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ट्रामा सेंटर के आइसोलेशन वार्ड में लगे तीन वेंटिलेटर
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जिला अस्पताल ट्रामा सेंटर में लगी वेंटिलेटर चालू करती नर्स रेनू।
- फोटो : BANDA
बांदा। कोरोना संक्रमण के मंडराते खतरे के बीच जिला अस्पताल के ट्रामा सेंटर में धूल फांक रही वेंटिलेटर मशीनें आखिरकार तीन साल बाद चालू हो गईं लेकिन हैरत की बात यह है कि डाक्टरों को इनके इस्तेमाल की अभी जानकारी नहीं है। मुख्य चिकित्सा अधीक्षक (सीएमएस) का कहना है कि नामित डाक्टरों को प्रशिक्षित किया जा रहा है।
कोरोना संक्रमण के बढ़ते खतरे को लेकर स्वास्थ्य विभाग तैयारियों में जुटा है। इसी के तहत जिला अस्पताल ट्रामा सेंटर में बनाए गए कोरोना आइसोलेशन वार्ड में तीन वेंटिलेटर मशीनें चालू कर दी गईं। हालांकि ये मशीनें वर्ष 2017 से यहां रखीं थीं। इन मशीनों के चालू होने से गंभीर मरीजों को कानपुर-लखनऊ नहीं जाना पड़ेगा।
उधर, लखनऊ के इंजीनियरों ने वेंटिलेटर तो चालू कर दिए, लेकिन इनके इस्तेमाल की जानकारी अस्पताल के डाक्टरों को फिलहाल नहीं है। इसकी वजह प्रशिक्षण का अभाव बताया जा रहा है।
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सीएमएस डॉ. एसएन मिश्रा ने बताया कि एनेस्थेटिस्ट डॉ. एसपी दोहरे, डॉ. सेवालाल और डॉ. सत्येंद्र सिंह को नामित किया गया है। इन्हें मेडिकल कालेज में प्रशिक्षित किया गया है।
शुक्रवार को दोबारा नामित डाक्टरों को वेंटिलेटर इस्तेमाल संबंधी हरेक बारीकियों से अवगत कराया गया है। उन्होंने बताया कि वेंटिलेटर का प्रयोग बहुत ही सावधानी से करना होता है।
एक्सपर्ट ही इंडोट्रैकियल ट्यूब मरीज के गले में डालते हैं। साथ ही इसके इस्तेमाल से पूर्व मरीज की स्थिति की जानकारी अनिवार्य है। प्रेशर से फेफड़े को क्षति पहुंचने का भी खतरा रहता है। उन्होंने कहा कि जरूरत पर ही वेंटिलेटर का इस्तेमाल किया जाएगा।
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कोरोना संक्रमण के बढ़ते खतरे को लेकर स्वास्थ्य विभाग तैयारियों में जुटा है। इसी के तहत जिला अस्पताल ट्रामा सेंटर में बनाए गए कोरोना आइसोलेशन वार्ड में तीन वेंटिलेटर मशीनें चालू कर दी गईं। हालांकि ये मशीनें वर्ष 2017 से यहां रखीं थीं। इन मशीनों के चालू होने से गंभीर मरीजों को कानपुर-लखनऊ नहीं जाना पड़ेगा।
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उधर, लखनऊ के इंजीनियरों ने वेंटिलेटर तो चालू कर दिए, लेकिन इनके इस्तेमाल की जानकारी अस्पताल के डाक्टरों को फिलहाल नहीं है। इसकी वजह प्रशिक्षण का अभाव बताया जा रहा है।
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सीएमएस डॉ. एसएन मिश्रा ने बताया कि एनेस्थेटिस्ट डॉ. एसपी दोहरे, डॉ. सेवालाल और डॉ. सत्येंद्र सिंह को नामित किया गया है। इन्हें मेडिकल कालेज में प्रशिक्षित किया गया है।
शुक्रवार को दोबारा नामित डाक्टरों को वेंटिलेटर इस्तेमाल संबंधी हरेक बारीकियों से अवगत कराया गया है। उन्होंने बताया कि वेंटिलेटर का प्रयोग बहुत ही सावधानी से करना होता है।
एक्सपर्ट ही इंडोट्रैकियल ट्यूब मरीज के गले में डालते हैं। साथ ही इसके इस्तेमाल से पूर्व मरीज की स्थिति की जानकारी अनिवार्य है। प्रेशर से फेफड़े को क्षति पहुंचने का भी खतरा रहता है। उन्होंने कहा कि जरूरत पर ही वेंटिलेटर का इस्तेमाल किया जाएगा।