फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Banda News ›   Wrestler will make 'Lal Dawa' of Bundelkhand again

बुंदेलखंड की ‘लाल दवा’ फिर बनाएगी पहलवान

Fri, 27 May 2022 10:39 PM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Fri, 27 May 2022 10:39 PM IST
विज्ञापन
Wrestler will make 'Lal Dawa' of Bundelkhand again
बांदा। योगी सरकार ने बजट में बुंदेलखंड के विकास और प्राकृतिक खेती को लेकर दरियादिली दिखाई है। उससे उम्मीद जगी है कि फिर से लाल दवा लहलहाएगी। सरकारी उपेक्षा के चलते देश-विदेश में बुंदेलखंड की लाल दवा के रूप में पहचान बना चुका कठिया गेहूं अंतिम सांसें गिन रहा है। करीब 15 साल पहले बांदा मंडल में लगभग 1000 हेक्टेयर भूमि पर कठिया गेहूं की पैदावार होती थी, जो अब घटकर 10 फीसदी से भी कम रह गई है। औषधीय गेहूं की वजह से इसे पहलवान खाना ज्यादा पसंद करते हैं।
विज्ञापन

बुंदेलखंड के बांदा, चित्रकूट, महोबा और हमीरपुर सहित सात जनपदों के सैकड़ों गांवों में कभी प्रकृति की अनमोल औषधि कठिया गेहूं की फसल लहलहाती थी। खासतौर पर युवा इस गेहूं के आटे से बनी रोटियां खाकर पहलवानी और सेना में भर्ती होने की तैयारी करते थे। इस गेहूं से बनी दलिया और सोहन हलुआ की देश ही नहीं अरब देशों में बड़े पैमाने पर डिमांड रहती है। इसकी मांग अधिक होने से सामान्य गेहूं की अपेक्षा 25 फीसदी अधिक दाम पर बिकता है, मगर सरकार की अनदेखी के चलते किसानों का कठिया गेहूं से मोह भंग हो रहा है।
विज्ञापन

बिना रासायनिक खाद वाली फसल
बुंदेलखंड के लगभग सभी जिलों में लाल रंग का यह गेहूं बिना रासायनिक खाद के पैदा होता है। इस वजह से स्वास्थ्य के लिए सबसे पौष्टिक माना जाता है। इसी के चलते गेहूं की तमाम प्रजातियों के बावजूद अपने औषधीय गुणों के कारण कठिया गेहूं की पहचान कम नहीं हुई। इसे देखते हुए सरकार ने कठिया गेहूं की पैदावार बढ़ाने और उसे पुरानी पहचान दिलाने के लिए बजट में बुंदेलखंड की प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने का खाका तैयार किया है। इसके लिए कृषि विश्वविद्यालय स्तर पर शोध कार्य भी शुरू होने जा रहे हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन

इन आहार में होता प्रयोग
सामान्य गेहूं के मुकाबले इसमें प्रोटीन 12 से 13 प्रतिशत अधिक प्रोटीन होती है। इसमें बीटा कैरोटीन नामक एक पदार्थ पाया जाता है, जिससे विटामिन ए बनता है। ऐसे में आंख की बीमारियों के लिए यह फायदेमंद होता है। इसमें ग्लूटन भी पर्याप्त मात्रा में पाई जाती है। जिससे सूजी-रवा, पिज्जा, स्पेघेटी, सेंवई, नूडल्स और शीघ्र पाचन वाले पौष्टिक आहारों के लिए कठिया गेहूं बेहतर होता है।

- पूरी तरह प्रकृतिक उपज
- खाद या अन्य संसाधन का प्रयोग नहीं होता
- जुताई कर बीज डालने के बाद प्रकृति इसे तैयार करती
- संसाधनों के अभाव में होती पैदावार
- ऊबड़ खाबड़ जमीन पर लहलहाती है फसल
वर्जन
प्राकृतिक खेती को लेकर वृहद स्तर पर कार्ययोजना तैयार की जा रही है। कठिया गेहूं के प्रोत्साहन के लिए किसानों को सस्ते दर पर बीज मुहैया कराएं जाएंगे। इस फसल से अनेक लाभ हैं, जबकि इसमें पानी और खाद की कम से कम जरूरत होती है। - विजय कुमार, कृषि उप-निदेशक
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed