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गांव में नहीं मिला काम, श्रमिकों का फिर पलायन
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Work not found in the village, labor migration again
- फोटो : BANDA
तिंदवारी। दो माह तक काम का इंतजार करने के बाद भी हाथ खाली रहने से मायूस श्रमिक फिर वापस परदेस लौटने लगे हैं। उन्हें वापस ले जाने के लिए कंपनियों के ठेकेदार यहां आए हैं। क्षेत्र के लोहारी, निवाइच, पलरा, जौहरपुर, अमलीकौर, पिपरगवां आदि गांवों से सैकड़ों प्रवासी श्रमिक ठेकेदारों के जरिये फिर वापस जाने शुरू हो गए हैं।
वापस पलायन कर करीब 30 मजदूर परिवार सोलापुर (राजस्थान) गए हैं। वहां सीमेंट की ईंट और तौलिया बनाने का काम करेंगे। उन्हें ले जाने के लिए सोलापुर से ठेकेदार बलबीर, जबर खुद यहां आए थे। उन्होंने बताया कि वहां उनकी दो कंपनियां हैं।
एक में तौलिया बनाने और दूसरे में सीमेंट की ईंट बनाई जाती है। ठेकेदार ने कहा कि श्रमिकों को वह वहां पहले 500 रुपये दिहाड़ी देते थे अब 700 रुपये देंगे। अन्य सुविधाएं भी मुहैया कराएंगे। ठेकेदार के इन वादों पर भरोसा करके श्रमिक सपरिवार रवाना हो गए हैं।
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गांव में मिलता काम तो क्यूं जाते वापस
लोहारी गांव के प्रवासी श्रमिक सभाजीत, लल्लू, नरेंद्र, ज्ञान, कृष्ण कुमार, रामचंद्र, रामलखन, अरविंद, पवन, राजेश, केशकली, मुन्नी, सावित्री आदि ने आरोप लगाया कि प्रधान और सचिव मनरेगा में अपने चहेतों को काम दे रहे हैं। अगर उन्हें भी यहां काम मिलता तो वह क्यूं वापस परदेस जाते?
प्रवासी श्रमिकों के पलायन करने संबंधी जानकारी नहीं है। गांवों में मनरेगा के माध्यम से रोजगार दिया जा रहा है। अगर किसी प्रवासी श्रमिक को काम नहीं मिला है तो वह बताएं। इसकी जांच वह खुद गांव जाकर करेंगी। दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।-अनुधा श्रीवास्तव, बीडीओ, तिंदवारी (बांदा)
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वापस पलायन कर करीब 30 मजदूर परिवार सोलापुर (राजस्थान) गए हैं। वहां सीमेंट की ईंट और तौलिया बनाने का काम करेंगे। उन्हें ले जाने के लिए सोलापुर से ठेकेदार बलबीर, जबर खुद यहां आए थे। उन्होंने बताया कि वहां उनकी दो कंपनियां हैं।
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एक में तौलिया बनाने और दूसरे में सीमेंट की ईंट बनाई जाती है। ठेकेदार ने कहा कि श्रमिकों को वह वहां पहले 500 रुपये दिहाड़ी देते थे अब 700 रुपये देंगे। अन्य सुविधाएं भी मुहैया कराएंगे। ठेकेदार के इन वादों पर भरोसा करके श्रमिक सपरिवार रवाना हो गए हैं।
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गांव में मिलता काम तो क्यूं जाते वापस
लोहारी गांव के प्रवासी श्रमिक सभाजीत, लल्लू, नरेंद्र, ज्ञान, कृष्ण कुमार, रामचंद्र, रामलखन, अरविंद, पवन, राजेश, केशकली, मुन्नी, सावित्री आदि ने आरोप लगाया कि प्रधान और सचिव मनरेगा में अपने चहेतों को काम दे रहे हैं। अगर उन्हें भी यहां काम मिलता तो वह क्यूं वापस परदेस जाते?
प्रवासी श्रमिकों के पलायन करने संबंधी जानकारी नहीं है। गांवों में मनरेगा के माध्यम से रोजगार दिया जा रहा है। अगर किसी प्रवासी श्रमिक को काम नहीं मिला है तो वह बताएं। इसकी जांच वह खुद गांव जाकर करेंगी। दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।-अनुधा श्रीवास्तव, बीडीओ, तिंदवारी (बांदा)