिए तहसीलों और थानों तक पहुंच पाते हैं।
वहीं, जिला मुख्यालय से दूरी अधिक होने के चलते बाढ़ आने पर न तो समय से बचाव कार्य हो पाता हैं और न ही सहायता पहुंच पाती है।
ऐसे में इन गांवों को गोंडा जिले में शामिल करने के प्रशासन के प्रस्ताव पर यदि शासन ने मुहर लगा दी तो यहां के लोगों का संकट दूर हो जाएगा। न्याय के साथ ही राहत भी आसानी से मिल सकेगी।
जिले की रामसनेहीघाट और सिरौलीगौसपुर तहसील के 12 गांवों के लोगों को यदि किसी कार्य से तहसील जाना होता है तो वे पहले 70 किमी की दूरी तय कर जिला मुख्यालय आते हैं और इसके बाद 40 किमी की दूरी तय कर रामसनेहीघाट तहसील पहुंचते हैं।
विज्ञापन
यही हाल इन गांवों के अंतर्गत थानों का है। यदि कोई घटना-दुर्घटना होती है तो पुलिस भी मदद को समय से नहीं पहुंच पाती है और न ही यहां के लोग थाने पहुंच पाते हैं।
इन गांवों को गोंडा जनपद में शामिल करने के लिए पूर्व में भी प्रस्ताव शासन को भेजे गए लेकिन मंजूरी नहीं मिल सकी। एक बार फिर इन गांवों को गोंडा में शामिल करने के लिए मुख्यमंत्री ने प्रस्ताव देने को कहा है।
वहीं, इन गांवों को गैर जनपद में शामिल करने की सुगबुगाहट से कहीं विरोध तो कहीं निर्णय सही होने पर चर्चा शुरू हो गई है।
इस बारे में एसडीएम अजय द्विवेदी ने बताया कि, गांवों में बाढ़ राहत के साथ ही अन्य कार्य कराने में परेशानी उठानी पड़ती है। कई अन्य दुश्वारियां भी होती हैं। ऐसे में यदि शासन ने प्रस्ताव को मंजूरी दे दी तो 12 गांवों के लोगों को काफी राहत मिलेगी।
जिलाधिकारी उदयभानु त्रिपाठी ने बताया कि, जिले के 12 गांवों को गोंडा में शामिल करने का प्रस्ताव वर्ष 2016 में भी शासन को भेजा गया था। सीएम के आदेश पर उसी प्रस्ताव पर विचार किया जा रहा है। जल्द ही शासन को प्रस्ताव भेजा जाएगा।
विज्ञापन
बाराबंकी। घाघरा नदी के उस पार और गोंडा जिले की सीमा से सटे 12 गांवों की 25 हजार आबादी को खासी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। काफी लंबा चक्कर काटने के बाद यहां के पीड़ित न्याय पाने के लिए तहसीलों और थानों तक पहुंच पाते हैं।
वहीं, जिला मुख्यालय से दूरी अधिक होने के चलते बाढ़ आने पर न तो समय से बचाव कार्य हो पाता हैं और न ही सहायता पहुंच पाती है।
ऐसे में इन गांवों को गोंडा जिले में शामिल करने के प्रशासन के प्रस्ताव पर यदि शासन ने मुहर लगा दी तो यहां के लोगों का संकट दूर हो जाएगा। न्याय के साथ ही राहत भी आसानी से मिल सकेगी।
विज्ञापन
जिले की रामसनेहीघाट और सिरौलीगौसपुर तहसील के 12 गांवों के लोगों को यदि किसी कार्य से तहसील जाना होता है तो वे पहले 70 किमी की दूरी तय कर जिला मुख्यालय आते हैं और इसके बाद 40 किमी की दूरी तय कर रामसनेहीघाट तहसील पहुंचते हैं।
विज्ञापन
यही हाल इन गांवों के अंतर्गत थानों का है। यदि कोई घटना-दुर्घटना होती है तो पुलिस भी मदद को समय से नहीं पहुंच पाती है और न ही यहां के लोग थाने पहुंच पाते हैं।
इन गांवों को गोंडा जनपद में शामिल करने के लिए पूर्व में भी प्रस्ताव शासन को भेजे गए लेकिन मंजूरी नहीं मिल सकी। एक बार फिर इन गांवों को गोंडा में शामिल करने के लिए मुख्यमंत्री ने प्रस्ताव देने को कहा है।
वहीं, इन गांवों को गैर जनपद में शामिल करने की सुगबुगाहट से कहीं विरोध तो कहीं निर्णय सही होने पर चर्चा शुरू हो गई है।
इस बारे में एसडीएम अजय द्विवेदी ने बताया कि, गांवों में बाढ़ राहत के साथ ही अन्य कार्य कराने में परेशानी उठानी पड़ती है। कई अन्य दुश्वारियां भी होती हैं। ऐसे में यदि शासन ने प्रस्ताव को मंजूरी दे दी तो 12 गांवों के लोगों को काफी राहत मिलेगी।
जिलाधिकारी उदयभानु त्रिपाठी ने बताया कि, जिले के 12 गांवों को गोंडा में शामिल करने का प्रस्ताव वर्ष 2016 में भी शासन को भेजा गया था। सीएम के आदेश पर उसी प्रस्ताव पर विचार किया जा रहा है। जल्द ही शासन को प्रस्ताव भेजा जाएगा।