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सूची से नाम नदारद, मायूस लौटे मजदूर
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बांदा। लॉकडाउन में मनरेगा और पंजीकृत मजदूरों को मुफ्त राशन देने की योजना शुरू में ही लापरवाही की भेंट चढ़ गई। राशन विक्रेताओं को भेजी गई सूची से बड़ी संख्या में मजदूरों के नाम गायब होने से उन्हें खाली हाथ लौटना पड़ा। सूची में 2019 तक काम करने वाले श्रमिकों के नाम दर्ज हैं।
पहली अप्रैल से शुरू हुई योजना के तहत मनरेगा और श्रम विभाग में पंजीकृत मजदूरों को प्रति राशन कार्ड 35 किलो राशन मुफ्त दिया जाना है। गुरुवार को दूसरे दिन भी कोटे की दुकानों में ऐसे मजदूरों की भीड़ रही, लेकिन इनमें से अधिकांश को बैरंग लौटना पड़ा।
भवन निर्माण श्रमिक रामभरोसे मैकू (कांशीराम कालोनी, निम्नीपार), मनरेगा मजदूर सियादुलारी (हटेटी पुरवा) आदि को यह कहकर चलता कर दिया गया कि उनका नाम सूची में नहीं है। कोटेदार सुनील ने भी यही बात कही। इस बाबत जिला पूर्ति अधिकारी राजीव तिवारी ने कहा कि पूरक सूची जारी की जाएगी। जिन श्रमिकों के पास जॉबकार्ड व पंजीयन प्रमाण पत्र है उन्हें अनाज मिलेगा।
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पहली अप्रैल से शुरू हुई योजना के तहत मनरेगा और श्रम विभाग में पंजीकृत मजदूरों को प्रति राशन कार्ड 35 किलो राशन मुफ्त दिया जाना है। गुरुवार को दूसरे दिन भी कोटे की दुकानों में ऐसे मजदूरों की भीड़ रही, लेकिन इनमें से अधिकांश को बैरंग लौटना पड़ा।
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भवन निर्माण श्रमिक रामभरोसे मैकू (कांशीराम कालोनी, निम्नीपार), मनरेगा मजदूर सियादुलारी (हटेटी पुरवा) आदि को यह कहकर चलता कर दिया गया कि उनका नाम सूची में नहीं है। कोटेदार सुनील ने भी यही बात कही। इस बाबत जिला पूर्ति अधिकारी राजीव तिवारी ने कहा कि पूरक सूची जारी की जाएगी। जिन श्रमिकों के पास जॉबकार्ड व पंजीयन प्रमाण पत्र है उन्हें अनाज मिलेगा।
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