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हेलमेट अभियान को बताया जीवन रक्षक
ब्यूरो/अमर उजाला, बांदा
Updated Sat, 12 Dec 2015 10:51 PM IST
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ने बाइक सवारों को हेलमेट लगाने को लेकर अमर उजाला की पहल की सराहना करते
हुए इसे जीवन बचाने के लिए सबसे जरूरी बताया। साथ ही गोष्ठियों व सामाजिक
कार्यक्रमों में यह मुद्दा प्राथमिकता के साथ रखने को कहा है।
प्रगतिशील किसान व समाजसेवी प्रेम सिंह (बड़ोखर खुर्द) का कहना है कि इंसान की थोड़ी से चूक उसके पूरे परिवार के लिए घातक बन सकती है।
हेलमेट इतना महंगा भी नहीं है कि जिसे कोई बाइक सवार खरीद न सके। हेलमेट पहनने से 90 फीसदी लोगों की जान बचने की पूरी उम्मीद रहती है। बिना हेलमेट के सिर पर जरा भी चोट जानलेवा हो सकती है।
उन्होंने किसानों को सलाह दी है कि अपने परिजनों को बाइक पर घर से निकलते समय हेलमेट अनिवार्य रूप से लगाने को कहें।
प्रवास सोसाइटी के आशीष सागर ने भी हेलमेट लगा कर चलने की पहल को सराहते हुए कहा है कि मानव जीवन अमूल्य है। इसकी सुरक्षा में कोई कोताही नहीं बरतनी चाहिए।
सड़क हादसों में सबसे अधिक दुर्घटनाएं दो पहिया वाहनों से होती हैं। बाइक चलाने वाले हेलमेट लगाने के कानून को मजबूरी समझते हैं। इस सोच में बदलाव लाने की जरूरत है। हेलमेट को कानूनी मजबूरी न समझ कर जीवन रक्षक समझें।
प्राथमिक शिक्षक संघ जिलाध्यक्ष आशुतोष त्रिपाठी का कहना है कि उन्होंने ऐसी कई दुर्घटनाएं देखी हैं जिनमें हेलमेट न पहनने से हेड इंजरी के चलते लोगों की जान जोखिम में पड़ गई।
उनका मानना है कि बाइक दुर्घटना में होने वाली मौतों में 80 फीसदी घटनाएं सिर में चोट से होती हैं। सिर सुरक्षित बच गया तो अन्य चोटों पर इलाज के बाद जीवन बच जाता है। उन्होंने टीचरों को हेलमेट इस्तेमाल की सलाह दी है।
प्रगतिशील किसान व समाजसेवी प्रेम सिंह (बड़ोखर खुर्द) का कहना है कि इंसान की थोड़ी से चूक उसके पूरे परिवार के लिए घातक बन सकती है।
हेलमेट इतना महंगा भी नहीं है कि जिसे कोई बाइक सवार खरीद न सके। हेलमेट पहनने से 90 फीसदी लोगों की जान बचने की पूरी उम्मीद रहती है। बिना हेलमेट के सिर पर जरा भी चोट जानलेवा हो सकती है।
उन्होंने किसानों को सलाह दी है कि अपने परिजनों को बाइक पर घर से निकलते समय हेलमेट अनिवार्य रूप से लगाने को कहें।
प्रवास सोसाइटी के आशीष सागर ने भी हेलमेट लगा कर चलने की पहल को सराहते हुए कहा है कि मानव जीवन अमूल्य है। इसकी सुरक्षा में कोई कोताही नहीं बरतनी चाहिए।
सड़क हादसों में सबसे अधिक दुर्घटनाएं दो पहिया वाहनों से होती हैं। बाइक चलाने वाले हेलमेट लगाने के कानून को मजबूरी समझते हैं। इस सोच में बदलाव लाने की जरूरत है। हेलमेट को कानूनी मजबूरी न समझ कर जीवन रक्षक समझें।
प्राथमिक शिक्षक संघ जिलाध्यक्ष आशुतोष त्रिपाठी का कहना है कि उन्होंने ऐसी कई दुर्घटनाएं देखी हैं जिनमें हेलमेट न पहनने से हेड इंजरी के चलते लोगों की जान जोखिम में पड़ गई।
उनका मानना है कि बाइक दुर्घटना में होने वाली मौतों में 80 फीसदी घटनाएं सिर में चोट से होती हैं। सिर सुरक्षित बच गया तो अन्य चोटों पर इलाज के बाद जीवन बच जाता है। उन्होंने टीचरों को हेलमेट इस्तेमाल की सलाह दी है।