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बालिकाओं संग दुष्कर्म के दो दोषियों को 10-10 वर्ष की कैद
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बांदा। पड़ोसी सात वर्षीय और 14 वर्षीय बालिकाओं से दुष्कर्म के अलग-अलग मामलों में शुक्रवार को अपर जिला न्यायाधीश ने दो दोषियों को 10-10 वर्ष की कैद और 50 हजार एवं 10 हजार रुपये जुर्माना लगाया।
देहात कोतवाली क्षेत्र के एक गांव में अनुसूचित जाति की 14 वर्षीय किशोरी 15 अप्रैल 2019 को शाम करीब छह बजे पड़ोस में दुकान से शैंपू लेने गई थी। तभी स्वजातीय दुकानदार अशोक उसे दुकान के अंदर ले गया और धौंस-धमकी देकर उसके साथ दुष्कर्म किया।
एडीजीसी रामसुफल सिंह के मुताबिक, दोषी ने इसके बाद डरा-धमकाकर छोड़ दिया। घटना के तीसरे दिन किशोरी ने घरवालों को जानकारी दी। किशोरी के भाई ने थाने रिपोर्ट दर्ज कराई। अगले ही दिन पुलिस ने गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। वह अभी भी जेल में है।
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विवेचना के बाद पुलिस ने आरोप पत्र दाखिल किया। एडीजीसी के मुताबिक, शुक्रवार को अपर जिला न्यायाधीश ने दोषी अशोक को पॉक्सो एक्ट में 10 वर्ष की जेल और 50 हजार रुपये जुर्माना की सजा दी। जुर्माना न देने पर एक वर्ष और जेल में रहना होगा। धारा 504 में एक वर्ष की कैद और 5 हजार रुपये जुर्माना किया। जुर्माना न देने पर 10 दिन और जेल में रहना होगा।
दूसरी घटना में बदौसा थाना क्षेत्र के एक गांव में 7 अक्तूबर 2018 को हुई। एडीजीसी रामसुफल सिंह के मुताबिक, दोपहर सात वर्षीय बालिका को उसके घर के दरवाजे से पड़ोसी चंद्रशेखर उर्फ तन्नू उठा ले गया और खेत में उसके साथ दुष्कर्म की कोशिश की। इसी बीच खोजते हुए बालिका के परिजन पहुंच गए तो भाग निकला।
पुलिस ने 10 जनवरी 2019 को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। विवेचना के बाद अदालत में चार्ज शीट दाखिल की। एडीजीसी ने 4 गवाह पेश किए। अपर जिला न्यायाधीश ने दुष्कर्म के दोषी चंद्रशेखर को पॉक्सो एक्ट में 10 वर्ष की कैद व 10 हजार रुपये जुर्माना किया। धारा 506 में दो माह की कैद व एक हजार रुपये जुर्माने की सजा दी। जुर्माना न देने पर 10 दिन और जेल में रहना होगा।
तत्कालीन एसओ से मांगा स्पष्टीकरण
सात वर्षीय बालिका के साथ दुष्कर्म में तत्कालीन बदौसा एसओ आलोक सिंह द्वारा समझौता कराने की कोशिश पर अपर जिला सत्र न्यायाधीश ने नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण मांगा है। कहा कि अपने दायित्व के पालन में असमर्थ रहे हैं। न्यायाधीश ने कहा कि स्पष्टीकरण से अदालत संतुष्ट नहीं हुई तो मुकदमे की कार्रवाई होगी।
गौरतलब है कि बालिका की मां ने थानाध्यक्ष द्वारा रिपोर्ट दर्ज न करने पर धारा 156 (3) के तहत सीजेएम के यहां अर्जी दी थी। इसी के बाद सीजेएम के आदेश पर रिपोर्ट दर्ज हुई और आरोपी की गिरफ्तारी व बालिका का डाक्टरी परीक्षण कराया गया।
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देहात कोतवाली क्षेत्र के एक गांव में अनुसूचित जाति की 14 वर्षीय किशोरी 15 अप्रैल 2019 को शाम करीब छह बजे पड़ोस में दुकान से शैंपू लेने गई थी। तभी स्वजातीय दुकानदार अशोक उसे दुकान के अंदर ले गया और धौंस-धमकी देकर उसके साथ दुष्कर्म किया।
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एडीजीसी रामसुफल सिंह के मुताबिक, दोषी ने इसके बाद डरा-धमकाकर छोड़ दिया। घटना के तीसरे दिन किशोरी ने घरवालों को जानकारी दी। किशोरी के भाई ने थाने रिपोर्ट दर्ज कराई। अगले ही दिन पुलिस ने गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। वह अभी भी जेल में है।
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विवेचना के बाद पुलिस ने आरोप पत्र दाखिल किया। एडीजीसी के मुताबिक, शुक्रवार को अपर जिला न्यायाधीश ने दोषी अशोक को पॉक्सो एक्ट में 10 वर्ष की जेल और 50 हजार रुपये जुर्माना की सजा दी। जुर्माना न देने पर एक वर्ष और जेल में रहना होगा। धारा 504 में एक वर्ष की कैद और 5 हजार रुपये जुर्माना किया। जुर्माना न देने पर 10 दिन और जेल में रहना होगा।
दूसरी घटना में बदौसा थाना क्षेत्र के एक गांव में 7 अक्तूबर 2018 को हुई। एडीजीसी रामसुफल सिंह के मुताबिक, दोपहर सात वर्षीय बालिका को उसके घर के दरवाजे से पड़ोसी चंद्रशेखर उर्फ तन्नू उठा ले गया और खेत में उसके साथ दुष्कर्म की कोशिश की। इसी बीच खोजते हुए बालिका के परिजन पहुंच गए तो भाग निकला।
पुलिस ने 10 जनवरी 2019 को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। विवेचना के बाद अदालत में चार्ज शीट दाखिल की। एडीजीसी ने 4 गवाह पेश किए। अपर जिला न्यायाधीश ने दुष्कर्म के दोषी चंद्रशेखर को पॉक्सो एक्ट में 10 वर्ष की कैद व 10 हजार रुपये जुर्माना किया। धारा 506 में दो माह की कैद व एक हजार रुपये जुर्माने की सजा दी। जुर्माना न देने पर 10 दिन और जेल में रहना होगा।
तत्कालीन एसओ से मांगा स्पष्टीकरण
सात वर्षीय बालिका के साथ दुष्कर्म में तत्कालीन बदौसा एसओ आलोक सिंह द्वारा समझौता कराने की कोशिश पर अपर जिला सत्र न्यायाधीश ने नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण मांगा है। कहा कि अपने दायित्व के पालन में असमर्थ रहे हैं। न्यायाधीश ने कहा कि स्पष्टीकरण से अदालत संतुष्ट नहीं हुई तो मुकदमे की कार्रवाई होगी।
गौरतलब है कि बालिका की मां ने थानाध्यक्ष द्वारा रिपोर्ट दर्ज न करने पर धारा 156 (3) के तहत सीजेएम के यहां अर्जी दी थी। इसी के बाद सीजेएम के आदेश पर रिपोर्ट दर्ज हुई और आरोपी की गिरफ्तारी व बालिका का डाक्टरी परीक्षण कराया गया।