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निर्मल मन मोहि सोई जन भावा
ब्यूरो/अमर उजाला, बांदा
Updated Wed, 02 Dec 2015 11:31 PM IST
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बांदा। व्यक्ति के पास यदि सच्चा प्रेम और भक्ति है
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तो ईश्वर को कहीं भी बुलाया जा सकता है। ये बातें वृंदावन से आए कथावाचक
जगदीश शास्त्री ने हार्पर क्लब में श्रीमद्भागवत कथा के अंतिम दिन बुधवार
को कहीं।
कथा व्यास ने कहा कि हरि व्यापक सर्वत्र समाना, प्रेम ते प्रगट होंहि मै जाना। प्रेम में वह ताकत है कि भगवान को भी मजबूर किया जा सकता है।
यदि मानव निष्कपट भाव से समाज के कल्याण की कामना के लिए असहाय व गरीब समाज का हित करे वही सच्चा धर्म है। गरीबों को पीड़ा पहुंचाना अधर्म है।
यदि व्यक्ति को सुख और शांति चाहिए तो समाज में प्रेम से निष्कपट भाव से सामंजस्य बनाकर रहना चाहिए। भगवान कहते हैं कि निर्मल मन मोहि सोई जन भावा, मोहि कपट छल छिद्र न भावा यानी छल व कपट करने वाले से भगवान हमेशा दूर रहते हैं।
भगवान कृष्ण ने खुद कहा है कि जितना प्रेम मैं अपने निश्छल भक्तों से करता हूं, उतना प्रेम अपनी पत्नी लक्ष्मी से भी नहीं करता।
कृष्ण जन्म की कथा व झांकी की प्रस्तुत पर श्रोता भाव विभोर हो गए। कथा के अंतिम दिन मंडलायुक्त एल वेंकटेश्वर लू भी मौजूद रहे। उन्होंने कथाव्यास को सम्मानित किया।
कथा व्यास ने कहा कि हरि व्यापक सर्वत्र समाना, प्रेम ते प्रगट होंहि मै जाना। प्रेम में वह ताकत है कि भगवान को भी मजबूर किया जा सकता है।
यदि मानव निष्कपट भाव से समाज के कल्याण की कामना के लिए असहाय व गरीब समाज का हित करे वही सच्चा धर्म है। गरीबों को पीड़ा पहुंचाना अधर्म है।
यदि व्यक्ति को सुख और शांति चाहिए तो समाज में प्रेम से निष्कपट भाव से सामंजस्य बनाकर रहना चाहिए। भगवान कहते हैं कि निर्मल मन मोहि सोई जन भावा, मोहि कपट छल छिद्र न भावा यानी छल व कपट करने वाले से भगवान हमेशा दूर रहते हैं।
भगवान कृष्ण ने खुद कहा है कि जितना प्रेम मैं अपने निश्छल भक्तों से करता हूं, उतना प्रेम अपनी पत्नी लक्ष्मी से भी नहीं करता।
कृष्ण जन्म की कथा व झांकी की प्रस्तुत पर श्रोता भाव विभोर हो गए। कथा के अंतिम दिन मंडलायुक्त एल वेंकटेश्वर लू भी मौजूद रहे। उन्होंने कथाव्यास को सम्मानित किया।