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अंतिम दिन जहीर क्लब में मारा गया दशानन
ब्यूरो/अमर उजाला, बांदा
Updated Sun, 25 Oct 2015 11:25 PM IST
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बांदा। परंपरागत रूप से चार दिनों तक मनाया जाने वाला
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दशहरा रविवार को खत्म हो गया। अंतिम दिन जहीर क्लब मैदान में रावण वध के
बाद दशहरा मिलन शुरू हुआ। सिविल लाइन समेत आधा दर्जन मोहल्लों में देर रात
तक शुभकामनाएं देने का तांता लगा रहा।
चौथे और अंतिम दिन रविवार को जहीर क्लब मैदान में राम-रावण युद्ध का मंचन हुआ। मैदान में दर्शकों की भीड़ रही। आस पास मेला जैसा नजारा रहा। राक्षस सेना और वानर सेना के बीच युद्ध का मंचन देख दर्शक रोमांचित हुए।
हनुमान समेत वानर सेना की उछल कूद देख बच्चों ने तालियां बजाई। एक-एक कर राक्षस सेना के महारथियों को राम की सेना ने मार गिराया। मेघनाथ और कुंभकर्ण का वध होने के बाद रावण ने युद्ध मैदान में खुद मोर्चा संभाल लिया।
भगवान श्रीराम द्वारा छोड़े गए बाणों से रावण के सिर कटने के बाद फिर उसी तरह जुड़ जाते थे। यह देख श्रीराम आश्चर्य में पड़ गए। विभीषण ने श्रीराम को रावण की नाभि में अमृत होने का भेद बताया।
भगवान श्रीराम ने एक साथ 31 बाण छोड़कर रावण को धराशायी कर दिया। दशानन का वध होते ही पुतला आग के हवाले कर दिया गया। धू-धूकर जल रहे पुतले से पटाखों के धमाके गूंजते रहे। रामलीला समिति अध्यक्ष अधिवक्ता चंद्रमोहन मौन (बचऊ दद्दा) ने राम, लक्ष्मण और सीता के स्वरूपों की आरती उतारी।
रावण वध होते ही दशहरा मिलन शुरू हो गया। सिविल लाइन, स्वराज कालोनी, डीएम कालोनी, इंदिरा नगर, जवाहर नगर, सर्वोदय नगर, बिजली खेड़ा, बंगालीपुरा आदि मुहल्लों में लोगों ने एक दूसरे को गले लगाकर बधाई दी। लोगों ने मिठाई व पान खिलाकर रस्म निभाई।
चौथे और अंतिम दिन रविवार को जहीर क्लब मैदान में राम-रावण युद्ध का मंचन हुआ। मैदान में दर्शकों की भीड़ रही। आस पास मेला जैसा नजारा रहा। राक्षस सेना और वानर सेना के बीच युद्ध का मंचन देख दर्शक रोमांचित हुए।
हनुमान समेत वानर सेना की उछल कूद देख बच्चों ने तालियां बजाई। एक-एक कर राक्षस सेना के महारथियों को राम की सेना ने मार गिराया। मेघनाथ और कुंभकर्ण का वध होने के बाद रावण ने युद्ध मैदान में खुद मोर्चा संभाल लिया।
भगवान श्रीराम द्वारा छोड़े गए बाणों से रावण के सिर कटने के बाद फिर उसी तरह जुड़ जाते थे। यह देख श्रीराम आश्चर्य में पड़ गए। विभीषण ने श्रीराम को रावण की नाभि में अमृत होने का भेद बताया।
भगवान श्रीराम ने एक साथ 31 बाण छोड़कर रावण को धराशायी कर दिया। दशानन का वध होते ही पुतला आग के हवाले कर दिया गया। धू-धूकर जल रहे पुतले से पटाखों के धमाके गूंजते रहे। रामलीला समिति अध्यक्ष अधिवक्ता चंद्रमोहन मौन (बचऊ दद्दा) ने राम, लक्ष्मण और सीता के स्वरूपों की आरती उतारी।
रावण वध होते ही दशहरा मिलन शुरू हो गया। सिविल लाइन, स्वराज कालोनी, डीएम कालोनी, इंदिरा नगर, जवाहर नगर, सर्वोदय नगर, बिजली खेड़ा, बंगालीपुरा आदि मुहल्लों में लोगों ने एक दूसरे को गले लगाकर बधाई दी। लोगों ने मिठाई व पान खिलाकर रस्म निभाई।