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खुले में शौच से मुक्त नहीं कोई गांव
ब्यूरो अमर उजाला, बांदा
Updated Fri, 12 Aug 2016 11:40 PM IST
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शौचालय
- फोटो : अमर उजाला
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बांदा। स्वच्छता भारत मिशन के तहत डेढ़ साल में डेढ़ अरब रुपये खर्च करने के बावजूद एक भी गांव खुले में शौच से मुक्त नहीं हो पाया। डीएम ने अब यह जिम्मा सचिवों को सौंपा है। अगस्त में सभी ब्लाकों के एक-एक गांवों को खुले में शौच से मुक्त किया जाएगा।
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सितंबर से सभी सचिव एक-एक गांवों को गोद लेकर उन्हें खुले में शौच से मुक्त कराएंगे। पंचायती राज विभाग जरूरत के अनुसार गांवों को धनराशि उपलब्ध कराएगा। अखिल भारतीय समाज कल्याण संस्थान गांव-गांव जादू और नृत्य के जरिये ग्रामीणों को जागरूक करेगा। शौच मुक्त गांवों को शासन से पुरस्कृत किया जाएगा।
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बांदा जिले में 471 ग्राम पंचायतें हैं। स्वच्छ भारत मिशन का कार्यक्रम दो साल से चल रहा है। इसके तहत हर साल इन ग्राम पंचायतों को करोड़ों रुपये दिए जा रहे हैं। बावजूद इसके अभी तक एक भी ग्राम पंचायत खुले में शौच मुक्त नहीं हो सकीं।
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पिछले वर्ष बबेरू के सातर, कमासिन के कुचौली और बड़ोखर खुर्द ब्लाक के रेउना गांव को इस योजना में शामिल किया गया था, लेकिन यहां खुले में शौच का प्रचलन बंद नहीं हो पाया। इस साल 30 गांवों को इस योजना में शामिल किया गया। ग्राम पंचायतों को शौचालयों की धनराशि भी जारी कर दी गई। वित्तीय वर्ष के तीन माह बीतने के बावजूद अभी तक कोई गांव खुले में शौच से मुक्त नहीं हो पाया।
सातर और कुचौली समेत आठ गांवों को 25 अगस्त तक शौच मुक्त करने का सख्त निर्देश डीएम ने डीपीआरओ और बीडीओ को दिया है। सितंबर में एक-एक गांव गोद लेकर सचिव इन्हें खुले में शौच मुक्त कराएंगे। डीपीआरओ आनंद प्रकाश और स्वच्छ भारत मिशन जिला समन्वयक मनोज द्विवेदी ने सातर और कुचौली में डेरा डाल दिया है।
उधर, अखिल भारतीय समाज सेवा संस्थान को गांव-गांव नौटंकी, नृत्य और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के जरिये ग्रामीणों को स्वच्छ शौचालय के लिए प्रेरित करने की जिम्मेदारी सौंपी है। सभी बीडीओ, एडीओ और सचिवों को गांवों में नियमित भ्रमण कर शौचालय बनवाने और जो बन चुके हैं, उनके प्रयोग के लिए ग्रामीणों को प्रेरित करने को कहा है। ज्यादा गांवों को ओडीएफ कराने वाले सचिवों को पुरस्कृत किया जाएगा।
शौचालयों के लिए धनराशि की कमी आड़े नहीं आएगी। जरूरत के मुताबिक प्रधानों को शौचालयों की धनराशि भेजी जा चुकी है। गांवों को खुले में शौच से मुक्त करने के लिए हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं। सचिवों और प्रधानों को इसके लिए सख्त निर्देश दिए हैं। खुले में शौच मुक्त हो चुके ग्रामों को विकास के लिए ज्यादा धनराशि दी जाएगी। वहां के सचिव और प्रधान पुरस्कृत भी किए जाएंगे।
-आनंद प्रकाश, जिला पंचायत राज अधिकारी, बांदा।