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Banda News: जन औषधि केंद्र में ढाई लाख की दवाएं एक्सपायर

Mon, 24 Jul 2023 01:13 AM IST
कानपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बांदा
संवाद न्यूज एजेंसी, बांदा Updated Mon, 24 Jul 2023 01:13 AM IST
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Two and a half lakh medicines expire in Jan Aushadhi Kendra
फोटो-23 बीएनडीपी-06, मनीषा, स्वराज कॉलोनी, बांदा।
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फोटो-23 बीएनडीपी-07,गोरेलाल, जसपुरा।

फाेटो-23 बीएनडीपी-08,सुंदरलाल, चमरौड़ी, बांदा।
फोटो-23 बीएनडीपी-09, अमरनाथ, रामपुर, जपसुरा।
फोटो-23 बीएनडीपी-10, जिला अस्पताल के भारतीय जन औषधि केंद्र में दवा लेते मरीज व तीमारदार।
जन औषधि केंद्र में ढाई लाख की दवाएं एक्सपायर
कमीशन के खेल में डॉक्टर निजी मेडिकल स्टोर्स की लिख रहें दवाएं

जिला अस्पताल परिसर में संचालित जन औषधि केंद्र का मामला
संवाद न्यूज एजेंसी
बांदा। जिला अस्पताल परिसर में बने जन औषधि केंद्र में ढाई लाख की सस्ती दवाएं एक्सपायर हो गईं। वजह डॉक्टर जन औषधि केंद्र की बजाय कमीशन के खेल में बाहरी मेडिकल स्टोर में उपलब्ध महंगी दवाएं लिखते रहे। रेट में अंतर की बात करें जो दवा जन औषधि केंद्र में 10 रुपये में उपलब्ध है, वही दवा निजी मेडिकल स्टोर पर तीन गुना अधिक रेट में मिल रही है। इसके बाद भी डॉक्टर जन औषधि केंद्र को छोड़कर बाहरी मेडिकल स्टोर की दवाएं लिख रहे हैं, जबकि नियमानुसार डॉक्टरों को वही दवाएं लिखनी हैं, जो जन औषधि केंद्र में उपलब्ध हैं।



जिला अस्पताल परिसर में बने जन औषधि केंद्र की करीब ढाई लाख रुपये की दवाएं एक्सपायर हो गई हैं। एक्सपायर होने वाली दवाओं में यू टोनिक, एजीथ्रोमाइसीन, टेलमी शॉर्ट 10, ग्लाइमी प्राइट 1, सीटोकॉनाजोल, फ्यूकोनाजॉल आदि शामिल हैं। यह दवाएं बेहद कम दरों पर जन औषधि केंद्र में उपलब्ध थीं। जन औषधि केंद्र मेें यू टॉनिक की कीमत 52 रुपये है, जबकि बाहर मेडिकल स्टोर में इसकी कीमत 180 रुपये है। जन औषधि केंद्र में एजीथ्रोमाइसीन 32 रुपये की 10 टेबलेट्स हैं। बाहर यही दवा 90 रुपये की तीन टेबलेट्स मिल रही है।
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टेंलमी शॉर्ट 10 टेबलेट जन औषधि केंद्र में मात्र नौ रुपये में मिलती हैं। बाहर यही दवा 110 रुपये में मिल रही है। इसी तरह ग्लाइमी प्राइट 1 यहां 18 रुपये की है। यही दवा बाहर 105 रुपये की मिल रही है। सीटोकॉनाजॉल, फ्यूकोनाजॉल की भी दवाओं की दरों में भी इसी तरह से बड़ा अंतर है। शहर में जिला अस्पताल के अलावा मेडिकल कॉलेज, कालूकुआं चौराहा समेत पांच जन औषधि केंद्र हैं। लगभग सभी केंद्रों पर दवाएं एक्सपायर हो रही हैं। इसकी वजह डॉक्टरों द्वारा जन औषधि केंद्र की बजाय निजी मेडिकल स्टोर्स से दवाएं लिखा जाना है।
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इनसेट...



जन औषधि केंद्र के संचालकों का कहना है कि जिला अस्पताल के डॉक्टर मरीजों के पर्चे में यहां की दवाएं जानबूझकर नहीं लिखते हैं। यहां की दवाएं लिखते भी हैं तो वह जो उपलब्ध नहीं होती हैं। जन औषधि केंद्र में जो दवाएं उपलब्ध होती हैं, उनकी लिस्ट बाकायदा डॉक्टर के पास चस्पा कर देते हैं। यही नहीं जो दवाएं डॉक्टर पर्चे पर लिखते हैं, जब उनको मंगा लेते हैं तो उन दवाओं को लिखना बंद कर देते हैं। नियमानुसार जन औषधि केंद्र में उपलब्ध दवाओं के आधार पर ही डॉक्टरों को मरीजों को दवाएं लिखनी चाहिए।

इनसेट

मॉनिटरिंग नहीं करते जिम्मेदार



सूत्रों के मुताबिक यहां कमिशन का खेल चल रहा है। बाहर की दवाओं में डॉक्टर काे 40 से 60 प्रतिशत तक कमीशन मिलता है। इस मनमानी का बड़ा कारण अस्पताल प्रशासन द्वारा जन औषधि केंद्र की दवाओं को लिखने को लेकर डॉक्टरों के पर्चे की मॉनिटरिंग नहीं कराना है। जिला अस्पताल की बात करें तो यहां पर जिम्मेदारों ने कभी यह जानने की कोशिश ही नहीं की कि ओपीडी में बैठे चिकित्सक कौन सी और कहां की दवाएं लिख रहे हैं।


जन औषधि केंद्र पर नहीं मिलतीं डॉक्टरों की लिखीं दवाएं
स्वराज कॉलोनी निवासी मनीषा का कहना है कि डॉक्टर ने ऐसी दवाएं लिख दीं, जो जन औषधि केंद्र में मिली ही नहीं, बाहर पता किया तो 750 की दवाएं मिल रही हैं। जसपुरा निवासी गोरेलाल का कहना है कि रीढ़ में दर्द था। डॉक्टर ने दवाएं लिखीं हैं। दो दवा तो जन औषधि केंद्र में मिल गई हैं, जबकि अन्य दवाएं बाहरी मेडिकल स्टोर से लेनी पड़ेंगी। चमरौड़ी निवासी सुंदरलाल का कहना है कि गुर्दे में पथरी हो गई है। डॉक्टर ने जो दवाएंं लिखी हैं, जन औषधि केंद्र में मिली ही नहीं। अब बाहर से ही दवा खरीदनी पड़ेगी। रामपुर निवासी अमरनाथ का कहना है कि कई दिनों सें नींद नहीं आ रही थी। डॉक्टर ने दवा लिखी है, कुछ दवाएं तो जन औषधि केंद्र में मिल गई हैं, कुछ बाहर से खरीदनी पड़ेंगी।




वर्जन...

प्रभारी सीएमएस डॉ. विनीत सचान का कहना है कि जन औषधि केंद्र से दवाएं खूब बिकतीं हैं। वैसे डॉक्टरों को निर्देश दिए गए हैं कि अंदर की दवाएं लिखें, यदि न उपलब्ध हों तो जन औषधि केंद्र की लिखें, लेकिन बाहर की न लिखें। दवाएं एक्सपायर होने की जानकारी नहीं है।
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