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धूमधाम से रचाया तुलसी विवाह
ब्यूरो/अमर उजाला, बांदा
Updated Tue, 24 Nov 2015 12:06 AM IST
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बांदा। महिलाओं ने सोमवार को तुलसी विवाह धूमधाम से
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रचाया। कार्तिक मास में स्नान करने वाली महिलाओं ने निर्जल उपवास रखा।
श्रीकृष्ण के मंदिर और घरों में विधिवत पूजा-अर्चना की।
महिलाओं के समूहों ने सोमवार को सुबह महेश्वरी देवी मंदिर में धूमधाम से विष्णु-तुलसी विवाह रचाया। उपवास रखकर महिलाओं ने आंगन में लगी तुलसी को आकर्षक ढंग से सजाया।
शृंगार का सामान और तरह के पकवान बनाकर भोग लगाया। ग्रामीण इलाकों में महिलाओं ने तुलसी विवाह में बाकायदा सामूहिक भोज भी किया।
इस संबंध में कथा प्रचलित है कि वृंदा, शंखासुर दैत्य की ऱ्पतिव्रता पत्नी थी। भगवान ने इस दैत्य को मारने की कोशिश की, पर वृंदा के सतित्व के कारण वह मार नहीं सके।
तब वृंदा के स्नान करते समय भगवान ने शंखासुर का रूप धारण किया और उससे मिलन किया। पतिव्रत टूटने से वृंदा ने भगवान को पत्थर होने का श्राप दे दिया।
इस पर भगवान ने वृंदा को वृक्ष होने का श्राप दे दिया। कहा कि मैं तुम्हारे बिन नहीं रह सकता। कलयुग में भगवान गांडकी नदी में ठाकुरजी के रूप में प्रकट हुए और वृंदा वृंदावन में तुलसी के रूप में।
यह वृतांत देवी भागवत तथा भविष्येत्तर में मिलता है। तभी से तुलसी और ठाकुरजी का विवाह कर सभी लोग अपने को धन्य मानते हैं।
महिलाओं के समूहों ने सोमवार को सुबह महेश्वरी देवी मंदिर में धूमधाम से विष्णु-तुलसी विवाह रचाया। उपवास रखकर महिलाओं ने आंगन में लगी तुलसी को आकर्षक ढंग से सजाया।
शृंगार का सामान और तरह के पकवान बनाकर भोग लगाया। ग्रामीण इलाकों में महिलाओं ने तुलसी विवाह में बाकायदा सामूहिक भोज भी किया।
इस संबंध में कथा प्रचलित है कि वृंदा, शंखासुर दैत्य की ऱ्पतिव्रता पत्नी थी। भगवान ने इस दैत्य को मारने की कोशिश की, पर वृंदा के सतित्व के कारण वह मार नहीं सके।
तब वृंदा के स्नान करते समय भगवान ने शंखासुर का रूप धारण किया और उससे मिलन किया। पतिव्रत टूटने से वृंदा ने भगवान को पत्थर होने का श्राप दे दिया।
इस पर भगवान ने वृंदा को वृक्ष होने का श्राप दे दिया। कहा कि मैं तुम्हारे बिन नहीं रह सकता। कलयुग में भगवान गांडकी नदी में ठाकुरजी के रूप में प्रकट हुए और वृंदा वृंदावन में तुलसी के रूप में।
यह वृतांत देवी भागवत तथा भविष्येत्तर में मिलता है। तभी से तुलसी और ठाकुरजी का विवाह कर सभी लोग अपने को धन्य मानते हैं।