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मंत्रोच्चारण के बीच जल तर्पण कर पूर्वजों को पूजा

Thu, 23 Sep 2021 11:32 PM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Thu, 23 Sep 2021 11:32 PM IST
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Worship to ancestors by offering water amidst chanting
बांदा। 15 दिनों तक चलने वाले पितृपक्ष के तीसरे दिन बृहस्पतिवार को लोगों ने अपने पूर्वजों को मंत्रोच्चारण के बीच जल तर्पण कर पूजा की। इस दौरान तर्पण के अलावा श्राद्ध और पिंडदान का भी सिलसिला चलता रहता है।
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मान्यता है कि पितृपक्ष में पुरखे (पितर) स्वर्ग से धरती अपने परिजनों से मिलने आते हैं। तर्पण, श्राद्ध और पिंडदान से खुश होकर सुख-समृद्धि का आशीर्वाद देते हैं। पितरों का तर्पण न करने वाले को पितृदोष लगता है।
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इससे तमाम बाधाएं आती हैं। शहर के केन नदी, नवाब टैंक समेत ग्रामीण इलाकों में स्थित तालाबों में जाकर लोग स्नान के बाद पितरों को मंत्रोच्चारण के बीच जल अर्पित करते हैं।
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ज्योतिषाचार्य पंडित हर्षित महाराज ने बताया कि पितृपक्ष में श्राद्ध, पिंडदान व तर्पण करने का विशेष महत्व है। पितृपक्ष के 15 दिनों तक पूर्वज किसी न किसी रूप में अपने परिजनों के बीच रहते हैं।
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