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‘कल चमन था आज सहरा हुआ’

Thu, 14 Jan 2016 11:45 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, बांदा
ब्यूरो/अमर उजाला, बांदा Updated Thu, 14 Jan 2016 11:45 PM IST
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" Yesterday was Chaman is desert today '

बांदा। ‘कल चमन था आज सहरा हुआ, देखते ही देखते यह

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क्या हुआ’। पड़ुई गांव का गुरुवार को कुछ यही हाल दिखा। मुख्य सचिव के कूच करते ही गांव की जिंदगी फिर पुराने ढर्रे पर लौट आई।

 हफ्ते भर से मुख्य सचिव के लिए गांव को सजाने और संवारने में प्रशासन ने पूरी ताकत झोंक दी थी। अफसरों की मेहनत रंग लाई। मुख्य सचिव इंतजाम देखकर खुश हो गए।

गांव के लोग भी कई दिन के लिए वीआईपी बन गए थे। उनकी हर शिकायत और समस्या को तत्काल दूर किया जा रहा था। सुबह मुख्य सचिव का काफिला जैसे ही रवाना हुआ , पड़ुई गांव को पुराने ढर्रे पर लाने की होड़ लग गई।

आनन-फानन में स्विस काटेज खोलकर सामान समेट लिया गया। प्राइमरी स्कूल के कक्षों में लगाए गए एलईडी, पर्दे, कारपेट उतार लिए गए।

अतिरिक्त ट्रांसफार्मर बिजली कर्मचारी वाहन पर लादकर चले गए। कई दिन से चकाचक साफ-सुथरा नजर आने वाला स्कूल परिसर जगह-जगह पड़े कूड़े-कचरे से फिर बदहाल नजर आया।

कई स्थानों पर बिजली कर्मचारी केबिल खोल ली गए। स्कूल कक्ष में डाले गए पर्दे न हटाने के लिए स्कूल के प्रधानाध्यापक ने काफी आरजू-मिन्नत की लेकिन पीडब्ल्यूडी कर्मियों ने एक नहीं सुनी।

शाम होते-होते चौपाल का पंडाल, बांस-बल्ली सब कुछ नदारद हो चुका था। इसी के साथ पड़ुई की जिंदगी फिर अपने पुराने ढर्रे पर लौट आई।

सर्किट हाउस लौटते समय मुख्य सचिव ने बिना पूर्व सूचना जिला पुरुष और महिला अस्पताल पहुंच गए। उन्होने अस्पताल के सभी वार्ड, स्टोर, पुनर्वास केंद्र और इमरजेंसी का निरीक्षण किया। मरीजों से इलाज की जानकारी ली।

मुख्य सचिव ने महिला अस्पताल में डाक्टरों की कमी पूरा करने का आश्वासन दिया। अस्पताल परिसर में नवनिर्मित ट्रामा सेंटर जल्द चालू कराने का भरोसा दिलाया। प्रभारी सीएमओ डॉ. एके सिंह, सीएमएस डॉ. एसएन गुप्ता भी मौजूद रहे।

मुख्य सचिव के लोहिया गांव पडुई मेें चौपाल लगाने और रात्रि विश्राम को लेकर ग्रामीणों में मिली जुली प्रतिक्रिया रही। चंद दिन में गांव की कायापलट होने से जहां कुछ ग्रामीण खुश हैं, वहीं ज्यादातर नाखुश हैं।

इनका कहना है  गांव भ्रमण के नाम पर सिर्फ रस्म अदायगी हुई। मुख्य सचिव ने पूरा गांव नहीं देखा। आत्महत्या करने वाले किसान परिवारों के घर जाकर उन्हे सांत्वना के दो शब्द भी नहीं बोले।

संक्षिप्त भ्रमण से नाराज तमाम महिलाओं ने गांव से लौट रहे मुख्य सचिव के काफिले को गांव के बाहर रोक लिया। महिलाओं ने नाराजगी के लहजे में कहा‘साहेब! तुमका पूर गांव घूमै का चाही। तबहिने यहां परेसानी समझ मां आवत’।

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