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Banda News: चौराहे के चौड़ीकरण से व्यापारियों में आक्रोश, बबेरू बाईपास की उठी मांग
Wed, 11 Feb 2026 12:24 AM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बांदा
संवाद न्यूज एजेंसी, बांदा
Updated Wed, 11 Feb 2026 12:24 AM IST
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फोटो- 16 अतिक्रमण के चलते ध्वस्त हुए मकान। संवाद
बबेरू। कस्बे के प्रमुख व ऐतिहासिक अद्भुत चौराहा के चौड़ीकरण को लेकर स्थानीय व्यापारियों में असंतोष व्याप्त है। व्यापारियों का कहना है कि बबेरू को महानगर की तर्ज पर विकसित करने के नाम पर ऐसा कार्य किया जा रहा है, जिससे दशकों से बसे परिवार उजड़ने की कगार पर पहुंच गए हैं। चौड़ीकरण की जद में आकर करीब 40 व्यापारियों की दुकानें और मकान पूरी तरह समाप्त हो चुके हैं, जिससे कई परिवार बेघर हो गए हैं और उनके सामने रोज़ी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है।
कस्बे में चल रहे अतिक्रमण हटाओ अभियान के तहत उन दुकानों और मकानों को हटाया जा रहा है, जिनमें व्यापारी 70 से 80 वर्षों से व्यवसाय कर जीवनयापन कर रहे थे। व्यापारियों का कहना है कि उनके पास न तो कोई वैकल्पिक व्यवस्था है और न ही पुनर्वास की कोई ठोस योजना, जिससे उनका भविष्य अंधकारमय होता जा रहा है। अपने मकान और दुकानों को बचाने के लिए कस्बे के एक दर्जन से अधिक व्यापारी हाईकोर्ट की शरण ले चुके हैं। इनमें कमासिन रोड और कांजी हाउस क्षेत्र के व्यापारी शामिल हैं।
कमासिन रोड क्षेत्र के नौ व्यापारियों अशोक कुमार, मुन्नालाल गुप्ता, ज्ञान प्रकाश, महेश सोनी, भरत सोनी सहित अन्य ने 28 जनवरी को इलाहाबाद हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की थी। याचिका में बताया गया कि वे पिछले 70-80 वर्षों से मुख्य चौराहे पर रहकर व्यापार कर रहे हैं और उनके पास कोई वैकल्पिक स्थान उपलब्ध नहीं है।
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वहीं कांजी हाउस क्षेत्र के लगभग 20 व्यापारियों ने 13 जनवरी को हाईकोर्ट में याचिका दायर कर आरोप लगाया कि वर्ष 2024 में नगर पंचायत ने उनसे डेढ़-डेढ़ लाख रुपये लेकर उन्हें बसाया था और इसकी रसीदें भी दी गई थीं। व्यापारियों का कहना है कि यदि अब उन्हें हटाया जा रहा है तो या तो उन्हें वैकल्पिक रूप से पुनः बसाया जाए या जमा की गई धनराशि लौटाई जाए। हालांकि 22 जनवरी को उनकी याचिका यह कहते हुए निरस्त कर दी गई कि मामले का निस्तारण जिलाधिकारी स्तर पर किया जाएगा, जिससे प्रभावित परिवारों की चिंता और बढ़ गई है।
जन उद्योग व्यापार संगठन के अध्यक्ष केके महंत ने प्रशासन से मांग की है कि व्यापारियों के मकान और दुकानें उजाड़ने से पहले पुनर्वास की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। उन्होंने कहा कि यदि समय रहते बबेरू में बाईपास का निर्माण किया गया होता तो कस्बे के व्यापारियों को इस संकट का सामना नहीं करना पड़ता। उन्होंने शीघ्र बबेरू बाईपास निर्माण की मांग दोहराते हुए कहा कि यही समस्या का स्थायी समाधान है।
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कस्बे में चल रहे अतिक्रमण हटाओ अभियान के तहत उन दुकानों और मकानों को हटाया जा रहा है, जिनमें व्यापारी 70 से 80 वर्षों से व्यवसाय कर जीवनयापन कर रहे थे। व्यापारियों का कहना है कि उनके पास न तो कोई वैकल्पिक व्यवस्था है और न ही पुनर्वास की कोई ठोस योजना, जिससे उनका भविष्य अंधकारमय होता जा रहा है। अपने मकान और दुकानों को बचाने के लिए कस्बे के एक दर्जन से अधिक व्यापारी हाईकोर्ट की शरण ले चुके हैं। इनमें कमासिन रोड और कांजी हाउस क्षेत्र के व्यापारी शामिल हैं।
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कमासिन रोड क्षेत्र के नौ व्यापारियों अशोक कुमार, मुन्नालाल गुप्ता, ज्ञान प्रकाश, महेश सोनी, भरत सोनी सहित अन्य ने 28 जनवरी को इलाहाबाद हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की थी। याचिका में बताया गया कि वे पिछले 70-80 वर्षों से मुख्य चौराहे पर रहकर व्यापार कर रहे हैं और उनके पास कोई वैकल्पिक स्थान उपलब्ध नहीं है।
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वहीं कांजी हाउस क्षेत्र के लगभग 20 व्यापारियों ने 13 जनवरी को हाईकोर्ट में याचिका दायर कर आरोप लगाया कि वर्ष 2024 में नगर पंचायत ने उनसे डेढ़-डेढ़ लाख रुपये लेकर उन्हें बसाया था और इसकी रसीदें भी दी गई थीं। व्यापारियों का कहना है कि यदि अब उन्हें हटाया जा रहा है तो या तो उन्हें वैकल्पिक रूप से पुनः बसाया जाए या जमा की गई धनराशि लौटाई जाए। हालांकि 22 जनवरी को उनकी याचिका यह कहते हुए निरस्त कर दी गई कि मामले का निस्तारण जिलाधिकारी स्तर पर किया जाएगा, जिससे प्रभावित परिवारों की चिंता और बढ़ गई है।
जन उद्योग व्यापार संगठन के अध्यक्ष केके महंत ने प्रशासन से मांग की है कि व्यापारियों के मकान और दुकानें उजाड़ने से पहले पुनर्वास की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। उन्होंने कहा कि यदि समय रहते बबेरू में बाईपास का निर्माण किया गया होता तो कस्बे के व्यापारियों को इस संकट का सामना नहीं करना पड़ता। उन्होंने शीघ्र बबेरू बाईपास निर्माण की मांग दोहराते हुए कहा कि यही समस्या का स्थायी समाधान है।