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बीएसए की भाषा सुनकर महिला प्रेरक शर्मसार

Mon, 02 Feb 2015 11:45 PM IST
ब्यूरो/ अमर उजाला, बांदा
ब्यूरो/ अमर उजाला, बांदा Updated Mon, 02 Feb 2015 11:45 PM IST
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Women's inspiring to hear the language of the BSA red-faced

मानदेय की मांग लेकर बीएसए से फरियाद करने पहुंचे

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महिला और पुरुष शिक्षा प्रेरक बीएसए की भद्दी भाषा सुनकर सन्न रह गए। शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारी की जुबां से ऐसे शब्द सुनकर महिला प्रेरक शर्मसार हो गईं।

सोमवार को बड़ोखर ब्लाक के विभिन्न गांवों में तैनात साक्षर भारत मिशन योजना के तहत कार्यरत प्रेरकों ने सिटी मजिस्ट्रेट से मिलकर उन्हें ज्ञापन दिया।

बताया कि उन्हें नवंबर 2012 से मानदेय नहीं मिला है। परिवार भुखमरी की कगार पर है। प्रेरकों का कहना था कि शासन वेतन का बजट भेज चुका है। सिटी मजिस्ट्रेट ने उन्हें शीघ्र मानदेय दिलाने का भरोसा दिलाया। साथ ही बीएसए से मिलने की सलाह दी।

लगभग 15 महिला और 20 पुरुष प्रेरक कलेक्ट्रेट से सीधे बीएसए कार्यालय पहुंचे। प्रेरक संघ बड़ोखर ब्लाक अध्यक्ष श्रीराम निषाद ने बताया कि प्रेरकों ने ज्यों ही बीएसए को अपनी अर्जी देनी चाही वे भड़क उठे। बोले-‘मैं इसका क्या करूं ?..... में भर लूं। मेरी ... के पीछे क्यों घूम रहे हो’।

और भी कई अपशब्दों के साथ डांट-डपटकर भगा दिया। महिला प्रेरक अधिकारी की इस हरकत से शर्मसार हो गईं। ज्ञापन देने वालों में सरोज साहू, मोहनलाल, कंचन सिंह, हरिश्चंद्र साहू, राकेश कुमार, कमलेश कुमार सिंह, फौजिया खातून, संगीता वर्मा, मिथलेश सिंह आदि शामिल रहीं।

उधर, बीएसए डॉ. सत्यनारायण ने ऐसी किसी भी अभद्र भाषा का प्रयोग करने से इनकार किया। उन्होंने कहा कि प्रेरक गलत आरोप लगा रहे हैं।

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