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व्याकुलता हो तभी मिलते हैं भक्त को भगवान
अमर उजाला ब्यूरो, बांदा।
Updated Tue, 23 Feb 2016 11:44 PM IST
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कुसरेजाधाम। 25वें श्री मारुति महोत्सव मेें चल रही रामकथा में कथा वाचक
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महंत विजय कौशल महराज (वृंदावन) ने मंगलवार को कहा कि भगवान दर्शन के लिए
कोई तैयारी की नहीं, बल्कि इच्छा की आवश्यकता होती है। भगवान उसी को दिखते
हैं जो भगवान की ओर देखते हैं।
कुसरेजाधाम। 25वें श्री मारुति महोत्सव मेें चल रही रामकथा में कथा वाचक महंत विजय कौशल महराज (वृंदावन) ने मंगलवार को कहा कि भगवान दर्शन के लिए कोई तैयारी की नहीं, बल्कि इच्छा की आवश्यकता होती है। भगवान उसी को दिखते हैं जो भगवान की ओर देखते हैं।
कथा वाचक ने कहा कि अवध मेें राम के अवतार लेते ही अयोध्या में धूम मच गई। जो जिस हालत में था वह उसी हालत में राजभवन की ओर दौड़ पड़ा। किसी भी शुभ काम के लिए पूर्व तैयारी की जरूरत नहीं होती। पौधों की महत्ता बताते हुए कहा कि लोग घर से कई किलोमीटर दूर स्थित शिवालय मेें पत्थर पर पानी डालने चले जाते हैं लेकिन घर के दरवाजे लगे पौधे को पानी नहीं डालते। जितनी देर टीवी के सामने बैठते हैं उसके आधे समय भी भगवान के पास नहीं बैठते। उन्होंने कहा कि व्याकुलता होनी जरूरी है। कथा के दौरान संगीतमय भजन भी श्रद्धालुओं को मस्त करता रहा।
इसके पूर्व कथा आयोजन के मुख्य प्रेरक राजाबाबू सिंह (आईपीएस) ने कहा कि ममता और करुणा से ही नर ‘नारायण’ बन जाता है। उन्होंने इस क्षेत्र के पिछड़ेपन की पीड़ा झेली है। ‘परहित सरिस धर्म नहीं भाई, पर पीड़ा सम नहीं अधमाई’ चौपाई का उल्लेख करते हुए कहा कि हमें दूसरों को पीड़ा नहीं पहुंचानी चाहिए। कुरसेजाधाम के महंत परमेश्वरदास से भी सभी श्रद्धालुओं ने आशीर्वाद लिया।
इस अवसर पर चित्रकूट, वृंदावन, मथुरा आदि से आए कई संत और स्कान द्वारा मथुरा में संचालित शक्ति वेदांत गुुरुकुल एंड इंटरनेशनल स्कूल के जनसंपर्क प्रभारी साक्षी पुरुष दास भी उपस्थित थे। पूर्व जिला पंचायत सदस्य दलपत सिंह, जयराम सिंह, अधिवक्ता राजेंद्र सिंह चौहान, शिवपाल सिंह, लक्ष्मण सिंह, भाजपा नेता राजेश द्विवेदी, डॉ. शैलेंद्र सिंह (एमपी), शिव गोपाल सिंह (लखनऊ), महुई प्रधान पति मलखे श्रीवास इत्यादि उपस्थित रहे।
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कुसरेजाधाम। 25वें श्री मारुति महोत्सव मेें चल रही रामकथा में कथा वाचक महंत विजय कौशल महराज (वृंदावन) ने मंगलवार को कहा कि भगवान दर्शन के लिए कोई तैयारी की नहीं, बल्कि इच्छा की आवश्यकता होती है। भगवान उसी को दिखते हैं जो भगवान की ओर देखते हैं।
कथा वाचक ने कहा कि अवध मेें राम के अवतार लेते ही अयोध्या में धूम मच गई। जो जिस हालत में था वह उसी हालत में राजभवन की ओर दौड़ पड़ा। किसी भी शुभ काम के लिए पूर्व तैयारी की जरूरत नहीं होती। पौधों की महत्ता बताते हुए कहा कि लोग घर से कई किलोमीटर दूर स्थित शिवालय मेें पत्थर पर पानी डालने चले जाते हैं लेकिन घर के दरवाजे लगे पौधे को पानी नहीं डालते। जितनी देर टीवी के सामने बैठते हैं उसके आधे समय भी भगवान के पास नहीं बैठते। उन्होंने कहा कि व्याकुलता होनी जरूरी है। कथा के दौरान संगीतमय भजन भी श्रद्धालुओं को मस्त करता रहा।
इसके पूर्व कथा आयोजन के मुख्य प्रेरक राजाबाबू सिंह (आईपीएस) ने कहा कि ममता और करुणा से ही नर ‘नारायण’ बन जाता है। उन्होंने इस क्षेत्र के पिछड़ेपन की पीड़ा झेली है। ‘परहित सरिस धर्म नहीं भाई, पर पीड़ा सम नहीं अधमाई’ चौपाई का उल्लेख करते हुए कहा कि हमें दूसरों को पीड़ा नहीं पहुंचानी चाहिए। कुरसेजाधाम के महंत परमेश्वरदास से भी सभी श्रद्धालुओं ने आशीर्वाद लिया।
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इस अवसर पर चित्रकूट, वृंदावन, मथुरा आदि से आए कई संत और स्कान द्वारा मथुरा में संचालित शक्ति वेदांत गुुरुकुल एंड इंटरनेशनल स्कूल के जनसंपर्क प्रभारी साक्षी पुरुष दास भी उपस्थित थे। पूर्व जिला पंचायत सदस्य दलपत सिंह, जयराम सिंह, अधिवक्ता राजेंद्र सिंह चौहान, शिवपाल सिंह, लक्ष्मण सिंह, भाजपा नेता राजेश द्विवेदी, डॉ. शैलेंद्र सिंह (एमपी), शिव गोपाल सिंह (लखनऊ), महुई प्रधान पति मलखे श्रीवास इत्यादि उपस्थित रहे।
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