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गलत इलाज का आरोप लगाकर हंगामा
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Uproar alleging wrong treatment
- फोटो : BANDA
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बांदा। हड्डी रोग विशेषज्ञ पर गलत इलाज का आरोप लगाकर परिजनों ने जिला अस्पताल में हंगामा किया। डॉक्टर ने कहा कि उन्होंने मरीज का इलाज नहीं किया। इस पर परिजन और भड़क गए। परिजनों ने पांच लाख रुपये की मदद और बालिका के बेहतर इलाज की मांग की।
कोतवाली देहात क्षेत्र के पिपरी गांव निवासी श्यामबाबू ने बताया कि सीढ़ी से गिरने पर उसकी तीन वर्षीय पुत्री शिवानी का दायां पैर टूट गया था। 19 मई को वह जिला अस्पताल लाया। यहां डॉक्टर ने एक्स-रे के बाद प्राइवेट तौर पर गर्म पट्टी मंगाई और पुत्री शिवानी के पैर में बांध दी। फिर एक हफ्ते में आकर दिखाने को कहा। आरोप लगाया कि कसकर पट्टी बांधने से पुत्री का पैर खराब हो गया। मेडिकल कॉलेज से लेकर कानपुर तक के डॉक्टरों ने पैर काटने को कहा।
गुरुवार को जब हड्डी रोग विशेषज्ञ डॉ. विकासदीन बिल्हाटिया से शिकायत की तो उनका जवाब था कि उन्होंने मरीज का इलाज नहीं किया था। 19 मई को वह जेल ड्यूटी पर गए थे। इस पर परिजनों का गुस्सा फूट पड़ा। लगभग एक घंटे तक हंगामा हुआ। सूचना पर सीएमएस डॉ. एसएन मिश्र और ट्रामा सेंटर चिकित्साधिकारी डॉ. विनीत सचान भी मौके पर आ गए। उन्होंने परिजनों को समझाकर शांत किया। परिजनों की पांच लाख रुपये मदद और अच्छे इलाज की मांग थी। सीएमएस ने कार्रवाई का भरोसा दिया।
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अस्पताल के ओपीडी पर्चे पर किसके हस्ताक्षर हैं? दवाएं और एक्स-रे किसने लिखा है? इसकी जांच कराएंगे। मरीज के परिजनों का आरोप सही पाया गया तो कार्रवाई की जाएगी। मरीज के अच्छे उपचार के लिए मेडिकल कॉलेज प्रधानाचार्य से बात की गई है। बालिका को वहां भेज दिया गया है।
- डॉ. एसएन मिश्र, सीएमएस, जिला अस्पताल, बांदा।
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कोतवाली देहात क्षेत्र के पिपरी गांव निवासी श्यामबाबू ने बताया कि सीढ़ी से गिरने पर उसकी तीन वर्षीय पुत्री शिवानी का दायां पैर टूट गया था। 19 मई को वह जिला अस्पताल लाया। यहां डॉक्टर ने एक्स-रे के बाद प्राइवेट तौर पर गर्म पट्टी मंगाई और पुत्री शिवानी के पैर में बांध दी। फिर एक हफ्ते में आकर दिखाने को कहा। आरोप लगाया कि कसकर पट्टी बांधने से पुत्री का पैर खराब हो गया। मेडिकल कॉलेज से लेकर कानपुर तक के डॉक्टरों ने पैर काटने को कहा।
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गुरुवार को जब हड्डी रोग विशेषज्ञ डॉ. विकासदीन बिल्हाटिया से शिकायत की तो उनका जवाब था कि उन्होंने मरीज का इलाज नहीं किया था। 19 मई को वह जेल ड्यूटी पर गए थे। इस पर परिजनों का गुस्सा फूट पड़ा। लगभग एक घंटे तक हंगामा हुआ। सूचना पर सीएमएस डॉ. एसएन मिश्र और ट्रामा सेंटर चिकित्साधिकारी डॉ. विनीत सचान भी मौके पर आ गए। उन्होंने परिजनों को समझाकर शांत किया। परिजनों की पांच लाख रुपये मदद और अच्छे इलाज की मांग थी। सीएमएस ने कार्रवाई का भरोसा दिया।
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अस्पताल के ओपीडी पर्चे पर किसके हस्ताक्षर हैं? दवाएं और एक्स-रे किसने लिखा है? इसकी जांच कराएंगे। मरीज के परिजनों का आरोप सही पाया गया तो कार्रवाई की जाएगी। मरीज के अच्छे उपचार के लिए मेडिकल कॉलेज प्रधानाचार्य से बात की गई है। बालिका को वहां भेज दिया गया है।
- डॉ. एसएन मिश्र, सीएमएस, जिला अस्पताल, बांदा।